आत्मनो मुखदोषेण बध्यन्ते शुकसारिकाः ।
बकास्तत्र न बध्यन्ते मौनं सर्वार्थसाधनम् । । – सुभाषितरत्नसमुच्चय
अर्थ : शांत रहनेवाले बगुलेकी अपेक्षा, तोते, सारिका एवं अन्य बोलनेवाले पक्षी अपने बोलनेके दोषके कारण पकडे जाते हैं ! मितभाषी होना या शांत रहना सबसे हितकारी है !
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