मार्च १७, २०१९
उत्तर प्रदेशके सोनभद्रमें तैनात वन रक्षक मोहन राम वर्माका अंतिम संस्कार शनिवार, १६ मार्चको देर रात्रि बलियाके महावीर घाटपर राजकीय सम्मानके साथ किया गया । इस मध्य वन विभागके वरिष्ठ अधिकारी और सैकडों वनकर्मी उपस्थित रहे । शुक्रवारको खनन माफियाके आक्रमणमें वर्माकी मृत्यु हो गई थी ।
डीएफओ श्रद्धा यादवने बताया कि मोहन राम वर्मा सोनभद्र वन प्रभागके माची रेंजमें तैनात थे । वहां
अवैध खननके विरुद्घ कार्यवाहीके समय शुक्रवारको उनका दल वन माफियाको पकडकर ले जा रहा था । रास्तेमें खनन माफियाद्वारा वनकर्मियोंपर आक्रमण कर दिया गया, जिससे मोहन रामकी मृत्यु हो गई । इसकी सूचना बलिया स्थित उनके पैतृक गांव आमडारी सागरपालीमें मिली तो घरवालोंमें कोहराम मच गया ।
मोहन राम वर्मा १९८९ में वन विभागमें आए और दैनिक कर्मचारीके रूपमें विभिन्न जनपदोंमें सेवा दी । इसके पश्चात २००६ में विनियमितकरण प्रक्रियाके समय सोनभद्रमें वन रक्षक हुए और तबसे वहीं तैनात रहे । मोहन परिवारमें एकमात्र कमानेवाले सदस्य थे । उनका एकमात्र पुत्र चंदन १६ वर्षका है । उनके आकस्मिक निधनसे परिवारके लोगोंपर दुखका पहाड टूट गया है ।
“हमारी तथाकथित भ्रष्ट व्यवस्थाको उजागर करता व मुंह चिढाता यह समाचार है । शासन किसीका भी हो कर्त्त्वय निष्ठ अधिकारियोंको या तो स्थानांतरित कर दिया जाता है या मार दिया जाता है । इससे स्पष्ट होता है कि खनन माफिया वैधानिक व्यव्स्थाको उंगलियोंपर नचाते हैं और अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इनका इतना दुस्साहस कहीं न कहीं राजनीतिक समर्थनके कारण है ! क्या राजकीय सम्मान एक कर्त्त्वयनिष्ठ अधिकारीको वापस ला पाएगा ? क्या परिणाम होगा इसका ? केवल इतना ही अन्य अधिकारी मौन होकर बैठ जाएंगें और माफिया अपना कार्य दोगुणा दुस्साहससे कर पाएंगें ! इस भ्रष्ट व्यव्स्थाके लिए अब केवल हिन्दू राष्ट्रकी ही आवश्यकता है, जहां ठगोंको केवल और केवल मृत्युदण्ड ही दिया जाएगा !
स्रोत : नभाटा
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