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उत्तिष्ठ कौन्तेय 


उत्तरप्रदेशको वे स्थान बन रहा आतंकियोंका आश्रय स्थल, जहां तीव्रतासे घट रहे हैं हिन्दू
पुलवामा आतंकी आक्रमणके पश्चात जहां सुरक्षा विभागकी दृष्टि एक बार पुनः उत्तर प्रदेशके पश्चिमी भागपर टिक गई हैं । पश्चिमी उत्तर प्रदेशके वे जनपद, जहां तीव्रतासे हिन्दू जनसंख्या घटी है, इस्लामिक आतंकियोंके आश्रयस्थलके रूपमें सामने आए हैं ! कुछ दिवस पूर्व ही सहारनपुरके देबवंदसे शाहनवाज अहमद तेली और आकिब मलिक नामक ‘जैश-ए-मोहम्मद’से जुडे दो आतंकी पकडे गए हैं । गुप्तचर विभागोंको ज्ञात हुआ है कि अभीतक इन आतंकियोंका उद्देश्य पश्चिमी उत्तरप्रदेशको अपनी शरणस्थलीके रूपमें प्रयोग करना था;  परन्तु इसबार ये, स्थानीय युवाओंको भ्रमितकर देशमें वृहद स्तरपर विस्फोट करानेके साथ इन्हें अपने संगठनोंमें सम्मिलित करना चाहते थे । यही कारण है कि विभाग अब यह जानकारी एकत्र कर रहा हैं कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर और मेरठमें जैशकी सक्रियताके पश्चात कितने लोगोंको ये लोग अपने साथ जोड पाए हैं ? वैसे सूत्रोंके अनुसार पश्चिमी उत्तरप्रदेशके ६ जनपदोंके १२ उपमण्डलोंमें लगभग ५० युवाओंको लक्ष्य करनेकी जानकारी जांच विभागको मिल रही है । ये दोनों यहांके युवाओंसे कहते थे कि इस्लाम संकटमें है और उसे बचानेके लिए आतंकी बनानेका षडयन्त्र कर रहे थे । सूत्रोंका कहना है कि ये दोनों धार्मिक शिक्षा प्राप्त करनेवाले युवाओंको अपना लक्ष्य बनाते रहे हैं । यह भी ज्ञात हुआ है कि ये निजी छात्रावासमें आतंकी प्रशिक्षणसे जुडे विडियो और ध्वनिमुद्रणके साथ पाकिस्तानमें बैठे कई आतंकियोंके धार्मिक सन्देश सुनाकर भी उन्हें अपनी ओर आकर्षित करते थे और साथ ही युवाओंसे कहते थे कि इस्लामके लिए बलिदान देनेवालेके परिवारका हमारे मुखिया (जैशके पदाधिकारी) ध्यान रखते हैं । अभी जांच विभागके सामने सबसे बडी चुनौती यह ज्ञात करना है कि इन्होंने कितने युवाओंको जैशसे जोडा हैं ।
विश्वमें ही नहीं भारतमें भी यह तो अब प्रमाणित हो चुका है कि जहां भी मुसलमान बहुसंख्यक होने लगते हैं या हिन्दुओंकी जनसंख्या घटने लगती है वहां पृथकवादी तत्त्वों एवं आतंकी गतिविधियां बढने लगती हैं | यह समीकरण इस देशके शासक एवं प्रशासक वर्गको अभी तक समझमें क्यों नहीं आया है ? ऐसे स्थानोंमें सुरक्षा और गुप्तचर विभागके कार्योंको और सजगतासे न कर पानेके कारण ही वहां ऐसी स्थिति निर्माण हो जाती है ! इस देशमें ऐसे अनेक छोटे पाकिस्तानका जन्म हो चुका है और इसमें हिन्दुओंकी निष्क्रियता भी उतनी ही उत्तरदायी है ! पाकिस्तानसे लडनेको हम सज्ज हैं; परन्तु राष्ट्रके भीतर जो हमने आतंकका विषवृक्ष फैल रहा है,  इन पाकिस्तान प्रेमियोंसे कैसे लडेंगें ? और तो और राष्ट्रद्रोही राजनीतिक दल भी इनके समर्थनमें होते हैं ! इससे बोध होता है कि स्थिति अब विस्फोटक हो रही है और इसका समाधान शीघ्रातिशीघ्र ढूंढना होगा ! कहीं ऐसा न हो कि बाहरी पाकिस्तानकीसे अधिक हानि हमें भीतरी पाकिस्तानी पहुंचाएं  !”- तनुजा ठाकुर


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