गौसंरक्षण

भारतीय वंशके गिर गायोंके माध्यमसे अपनी अर्थव्यवस्था सुदृढ करनेवाला ब्राजील !


भारतमें १८ करोड ४४ लाख गायें हैं । विश्वकी सर्वाधिक गायें भारतमें हैं । भारतकी देशी गायोंका महत्त्व समझनेके लिए ‘मदर इंडिया फादर ब्राजील’ नामक पुस्तक पढें । ब्राजीलमें हमें कहीं भी जर्सी गाय अथवा संकरित गाय नहीं मिलेंगी । वहां मात्र भारतीय देशी गायें ही मिलेंगी । वहां उसे ‘झेबु गाय’ कहते हैं । […]

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क्या आपको पता है गोमांस निर्यातमें भारत प्रथम स्थानपर है !


आजतक गोमांस निर्यातमें ऑस्ट्रेलिया प्रथम स्थानपर था परंतु अब भारतका स्थान प्रथम है । -तनुजा ठाकुर

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गायका दूध


गायका दूध सात्विक आहार अंतर्गत आता है। परंतु यदि वह दूध विदेशी गायका हो तो वह सात्त्विक नहीं होता और उसपर भी यदि दूधको मशीनद्वारा निकाला जाता हो तो उसका तमोगुण और भी बढ जाता है। इस छायाचित्रमें दूध निकालनेवाले मशीन है। मूलतः सात्विक होनेके कारण फल, दूध और उससे बने पदार्थ मेरा प्रिय आहार […]

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विदेशियोंके लिए गाय मात्र दूध देने वाली जानवर हैं ।


कुछ दिवस पूर्व इटलीके कुछ गौशालाओंमें जानेकी सन्धि मिली, वहां जानेपर ज्ञात हुआ कि बछडेके जन्मके पश्चात उसे अपनी मांसे कभी नहीं मिलने दिया जाता है, उन्हें सूखे दुग्धचूर्णमें (मिल्क पाउडर ) पानी मिलाकर पीने दिया जाता है । विदेशियोंके लिए गाय, दूध देनेवाला एक पशु मात्र है और हम हिन्दुओंके लिए गाय देवतुल्य माता […]

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वेदमें गौ महात्म्य बताते हुए उसे अहिंस्य बताया गया है –


        माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानाममृतस्य नाभिः।प्रनु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामादितिं  विधिष्ट ।। वेदोंमें गाय रुद्रोंकी माता, वसुओंकी पुत्री, अदितिपुत्रोंकी बहन और घृत रूप अमृतका भंडार है। अतः प्रत्येक विचारशील पुरुषको मैंने यही समझाकर कहा है कि निरपराध एवं अवध्य गौका वध न करें।

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गौसंरक्षण एवं गोसंवर्धन


गोमाताद्वारा अर्थव्यवस्थाको सुदृढ करना सम्भव भारतीय संस्कृति ही नहीं वरन् हमारी अर्थव्यवस्था भी प्राचीन कालसे गौ आधारित रही है । गौमाता अपने जीवनमें तथा जीवनके पश्चात् भी हमारी अर्थव्यवस्था हेतु अत्यंत उपयोगी रही है । यदि विचार करें तो गायके गोबरके सदुपयोगसे ही हम अपने देशका ऋण उतार सकते हैं और वह भी सरलतासे । उर्वरकके […]

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भारतीय गायोंकी मेरुशृंखला


अनु सूर्यमुदयतां  ह्रुद्द्योतो हरिमा च ते। गो रोहितस्य वर्णेन  तेन त्वा परि  दध्मसि  ।। हमारे प्राचीन ग्रन्थोंमें ऐसा उल्लेख है कि भारतीय गायोंकी मेरुशृंखलामें एक ऐसी स्नायु होती है जिसे सूर्य केतू कहते हैं, जो सूर्य प्रकाशमें स्वर्णका निर्माण करती हैं यह तत्त्व विषैले पदार्थोंका प्रतिकारक होता है और ऐसे प्रतिकारक क्षमतायुक्त दुग्ध शरीरको पुष्ट […]

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देसी गायका महत्व


आधुनिक विज्ञानका यह मानना है कि सृष्टिके आदिकालमें, भूमध्य रेखाके दोनों ओर प्रथम एक गर्म भूखण्ड उत्पन्न हुआ था, इसे भारतीय परम्परामें जम्बूद्वीपका नाम दिया जाता है । सभी स्तनधारी, भूमिपर पैरोंसे चलनेवाले प्राणी, दोपाए, चौपाए जिन्हें वैज्ञानिक भाषामें अ‍नग्युलेट मेमलके (ungulate mammal) नामसे जाना जाता है, वे इसी जम्बूद्वीपपर उत्पन्न हुये थे । इसप्रकार […]

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हमारी संस्कृति, गौ आधारित थी, ऐसा क्यों कहा जाता था ?


भारतवर्षमें प्राचीन कालसे ही गोधनको मुख्य धनके रूपमें मान्यता प्राप्त है और सभी प्रकारसे गौ रक्षा, गौ सेवा एवं गौ पालन भी यहांके लोग करते आये हैं । शास्त्रों, वेदों, आर्ष ग्रथोंमें गौरक्षा, गौ महिमा, गौपालन आदिके प्रसंग भी अधिकाधिक मिलते हैं। रामायण,
महाभारत, भगवतगीतामें भी गायका किसी न किसी रूपमें उल्लेख मिलता है। गायका जहां धार्मिक आध्यात्मिक महत्त्व है, वहीं कभी प्राचीन कालमें भारतवर्ष में गोधन एक परिवार, समाजके महत्त्वपूर्ण धनोंमें से एक है और राजाको गोधनका रक्षक माना जाता था |

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गौ महिमा


शास्त्रोंमें उल्लेख है कि गौ  सेवासे मनुष्यको धन, संतान और दीर्घायु प्राप्त होती हैं । गाय जब संतुष्ट होती है  तो वह समस्त पाप-तापों को दूर करती   है । दान में  दिये जानेपर वह अक्षय स्वर्ग लोकको प्राप्त कराती है; अत: गोधन ही वास्तव में सच्चा धन है ।  गौ सेवासे ही  भगवान श्री  कृष्णको भगवता,  महर्षि  गौतम,  कपिल,  […]

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