मई १, २०१९
संयुक्त राष्ट्रने चीनको मुसलमानोंके मानवाधिकारोंका सम्मान करनेका परामर्श दिया है । संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरसने कहा कि चीनको उइगर मुसलमानोंके मानवीय अधिकारोंकी रक्षा करनी चाहिए । गुटेरसने चीनी वार्ताकारोंके साथ वार्तामें ये बातें कहीं । बीजिंगमें ‘बेल्ट एन्ड रोड फोरम’में सम्मिलित होनेके पश्चात महासचिवने इन प्रकरणोंको उठाया और चीनको परामर्श दिया । इस सम्बन्धमें वे चीनके राष्ट्रपति शी जिनपिंगसे भी भेंट कर चुके हैं । संयुक्त राष्ट्रके प्रवक्ता स्टेफेन दिजाररिकने इस विषयमें अधिक जानकारी देते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र महासचिवने चीनी वार्ताकारोंसे सभी प्रासंगिक प्रकरणपर चर्चा की । इसमें शिनजियांगकी स्थितिको लेकर की गई चर्चा भी सम्मिलित है । महासचिवने चीनको इस बातसे अवगत करा दिया कि संयुक्त राष्ट्र इस प्रकरणमें अपने मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेचलेटके साथ सशक्ततासे खडा है ।”
मिशेल बेचलेट सदैव यह बात कहते रहे हैं कि चीन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषदके अधिकारियोंको शिनजियांग प्रांतमें उइगर मुसलमानोंपर किए जा रहे अत्याचारोंकी जांचके लिए अनुमति दे । बेचलेट चीनद्वारा उइगर मुसलमानोंको ओझल कराने और उन्हें एकपक्षीय ढंगसे बन्दी बनाए जानेको लेकर निरन्तर आ रहे ब्यौरोंकी जांच करना चाहते हैं; परन्तु चीनने अभीतक संयुक्त राष्ट्रके अधिकारियोंको ऐसा करनेकी अनुमति नहीं दी है । चीन स्पष्ट कह चुका है कि वह संयुक्त राष्ट्र अधिकारियोंका तभी स्वागत कर सकता है, जब वे देशके आन्तरिक प्रकरणमें हस्तक्षेप न करें ।
यद्यपि, संयुक्त राष्ट्रने कहा कि वह चीनकी एकता और क्षेत्रीय अखण्डताके प्रति पूर्ण सम्मान रखता है और ‘निजी एवं सार्वजनिक रूपसे’ महासचिव गुटेरसका परामर्श समान ही है । संयुक्त राष्ट्रने आतंकवादकी निंदा करते हुए कहा कि इसप्रकारके कृत्योंको किसी भी प्रकारसे उचित नहीं कहा जा सकता है; परन्तु संयुक्त राष्ट्रने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथके विरुद्ध युद्धमें मानवाधिकारोंका पूर्ण रूपसे सम्मान होना चाहिए । प्रत्येक समुदायको इस बातका आभास दिलाया जाना चाहिए कि उनकी पहचान पूर्ण रूपसे सुरक्षित है और वे भी राष्ट्रका एक महत्वपूर्ण अंग हैं ।
उल्लेखनीय कि चीनने शिनजियांगमें कई ‘री-एजुकेशन’ केन्द्र और प्रशिक्षण शिविर खोल रखे हैं, जहां १० लाख से भी अधिक उइगर मुसलामानोंको बन्दी रूपमें रखा गया है । चीन इस कारण अन्तर्राष्ट्रीय समुदायकी आलोचना भी झेलता रहा है । चीनने संयुक्त राष्ट्रको इन शिविरोंकी आवश्यकतापर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस्लामी उपदेशकोंकी भडकाऊ शिक्षाने कुछ मुसलमानोंको ‘हत्यारा शैतान’ बना दिया है । चीनने उइगर मुसलमानोंपर कार्यवाहीको उचित बताते हुए कहा कि मानवाधिकारोंका उल्लंघन कहीं नहीं किया गया ।
चीनमें उइगरोंपर कई प्रतिबन्ध हैं । उइगरोंकी निगरानीके लिए पडोसियोंको छोड रखा गया है । देखरेख कर रहे लाखों पुलिस और अधिकारी उइगरोंसे कभी भी पूछताछ कर सकते हैं और उनके घरोंका अन्वेषण कर सकते हैं । निरिक्षण कैमरा प्रत्येक ओर है, चाहे वह सडक हो, दरवाजा, दुकान या मस्जिद । एक रास्तेपर २० कैमरे हैं । बंदियोंके बच्चोंको अनाथालय उससे दूर ले जाते हैं । मस्जिदमें नमाज पढने आए लोगोंका पंजीकरण होता है और फिर वो मस्जिदके भीतर कैमरेकी देखरेखमें नमाज पढते हैं, ताकि पुलिस उनपर दृष्टि रख सके ।
“सभीके सभी द्विपक्षीय बातें करते हैं और स्वयंको मानवताका रक्षक बताते हैं । संयुक्त राष्ट्रका ध्यान उईगर मुसलमानों और रोहिंग्याओंके अतिरिक्त इस्लामिक देशोंमें हिन्दुओंकी स्थितिपर भी दिलाना चाहेंगें । चीन कमसे कम उन्हें रखता है, प्रशिक्षण देता है, वहीं जिहादी तो हिन्दुओंको भेड-बकरियों समान काट रहे हैं तो क्या वे हिन्दू मानव नहीं हैं ?, कि संयुक्त राष्ट्रका ध्यान नहीं जाता ! चीन भी एक ओर पाकिस्तानके माध्यमसे आतंकका समर्थनकर भारतमें अस्थिरता उत्पन्न करना चाहता है तो दूसरी ओर अपने देशमें मुसलमानोंको बन्दी बनाकर रख रहा है । दोनोंका द्विपक्षीय व्यवहार इनकी सत्यता उजागर करता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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