हम अपने बच्चोंको जिहादी एवं क्रूर मुगलोंकी सात पीढीका इतिहास सिखाते हैं, जिसका व्यवहारिक जीवनमें कोई उपयोग नहीं होता | यदि दादा और परदादा, नाना व परनानाका नाम सिखाते तो कमसे कम श्राद्धके समय पंडितको उनका नाम तो वे बता पाते ! छि: कितनी दिशाहीन है हमारी शिक्षापद्धति !
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