मन्त्री रामदास अठावलेका अनर्गल वक्तव्य, सरकारी नौकरीमें ७५ प्रतिशत आरक्षण हो !!


अक्तूबर १३, २०१८

केन्द्रीय न्याय और सशक्तिकरण राज्य मन्त्री रामदास अठावलेने कहा कि सरकारी नौकरियोंमें आरक्षणको ५० से ७५ प्रतिशत कर देना चाहिए । अठावलेने कहा, “अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसीको दिया गया आरक्षण ५० प्रतिशतपर ही रखना रखना चाहिए । कई अन्य जातियां भी हैं, जो आरक्षणकी मांग कर रही हैं । सामान्य श्रेणीके ५० प्रतिशतमें से २५ प्रतिशत आरक्षण इन जातियोंके लिए होना चाहिए ।”

अठावले ने कहा, “राज्य सरकारको अन्तर्जातीय विवाहको बढावा देनेके लिए सहायता राशि ५० सहस्त्र रुपएसे बढाकर १ लाख रुपए कर देना चाहिए । अन्तर्जातीय विवाहको बढावा देनेके लिए केन्द्र सरकार २.५० लाख रुपए देती है ।”

उन्होंने कहा कि झारखण्डमें अभी २०,५०० लोग मैला ढोनेका कार्य कर रहे हैं । ऐसी योजना बनाई जा रही है, जिसके अन्तर्गत मैला ढोनेका कार्य करने वाले प्रत्येक परिवारको ५० सहस्त्र रुपएकी सहायता दी जाएगी । इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि सरकारी विभागोंमें ‘दिव्यांग’ लोगोंके लिए आरक्षण चार प्रतिशतसे पांच प्रतिशत तक बढानेके प्रयास चल रहे हैं ।

बीजेपी सरकार ‘एसटी-एससी एक्ट’ लाकर पहले ही दलितोंके साथ साथ सवर्णोंका विरोध झेल चुकी है । इसपर स्पष्टीकरण देते हुए अठावलेने कहा कि हमारी सरकार दलित विरोधी नहीं है । ‘एससी और एसटी अधिनियम’को दुरुपयोगके लिए नहीं बनाया गया है, वरन एससी/एसटी समुदायोंके लोगोंकी सहायताके लिए तैयार किया गया है । साथ ही ये अधिनियम सवर्णोंके विरुद्ध भी नहीं है ।’ अठावलेने कहा कि मुम्बई सेंट्रल रेलवे स्टेशनका नाम बाबा साहेब अम्बेडकर स्टेशन करनेके प्रयास किए जा रहे हैं । उन्होंने सरकारद्वारा लोगोंके कल्याणके लिए किए गए कार्योंको भी गिनाया ।

 

“अभी इतने आरक्षणका ही चमत्कार है कि ऐसे अर्थहीन वक्तव्योंको सुनना पड रहा है ! जब ५० से ७५% होगा तब क्या स्थिति होगी ! राजनीतिमें अब बुद्धिका काल चला गया है, जिसके मनमें बुद्धिके स्तर अनुसार जो भी आता है वहीं कहता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : फर्स्ट पोस्ट हिन्दी



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।
© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution