साधना हेतु पुरुषार्थ ही योग्य पुरुषार्थ होता है !


कुछ लोगोंको लगता है कि उन्होंने जो धन कमाए हैं वह उनके पुरुषार्थके कारण है ! धनका योग प्रारब्धके अनुसार सहज प्राप्त होता है ! यदि वह क्रियामाणसे प्राप्त होता तो एक ही माता-पिताद्वारा संस्कारित या सुशिक्षित सन्तानें जो एक समान क्रियामाणसे प्रयास करते हैं, वे एक समान धनी होते; किन्तु ऐसा होता नहीं है, अन्यथा मुकेश और अनिल अम्बानी दोनोंके पास एक समान धन होता ! अतः अपने धनवान होनेका श्रेय अपने पुरुषार्थको न दें ! हमारे हिन्दू धर्ममें ईश्वरप्राप्ति हेतु प्रयत्नको ही खरा पुरुषार्थ कहा गया है ! अतः पुरुषो, पुरुष कहलाने हेतु पुरुषार्थ करें अर्थात योग्य साधना करें !



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