मोदी शासन ‘फेसबुक’को नियन्त्रणमें ले रही, ‘हैशटैग’ हटवा रही, विदेशी ‘मीडिया’के भ्रामक समाचारको मिला उत्तर 


३० अप्रैल, २०२१
      भारत शासनने वॉल स्ट्रीट जर्नलके उस ‘दावे’को ‘शरारती प्रयास’ बताया है, जिसमें उसने कहा था कि भारत शासन ‘सोशल मीडिया’को नियन्त्रित करनेका प्रयास कर रहा है । ‘ट्विटर’पर ‘पोस्ट’ किए गए अपने सन्देशमें, ‘इलेक्ट्रॉनिक्स’ और सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्रालयने कहा कि वॉल स्ट्रीट जर्नलका ब्यौरा भ्रामक था और इसका विचार कपटपूर्ण था ।
    ‘WSJ’के ब्यौरेका सन्दर्भ देते हुए, सूचना और प्रोद्योगिकी मन्त्रालयने कहा, “वॉल स्ट्रीट जर्नलकी एक ‘स्टोरी’, जिसमें सार्वजनिक असन्तोषपर अंकुश लगानेके लिए भारत शासनद्वारा ‘फेसबुक’को कुछ विशेष ‘हैशटैग’ हटानेके लिए कहनेका प्रयास किया गया  है, वह तथ्योंमें भ्रामक है और कपटपूर्ण है । शासनने इस ‘हैशटैग’को हटानेके लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया है। ‘फेसबुक’ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसे भूलसे हटा दिया गया था ।”
      वॉल स्ट्रीट जर्नलने २८ अप्रैलकी अपने ब्यौरेमें कहा था कि भारत शासनने ‘हैशटैग’ प्रतिबन्धित करवा दिया था । वॉल स्ट्रीट जर्नलने लिखा कि ‘फेसबुक’ने अस्थायी रूपसे एक ‘हैशटैग’को ‘ब्लॉक’ कर दिया था, जिसमें लोगोंने प्रधानमन्त्री मोदीसे त्याग-पत्र देनेकी मांगकी थी ।  ‘WSJ’ने लिखा, ‘#ResignModi’ ‘हैशटैग’को ‘फेसबुक’पर कई घण्टोंके लिए ‘ब्लॉक’ कर दिया गया था, जो कि गहराते ‘कोरोना’ सङ्कटके मध्य भारतकी प्रतिक्रियापर सार्वजनिक असन्तोषको रोकनेका शासनका प्रयास था ।”
      भारत शासनने संसदमें उत्तर देते हुए कहा कि ‘ट्विटर’पर प्रतिबन्ध लगानेका कोई प्रस्ताव नहीं था; परन्तु ‘सोशल मीडिया’के मंचको शासनद्वारा निर्धारित नियमोंका पालन करना होगा । “यदि कुछ लोग ‘सोशल मीडिया’ ‘प्लेटफॉर्म’ आतंकवाद, हिंसा, आतंकवादके कारण, ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ और अवैध गतिविधियोंकी एक पूरी शृङ्खलाका दुरुपयोग करते हैं, तो ‘सोशल मीडिया’ ‘प्लेटफॉर्म’को उत्तरदायी माना जाएगा ।” – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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