शिवत्वहीन आधुनिक विज्ञानके वैज्ञानिक अविष्कारोंका कुप्रभाव, स्वयं ही अपने शोधसे बता रहे हैं कि आधुनिक विज्ञानके सारे उपकरण जैसे फ्रिज (शीत कपाटिका), धुलाई यन्त्र इत्यादि स्थूल स्तरपर ध्वनि प्रदूषण करते हैं ।
यह तो मात्र स्थूल पक्ष है, सूक्ष्म स्तरपर इनसे प्रचण्ड मात्रामें अनिष्टकारी काली शक्तियोंका प्रक्षेपण होता है, जिससे हमारे शरीर, मन एवं बुद्धिपर विपरीत प्रभाव पडता है; किन्तु इसे मापने हेतु आजके आधुनिक वैज्ञानिक, अभीतक कोई उपकरण नहीं बना पाए हैं, अन्यथा अपने शोधपर और सिर पीटते !
कुछ लोगोंको लगता था कि भारतीय संस्कृतिमें वैज्ञानिक उपकरण क्यों नहीं थे ? हमारे मनीषी उस बौद्धिक विकासकी ऊंचाईपर थे कि जब विदेशमें लोग पेडोंपर रहते थे तो वे अपनी सूक्ष्म प्रज्ञा शक्तिके बलपर पृथ्वी और सूर्यकी दूरीतकको बता चुके थे ! हमारे यहां भी बहुत ही उन्नत विज्ञान था, जो धर्मग्लानि एवं सतत् होनेवाले गत एक सहस्र वर्षके क्रूर विदेशी आक्रान्ताओंके आक्रमणके कारण कालके प्रवाहमें नष्टप्राय हो चुका है; उस शिवत्वयुक्त विज्ञानकी मर्यादाको पुनर्स्थापित करनेकी भगवान शिव हम सभी कर्मनिष्ठ हिन्दुओंको शक्ति दे, यह उनके श्रीचरणोंमें हम प्रार्थना करते हैं ।
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