उतिष्ठ कौन्तेय


१. भोजनालय व्यवसायसे सम्बंधित अब्दुल और अमजदने अपने यहांके आगंतुकोंको मनुष्य विष्टा मिला भोजन परोसा । देशमें मूत्र, थूक आदिद्वारा संक्रमण फैलानेकी जिहादी मानसकिताके बीच ब्रिटेनसे एक विभत्स जिहादी घटना ज्ञात हुई है । कुछ दिवस पूर्व लगभग १५० ग्राहक भिन्न-भिन्न संक्रमणसे ग्रसित होनेसे जब शोध किया गया तो ज्ञात हुआ सभीको विषाक्त भोजनके कारण समस्या है । सभीने एक ही भोजनालयसे भोजन प्राप्त किया था । अतः पुलिसने अचानक उस भोजनालयका परीक्षण किया । तो ज्ञात हुआकी भोजनमें मानव विष्टाका समावेश है ।
    यहां दो प्रकारका भोजन बनता था । एक स्थानपर स्वच्छ भोजन तथा दूसरे स्थानपर विष्टायुक्त भोजन । दोनोंको बंदी बनाकर कारागृह भेज दिया गया है ।दोनोंपर २८ सहस्त्र पाउंड, लगभग भारतीय २७ लाख रुपयोंका दंड निर्धारित किया है । इसे आप क्या कहेंगे ? वीभत्स आतंकवाद ?
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२. महाराष्ट्रके पालघरमें तीन साधुओंकी निर्मम हत्याके कुछ समय पश्चात एक ‘वीडियो’ देखनेमें आया है जिसमें कुछ ईसाई धर्मप्रचारके द्वारा लोगोंके धर्म परिवर्तन हेतु, हिंदुओंके देवताओंको, जैसे गणेश व हनुमानजीको पशु बताकर अपमान किया गया है । यह वीडियो प्रसारित होनेके पश्चात उद्धव ठाकरेने ट्वीट करके इसे सम्प्रादयिक दृष्टिकोण न देनेका निवेदन किया  है । उल्लेखनीय है कि दो सौ लोगोंद्वारा साधुओंकी हत्या करते समय पुलिसबल भी वहीं उपस्थित था और नेतागण आरोप प्रत्यारोप करनेमें व्यस्त हैं ।
    वीर शिवाजीकी धरतीपर एवं साधु सन्त स्वयं ही असुरक्षित हैं और विदेशी प्रचारक धर्मांतरणपर तुले हुए हैं । अब तो भारतको मात्र हिंदूराष्ट्र  बनाकर ही सभी सनातनियोंकी रक्षा की जा सकती है ।
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३. कोराना महामारीको लेकर अब ममता दीदी और केंद्र सरकारमें घमासान मच गया है, ममता दीदी प्रशासनने केन्द्रक्र प्रति पुनः नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए केंद्र सरकारद्वरा गठित ‘आइएमसीटी (इंटर मिनिस्ट्रीयल सेंट्रल टीम)’  विशेष दलको स्थितिका आंकलन करनेवाले दलको प्रभावित क्षेत्रोंका दौरा करने एवं स्वास्थ्यकर्मियोसे बातचीत करनेसे रोक दिया । राज्यपाल जगदीप धनकडने सहायता (राहत) सामग्रीके वितरणमें घोटालेका आरोप लगाते हुए कहा है कि जानकारी मांगनेके पश्चात भी उन्हें किसीभी प्रकारका विवरण अथवा सार्थक उत्तर नहीं दिया गया है ।
     इस तानाशाहीकी आडमें ममता शासनका यह सहायता (राहत) सामग्रीमें हुई धांधलीको छुपानेका असफल प्रयास मात्र है। साथही राज्यमें जिस प्रकार संक्रमित लोगोंकी संख्या बढ रही है , केंद्रके साथ असहयोगद्वारा समस्त जनताको इस महामारीके मुखकी ओर धकेला जा रहा है ।
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४. २० अप्रैल,२०२० ‘रेडियो मिर्ची’ आरजे फहाद यूएई पर ‘पुरानी जींस’ परिचारकने महाराष्ट्रके पालघरमें दो साधुओंकी हत्याको सांप्रदायिक रंग देनेके लिए ट्विटरका सहारा लिया । उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मुस्लिमोंकी हत्यापर निंदा होती तो पारघरमें साधुओंका भी भीडद्वारा हत्या नहीं किया जाता ।
   इससे स्प्ष्ट होता है कि जिहादी जितने भी बडे़ पदपर पहुंच जाए उसके मस्तिष्कसे जिहाद नहीं जाता ।
