‘बसपा’ सांसदपर दुष्कर्मका आरोप लगानेवाली युवतीकी मृत्यु, सर्वोच्च न्यायालयके बाहर मित्रके साथ किया आत्मदाहका प्रयास
२४ अगस्त, २०२१
उत्तर प्रदेशके मऊके घोसीसे ‘बसपा’ सांसद अतुल रायपर दुष्कर्मका आरोप लगानेवाली युवतीकी देहलीमें मंगलवार २४ अगस्तको मृत्यु हो गई । १६ अगस्तको २४ वर्षीया पीडिता और उसके २७ वर्षीय मित्रने सर्वोच्च न्यायालयके बाहर स्वयंको आग लगा ली थी । गम्भीर स्थितीमें दोनोंको चिकित्सालयमें ‘भर्ती’ कराया गया था, जहां शनिवार, २२ अगस्तको युवतीके मित्रकी मृत्यु हुई थी ।
पीडितने लोकसभा चुनाव २०१९ के मध्य वाराणसीके लंका ‘थाने’में ‘बसपा’ सांसद अतुल रायके विरुद्ध दुष्कर्मका आरोप लगाते हुए प्राथमिकी प्रविष्ट कराई थी । इसपर सांसद अतुल रायने पीडितापर भयादोहन (ब्लैकमेल) करनेका आरोप लगाकर युवतीके मित्र, जो प्रकरणका साक्षी (गवाह) भी था, उसीपर प्रकरण प्रविष्ट कराया था । दोनोंको बन्दी बनानेके लिए २ अगस्त, २०२१ को अधिपत्र (वारंट) भी प्रकाशित किया गया था ।
इससे व्यथित होकर पीडिताने अपने मित्रके साथ ‘फेसबुक लाइव’कर बनारसके तत्कालीन ‘एसएसपी’ अमित पाठक समेत कई अधिकारियोंपर गम्भीर आरोप लगाए । साथ ही आत्महत्या करनेकी बात भी कही, जिसे ‘पुलिस’ने गम्भीरतासे नहीं लिया । पीडिताने घोसीके सांसद अतुल रायपर दुष्कर्मका आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेशके वरिष्ठ ‘आईपीएस’ अधिकारी उनके परिवादपर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं । इसके पश्चात दोनोंने १६ अगस्तको मिट्टीका तेल (केरोसिन) डालकर, सर्वोच्च न्यायालयके द्वारके (गेट) बाहर स्वयंको आग लगा ली ।
न्याय व्यवस्थाका मूल उद्देश्य अपराधियोंको शीघ्र दण्डितकर समाजको आपराधिक प्रवृत्तिसे मुक्त करना होता है; किन्तु निधर्मी लोकतान्त्रिक व्यवस्थामें अपराधियोंको विलम्बित दण्ड देना या प्रकरणकी लीपापोतीकर अपराधियोंको मुक्त किया जाता है, जिससे अपराधियोंका दुःसाहस बढ रहा है । समाजमें अपराधी प्रवृत्तिमें न्यूनता व धर्माधिष्ठित न्याय व्यवस्था लाने हेतु, अभी भारतद्वारा कई कठोर निर्णय लिए जाने शेष है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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