श्रीगुरु उवाच


कहां मराठी भाषाको राजभाषाका स्थान देनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज, तो कहां मराठी पाठशालाओंमें उर्दू भाषाकी शिक्षा देकर मुसलमानोंका तुष्टीकरण करनेवाले वर्तमान राज्यकर्ता !
सनातनद्वारा किए गए संशोधनके अनुसार संस्कृत भाषा सर्वाधिक सात्त्विक है । सात्त्विकतामें उसके पश्चात् क्रमानुसार मराठी तथा हिन्दी भाषा है । अंग्रेजी और उर्दू भाषाओंमें सात्त्विकता नहीं है । ऐसा होते हुए उर्दू सिखानेवाला शासन (सरकार) देशकी कल्पनातीत हानि कर रहा हैं । इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके अतिरिक्त और कोई पर्याय नहीं रह गया है ।
उर्दूका न वैज्ञानिक प्रगतिमें उपयोग है, न साधनामें ऐसेमें इस भाषाको सिखाकर बच्चोंका समय क्यों व्यर्थ कर रहे हैं ? मुसलमानोंके तुष्टिकरणका यह और एक उदाहरण है । अब मुसलमानोंकी नियुक्ति ‘उर्दू शिक्षक’के रूपमें सभी पाठशालाओंमें की जाएगी ।



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