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५. हिन्दू विरोधी विचारधारा प्रसारित करनेवाले समाचारपत्र ‘द वायर’ ने पालघरमें मारे गये साधुओंकी पहचानपर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है तथा अपने समाचारपत्रके माध्यमसे प्रसारित किया है मारे गए व्यक्ति हिन्दू धर्मके नहीं थे अपितु सोसिला नेटवर्किंग साइट्सने उन्हें हिन्दू घोषित किया है ।
    सदैव विशेष वर्गका तुष्टिकरण करनेवाले इन समाचार माध्यमसे आप सत्यकी कामना कदापि न करें । झूठ प्रसारित करने वाले इन राष्ट्रद्रोही तत्त्वोंको अब शान्त करने हेतु केन्द्र शासनद्वारा पूर्णतः अंकुश लगाना ही एकमात्र विकल्प है ।
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६. प्रायः ‘इंस्टाग्राम’पर धार्मिक रीति-रिवाजों और हिन्दू देवी-देवताओंका उपहास करनेके लिए जानी जानेवाली सोफिया हयातपर हिन्दुओंके धार्मिक चिह्न ‘ऊँ’ के आगे अश्लीलतासे चित्र खिंचानेका आरोप लगा है । उल्लेखनीय है कि सोफियाने अपने ‘इंस्टाग्राम’ पर, जिसमें वे शरीरपर मात्र एक दुपट्टा लिए हुए हैं और ‘ऊँ’ के सामने ‘पोज’ दे रही हैं । उन्होंने इसके यह चित्र साझा करते हुए साथमें लिखा है, “ओम ब्रह्माण्डसे आनेवाली प्रथम कामुक ध्वनि है । यह परम आनन्द और प्रेमकी अभिव्यक्ति है ! मैंने अपनी पवित्र कामेच्छा वापस ‘ ‘ऊँ’ को सौंप दी है; क्योंकि इसे ‘ऊँ’ ने ही दिया है ।” इसके अतिरिक्त सोफियाने मां कालीका आपत्तिजनक चित्र साझा किया है । एक व्यक्तिने इसपर सोफियाके विरुद्घ परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट कराई है ।
   विकृत मानसिकतावाली सोफिया ‘पैगम्बर’ पर ऐसी प्रेमकी अभिव्यक्ति क्यों नहीं दिखातीं ? ये जिहादी भविष्यमें ऐसा न करे, उसके लिए हम हिन्दुओंको प्रथम तो स्वयंसे धर्मनिरपेक्षताका चोला उतारना होगा और ऐसे कृत्योंका वैध मार्गसे मुखर होकर विरोध करना होगा, साथ ही ऐसे लोगोंका व्यापक स्तरपर विरोध करना होगा तभी यह सुधरेंगे !
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७. ममता बेनर्जी बंगालमें करोना ग्रसितोंकी वास्तविक संख्या छुपा रही हैं । पश्चिम बंगालके राज्यपाल जगदीश धनकडजीने ‘इंडिया टीवी’ को दिए साक्षात्कारमें यह गम्भीर आरोप लगाया है । वे बोले कि उन्होंने लगभग प्रतिदिन मुख्यमंत्रीसे बात की है । पर वे अपने अहंकारके कारण राज्यमें अनेक चुकें कर रही हैं । जब भी किसी रुग्णकी करोनासे मृत्यु होती है तो उसके सेवामें उपस्थित चिकित्सकको यह लिखनेका अधिकार नहीं है कि यह मृत्यु करोनासे हुई है । यह बात भविष्यमें अतिशय घातक सिद्ध हो सकती है । अतः उनके कहनेका अर्थ यह हुआ कि वास्तविक रुग्णोंकी संख्यएवं मृतक संख्या दोनों ही कम दर्शाए जा रहे हैं । उन्होंने आगे कहा कि राज्यके सहस्रों किसान व्यथित हैं । उन्हें प्रधानमंत्री राहत कोष द्वारा दी जानेवाली सहायता राशिभी राज्य उपलब्ध नहीं करवा रहा । तथा राज्यके निर्धनों हेतु प्रधानमंत्री द्वारा दिया जानेवाला बिनामूल्य धान्य जैसे प्रत्येकको ५ किलो चांवल भी उपलब्ध नहीं करवाया जाता है जो धान्य उपलब्ध करवाया जा रहा है , उसमें भी भृष्टाचार व्याप्त है । धान्य कम तथा निम्न स्तरका दिया जा रहा है ।
       आज यदि केन्द्रमें सशक्त शासन होता तो ममता प्रशासन ऐसा करनेका दुस्साहस नहीं करती ।
(२२/०४/२०२०)


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