श्रीगुरु उवाच


सात्त्विक चित्रकार देवताके सात्त्विक चित्र निकालते हैं । इसके विपरीत म.फि. हुसैन जैसे तामसिक चित्रकार देवताओंके नग्न एवं तामसिक चित्र निकालते हैं । इसमें आश्‍चर्यकी बात यह है कि इस संदर्भमें मृतप्राय हिन्दुओंने अनेक वर्षोंतक कुछ भी नहीं किया, जिस कारण अगली पीढीपर भी वैसे ही संस्कार हुए हैं ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था



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