उत्तिष्ठ कौन्तेय !


गत दिवसोंमें झारखण्डके जमशेदपुरमें दो गुटोंमें हुई झडप, पत्‍थरबाजी और हिन्दुओंके घरोंको लूटनेकी घटनाके पश्चात क्षेत्रमें तनाव व्‍याप्‍त है । मुस्लिम भीडद्वारा हिंसाकी आशंकासे सोमवार, ७ जनवरीको यहांके ‘श्रीराम आश्रम’से ४३ परिवार भाग गए हैं ! विवरणके अनुसार, तत्कालमें वहां परिवारोंको सुरक्षा प्रदान करनेके लिए पुलिस है; परन्तु मुसलमानोंने चेतावनी दी है कि एक बार पुलिसके जानेके पश्चात वे उनमेंसे प्रत्येकको मार देंगें ।
मुख्यमन्त्री रघुवर दासके प्रतिनिधि विधायक पवन अग्रवालने वहांं पहुंचकर पीडितोंको सुरक्षा उपलब्ध करानेका आश्वासन दिया है । मुख्यमन्त्रीके प्रतिनिधिने लोगोंको आश्वासन दिया कि बस्तीमें चारों ओर विधायक निधिसे चारदीवारी कराई जाएगी । इसके लिए थाना प्रभारी बर्मामाइंसने भी एसडीओ एवं सीओको दोनों समुदायोंकी समस्याका समाधान करनेके लिए पत्र लिखा है; परन्तु चिंताकी बात यह है कि मुख्यमन्त्रीके आश्वासनके पश्चात भी लगभग ४०० लोग घर छोडकर भाग गए हैं ।
दैनिक जागरणके अनुसार, मुसलमान इस आश्रमको इसलिए लक्ष्य बनाते थे; क्योंकि इसमें कुष्ठ रोगी और दिव्यांग रहते थे । प्रत्यक्षदर्शी रश्मी महतोने बताया, “क्योंकि हम सभी दिव्यांग हैं; इसलिए आए दिन वे (मुसलमान) हमें लक्ष्य बनाते हैं और हमपर अत्याचार करते हैं । कल ८-१० महिलाओंके साथ भी उन्होंने दुर्व्यवहार किया और पुरुषोंको पीटा ! पुलिस होनेके पश्चात भी वे हमें चेतावनी दे रहे हैं । उनका कहना है कि जब पुलिस चली जाएगी, तब वे एक-एकको मार डालेंगें ।”
बताया जाता है कि मुसलमानके कुछ बच्चे पतंग उडा रहे थे । थोडे समय पश्चात एक बच्चेकी पतंग आश्रम वाले बस्तीमें गिर गई । बच्चे अपनी पतंग लाने गए, जिससे आश्रमके कुछ लोगोंने बच्चोंको परामर्श देते हुए पतंग वापस कर दिया । आरम्भिक झगडा कुछ समयमें शांत हो गया; परन्तु कुछ दिवसों पश्चात मुसलमानोंने श्रीराम आश्रमके दिव्यांगोंपर पथराव आरम्भ कर दिया ! आश्रमके निवासियोंने इसकी परिवाद स्थानीय पुलिस स्टेशन बर्मामाइंस थानेमें की ।
“मुख्यमंत्रीके आश्वासनके पश्चात भी लगभग ४०० लोग घर छोडकर भाग गए हैं” , यह तथ्य यह दर्शाता है कि हिन्दुओंको राजनेताओं और प्रशासनपर अब विश्वास नहीं रहा ! 
‘शांतिप्रिय अल्लाहके बन्दे’को अपना उन्माद दिखाने हेतु मात्र एक बहाना चाहिए होता है और उसके पश्चात वे अपने खरे हिंसक रंगमें तुरंत आ जाते हैं !
हिन्दू आज एकजुट नहीं हैं व उन्हें शस्त्रके नामपर लाठी भी चलाना नहीं आता है, दूसरी ओर धर्मान्ध झुण्डमें अस्त्रों-शस्त्रोंके साथ आते हैं, जिस कारण सामान्य हिन्दू भयभीत हो जाता है ! यह कोई प्रथम प्रकरण नहीं है, पूर्वमें ऐसे अनेक प्रकरण सम्पूर्ण भारतमें हो चुके हैं और आये दिन  होते ही रहते हैं तो ऐसेमें यदि प्रत्येक राज्य कश्मीर बन जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए ! अतः अब हिन्दुओंको स्वसंरक्षण सीखना अति आवश्यक हो गया है !’ – तनुजा ठाकुर



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