उत्तिष्ठ कौन्तेय !


केरलके देवालयने (मन्दिरने) अपना परिसर मुसलमानोंको नमाज पढने हेतु खोल दिया; क्योंकि बाढके कारण मस्जिदमें नमाज पढना सम्भव नहीं था ! कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हिन्दू इसकी अत्यधिक प्रशंसा कर रहे हैं । उनसे कोई जाकर पूछे कि क्या यदि देवालयमें जल भर जाए तो मुसलमान भी गणेश चतुर्थी या नवरात्रिके त्यौहार हेतु अपने मस्जिदका परिसर खोल देंगे ? एकांगी भाईचारेका ठेका लेनेवाले मूढ हिन्दू अभी तक यह नहीं समझते कि मूर्तिभंजक और मूर्तिपूजक कभी भी भाई-भाई नहीं हो सकते ! संख्या बढनेपर ये नमाजी क्या करते हैं, यह कश्मीरमें सेवारत सुरक्षाकर्मियोंसे जाकर पूछें ! – तनुजा ठाकुर



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