उतिष्ठ कौन्तेय


१. हरियाणा पुलिसने महाराष्ट्र राज्यके आपदा प्रबंधन विभागके अध्यक्ष व ‘कांग्रेस’ राष्ट्र सचिव (महाराष्ट्र) श्रवण रावको उस समय बन्दी बना लिया जब वह मद्य (शराब) लेकर अपने किसी परिचितके साथ गुरुग्रामसे देहलीकी ओर उस वाहनमें जा रहें थे जिसपर आपदामें सेवा कार्य हेतु कागद (कागज) लगा था । पुलिसको इस प्रकरणकी सूचना किसी गुप्तचरके माध्यमसे मिली थी । भाजपाके राजनेता संबित पात्राने यह प्रकरण सामाजिक जालस्थल ‘ट्विटर’ पर साझा किया‌ ।
    जहां भारत वैश्विक आपदासे निपटने हेतु युद्ध स्तरीय प्रयास कर रहा है तो वहीं कुछ राजनेता अपने व्यसन पूर्ति हेतु ऐसे निम्न स्तरीय कार्य कर रहे हैं । अब ऐसा लगता है कि कांग्रेसी राजनेताओंकी मति पूर्णतः भ्रष्ट हो चुकी है ।
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२. मेरठमें ‘लॉकडाउन’के समयमें छद्म पत्रकार पकडे जा रहे हैं और वे वाहनोंपर ‘प्रेस’ लिखवाकर घूम रहे हैं । इसी प्रकरणमें सोमवार, २० अप्रैलको अजीम और आसिफ नामक ऐसे ही दो छद्म पत्रकारोंको पुलिसने बन्दी बनाया, जो बेगमपुल चौराहेपर पुलिसद्वारा जांच किए जानेपर ‘प्रेस’में होनेकी बात कहने लगे । कडाईसे पूछनेपर अजीम और आसिफने स्वयंको आठवीं और पांचवीं ‘पास’ बताया तथा वे जनपदके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), मुख्यमन्त्री और प्रधानमन्त्रीका नाम भी नहीं बता पाए !
      ये जिहादी भिन्न प्रकारका छद्म रूप धारण कर राष्ट्र हित हेतु लगाए गए गृह बन्दीको तोड रहे हैं इनपर कठोर कार्यवाही अपेक्षित है !
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३. जमातियोंकी सूचना देनेको अपराध बताते हुए, उत्तर प्रदेशमें हापुडके सरावा गांवमें कहा-सुनीके पश्चात ढाई सौ मुसलमानोंने शस्त्रोंके साथ हिन्दुओंपर आक्रमण कर, कुछ लोगोंको चाकू मारकर चोटिल कर दिया। अनेक घरोंपर भी पत्थर बरसाते हुए अन्य निवासियोंको भी चोटिल किया गया । इससे पूर्व धर्मान्धोंने परिणाम भोगने धमकी दी थी तथा दीपावलीपर भी साठ धर्मान्धोंने आक्रमण किया था । पुलिसबल अभीतक केवल छह अपराधियोंको बन्दी बना पाई है ।
    हिन्दू बहुल देशमें धर्मान्धोंके दुस्साहस दिन प्रति दिन बढते जा रहे हैं, क्या इस देशके राज्यकर्ताओंको यह सब दिखाई दे रहा है ?
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४. साधुओंकी निर्मम हत्यापर, कांग्रेसकी मौनपर वार करते हुए, रिपब्लिक दूरदर्शनके संस्थापक अर्नब गोस्वामीने उनका मनोभाव पक्षपात पूर्ण बताते हुए,  सोनिया गांधीको, प्रसन्न बताया और कहा कि ऐसी क्रूरतापूर्ण हत्या यदि किसी पादरी अथवा मौलवीकी हुई होती तो क्या प्रसारवाहिनियां और धर्मनिरपेक्ष गुट इसे ‘मॉब-लीचिंग’ बताकर देशभरमें आग लगाने, तोडफोड और हत्याएं नहीं करा चुके होते ?  तब क्या वह मौन रहती । उन्होंने कहा कि वह यह समाचार इटली भेजकर अपना जयकारा कराना चाहती है । इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णनको भी उनके ठुमके स्मरण कराए ।
     देशद्रोही दलोंकी मौन होनेका अर्थ ही साधुओंकी हत्यापर प्रसन्नता है । अब तो हिन्दू राष्ट्र होनेसे ही ऐसे दलोंका अंत हो सकता है ।
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५. केरलसे, देहलीमें तबलीगी जमातके कार्यक्रम सम्मिलित होने गए १३११ जमातियोंमें से २८४ जमातियोंकी कोई सूचना न मिलने एवम् चलभाष भी बन्द होनेपर स्तब्ध केरल प्रशासनको चिन्ता है कि यदि ये लुप्त जमाती शीघ्रतासे पकडमें नहीं आते हैं तो इनकेद्वारा अन्य लोग भी संक्रमित हो सकते हैं और इससे कोरोना संक्रमणकी विस्फोटक स्थिति उत्पन्न हो सकती है ।
    यह राज्य प्रशासनकी निष्क्रियता अथवा विफलता नहीं तो क्या है कि आईबी निदेशक अरविंद कुमारद्वारा २९ मार्चको ही राज्य डीजीपीको इन तबलीगियोंकी आने जाने की पूर्वसूचना दे दी गई थी और राज्य मुख्यमंत्रीने भी सभी जमातियोंकी पहचान कर ‘क्वारंटाइन ‘करनेकी स्वीकृति दी थी !
(२३/०४/२०२०)


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