आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें (भाग – २४.१)


टमाटर (संस्कृत नाम – हिण्डीरः, रक्त वृन्तकम्; अंग्रेजी नाम – टोमैटो, वैज्ञानिक नाम – सोलनम लाइकोपेर्सिकम) विश्वमें अधिक प्रयोग होनेवाला शाक है । टमाटरके बिना भारतीय रसोई अधूरी है ! यह प्रायः एक शाक माना जाता है; परन्तु वास्तवमें यह एक फल है । ये लाल व हल्के लाल वर्णके (रंगके) होते हैं । इनमें कई बीज होते हैं, पूर्ण रूपसे पक जानेपर जिनका स्वाद थोडा खट्टा एवं मीठा होता है । चाहे आप इसे फल कहें या शाक; किन्तु सब जानते हैं कि टमाटर पोषणका एक भण्डार है । आप इसे अपने दैनिक आहारमें सम्मिलित करके इसके अत्यधिक स्वास्थ्य लाभोंका आनन्द उठा सकते हैं ।
घटक – टमाटरमें प्रचुर मात्रामें ‘कैल्शियम’, ‘फास्फोरस’ व ‘विटामिन-सी’ पाए जाते हैं । यद्यपि टमाटरका स्वाद अम्लीय (खट्टा) होता है; तथापि यह शरीरमें क्षारीय प्रतिक्रियाओंको जन्म देता है । इसके खट्टे स्वादका कारण यह है कि इसमें ‘साइट्रिक अम्ल’ और ‘मैलिक अम्ल’ पाए जाते हैं, जिसके कारण यह प्रत्यम्लके (एंटासिड) रूपमें कार्य करता है । टमाटरमें ‘विटामिन-ए’ अत्यधिक मात्रामें पाया जाता है । इसे लाल वर्ण (रंग) देनेवाला तत्त्व ‘लाइकोपीन’ है, जो स्वास्थ्यके लिए लाभप्रद है, कच्चे टमाटरसे पका टमाटर अधिक प्रभावी होता है ।
सेवन विधि –
१. वर्तमान कालमें टमाटर प्रत्येक घरमें शाक बनानेके लिए उपयोग किया जाता है । यह शाकको अधिक स्वादिष्ट बनाता है ।
२. टमाटरका रस निकालकर भी पिया जा सकता है, जो त्वचाके लिए लाभप्रद है ।
३. टमाटरका सूप भी बनाकर पिया जा सकता है ।  
४. टमाटरकी चटनी भी बनाई जा सकती है । बोतलबन्द चटनी स्वास्थ्यके लिए हानिकारक हो सकती है; क्योंकि उसमें संरक्षक तत्त्व (प्रिजर्वेटिव्स) होते हैं, जो स्वास्थ्यके लिए अत्यधिक हानिकारक हैं ।
५. टमाटरका प्रयोग सलादके रूपमें भी किया जाता है ।
टमाटरकी प्रकृति – इसकी प्रकृति ठंडी होती है; अतः यह शरीरको ठंडक पहुंचाता है ।
आज हम टमाटरके लाभोंके विषयमें जानेंगें –
* नेत्र दृष्टिमें लाभप्रद – टमाटरमें ‘विटामिन-सी और ए’की अधिक मात्रा आपकी दृष्टिमें सुधार करनेमें सहायक है और रात्रिके अंधेपनको रोक सकती है । टमाटरपर हुए एक शोधसे ज्ञात हुआ है कि इसमें विद्यमान ‘विटामिन-ए’, ‘मैक्युलर डीजेनेरेशन’के (चकत्तेदार अध: पतन) संकटको न्यून करनेमें सहायक है । चकत्तेदार अध: पतन एक गम्भीर और अपरिवर्तनीय नेत्र विकार है । टमाटर मोतियाबिंदके विकासको भी बाधित करता है । इसके अतिरिक्त, इसमें ‘फाइटोकैमिकल एंटीऑक्सिडेंट्स’ जैसे ‘जेक्सैथिन’, ‘ल्यूटिन’ और ‘लाइकोपीन’ विद्यमान होते हैं, जो नेत्रोंकी ज्योतिको किसी भी प्रकारकी क्षति पहुंचनेसे बचाते हैं ।
* त्वचाके लिए – टमाटरका नियमित सेवन त्वचाको कान्तिमान बनाता है । इसमें ‘लाइकोपीन’ नामक एक आक्सीकरण-रोधी तत्त्व उपस्थित होता है, जो त्वचाको सूरजकी हानिकारक विकिरणोंसे बचाता है । यह त्वचाकी पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट) प्रकाशकी क्षतिसे रक्षा करता है, जो मुखपर रेखाएं और झुर्रियोंके मुख्य कारणोंमेंसे एक है । इसके अतिरिक्त मुखपर बडे रोम छिद्रोंको अल्प करनेके लिए टमाटरका प्रयोग किया जा सकता है । यह मुंहासे और त्वचापर चकत्ते या साधारण जलनेके निशानकी चिकित्सामें भी सहायता कर सकता है । त्वचापर टमाटरके गूदेको रगडनेसे यह त्वचाको कान्तिमान बनाता है ।
* अस्थियोंके (हड्डियोंके) लिए – टमाटरमें ‘विटामिन-के’ और ‘कैल्शियम’की उपस्थितिके कारण यह अस्थियोंके लिए एक अच्छा आहार है । दोनों ही तत्त्व अस्थियोंको सशक्त बनाने और उनकी क्षतिपूर्ति करनेके लिए लाभदायक हैं । इसमें निहित ‘लाइकोपीन’ नामक आक्सीकरणरोधी (एंटी-ऑक्सिडेंट) तत्त्व भी अस्थियोंको सशक्त बनानेके लिए जाना जाता है, जो ‘ऑस्टियोपोरोसिस’से लडनेका एक प्रभावी ढंग है । ऑस्टियोपोरोसिस एक रोग है, जो अस्थियोंके टूटने, विकलांगता और विकृतिका कारण बन सकती है ।
* बालोंकी समस्याओंके लिए – टमाटर बालोंको स्वस्थ, घना बनानेमें सहायक है । टमाटरमें ‘विटामिन’ (विशेष रूपसे ‘ए’) और लौहतत्त्व विद्यमान होते हैं, जो क्षतिग्रस्त और निर्जीव बालोंको एक नूतन जीवन प्रदान करके, उनमें एक नवीन कान्ति ले आते हैं, साथ ही, बालोंको सशक्त भी करते हैं । इसके अतिरिक्त, इसमें उपस्थित अम्ल बालोंके ‘पी.एच. स्तर’को सन्तुलित करनेमें सहायता करता है, जो बालोंके रूखे रंजकको दूर करके बालोंके प्राकृतिक रंगको बनाए रखनेमें सहायक है । खुजली और रूसीमें बालोंको धोनेके पश्चात टमाटरका रस लगाएं, इसे चारसे पांच मिनट तक छोड दें, तदोपरान्त ठंडे जलसे धो लें । नियमित रूपसे बालोंपर टमाटरका प्रयोग न करें; क्योंकि टमाटरकी अम्लता बालोंको सूखा व निष्प्राण बना सकती है ।



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