हिन्दू धर्ममें मनुष्यकी चार अवस्थाओंके अनुरूप चार आश्रमोंका प्रतिपादन किया गया है, संसारमें रहकर अपना जीवन व्यतीत करनेवालेको भी आश्रमवासीकी संज्ञा देते हुए उन्हें गृहस्थाश्रमी कहा गया है; किन्तु धर्मशिक्षणके अभावमें एवं पाश्चात्योंका अन्धानुकरण करनेके कारण आज अधिकांश हिन्दुओंने अपने घरको मात्र निवास स्थान एवं सुख उपभोग करनेका स्थल बना दिया है, जिस कारण आजके अधिकांश गृहस्थ दुःखी एवं क्लेशमें हैं तो अबसे हम आपको समय-समयपर अपने घरको आश्रम समान सात्त्विक कैसे बना सकते हैं एवं ऐसा करनेसे क्या लाभ हो सकते हैं ?, यह बताएंगे !
घरको स्वच्छ और व्यवस्थित रखें !
स्वच्छतासे देवताकी सकारात्मक ऊर्जाको आकृष्ट करनेमें एवं पवित्रता निर्माण करनेमें सहायता मिलती है; अतः प्रतिदिन अपने घरकी प्रातःकाल अवश्य स्वच्छता करें ! (क्रमश:)
Leave a Reply