ज्ञानवापी ‘मस्जिद’में भगवान गणेश एवं हनुमानजीके विग्रह रखने व पूजाके अधिकारको लेकर न्यायालयमें याचिका
२० अगस्त, २०२१
उत्तर प्रदेश स्थित काशीमें ५ हिन्दू महिलाओंद्वारा प्राचीन मन्दिर परिसरमें देवी-देवताओंके विग्रह स्थापित करके पूजा करनेके अधिकारकी मांग उठाई गई है । इस विषयमें इन महिलाओंने वाराणसी न्यायालयमें याचिका भी प्रविष्ट की है । काशी स्थित ज्ञानवापी ‘मस्जिद’ और काशी विश्वनाथ मन्दिरको लेकर एक लम्बे समयसे व्यक्तियोंके कई भिन्न प्रकारके विचार सामने आते रहे हैं । मुगल आक्रान्ता औरंगजेबद्वारा काशी विश्वनाथ मन्दिरको क्षतिग्रस्त करके मन्दिर परिसरसे सटाकर ही ‘मस्जिद’ खडी कर दी गई थी । वाराणसी न्यायालयमें ५ हिन्दू महिलाओंद्वारा एक याचिका प्रविष्ट कराई गई है, जिसमें उन्होंने ज्ञानवापी ‘मस्जिद’ परिसरमें देवी-देवताओंका विग्रह रखकर पूजा करनेकी मांग की है । उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया है कि वहां पूर्वमें मन्दिर ही था, जिसे क्रूर औरंगजेबके शासनकालके मध्य ‘मस्जिद’में परिवर्तित कर दिया गया था । इस प्रकरणको लेकर राखीसिंहके नेतृत्वमें हरिशंकर जैन एवं विष्णु शंकर जैन नामक अधिवक्ताओंने यह याचिका प्रविष्ट की । इसमें कहा गया कि औरंगजेबने प्राचीन काशी विश्वनाथ मन्दिरको तोड दिया था एवं यहां भक्तोंको दृश्य और अदृश्य सभी देवताओंकी पूजाका अधिकार है ।
जिहादी शासकोंके शासनकालमे हिन्दुओंके पवित्र स्थलों एवं देवताओंके विग्रहको नष्टकर सदैव उसपर अपनी ‘मस्जिद’ बनाकर हिन्दू समाजको प्रताडित करनेका कार्य किया था । वर्तमानमें हिन्दू सङ्गठनोंमें एवं समाजमें अपने धर्मके प्रति जागरूकता आई है ।
रामजन्मभूमिका निर्णय आना एक सुखद अवसर है । यही कारण है कि आज धर्मप्रेमी उन सभी देवालयोंको जिन्हें इन जिहादी शासकों एवं लुटेरोंने क्षतिग्रस्त कर दिया या उसपर बलपूर्वक अपनी ‘मस्जिद’ बना दी, उन्हें मुक्त कराकर उसका जीर्णोद्धारके लिए वैध मार्गसे मांगकर रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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