पितृ दोष

हिन्दुओंके घरमें पितृदोष होनेका मुख्य कारण !


मुझे हिन्दुओंके घरमें पितृदोष होनेका मुख्य कारण समझमें आ गया है और वह है अपने जन्मदाता एवं पूर्वजोंके प्रति कृतज्ञताके भावका अभाव ! आजका हिन्दू मात्र लेना जानता है, उसे अपने अधिकार ज्ञात हैं, कर्तव्य नहीं ! जिन पूर्वजोंके कारण उसे स्थूलदेह, कुलका नाम, धन-सम्पत्ति सब प्राप्त हुई है, जब उनके प्रति ही वे कष्ट […]

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पितृपक्षके समय होनेवाले ऑनलाइन सामूहिक जपयज्ञमें सहभागी हो !


यदि आप पितृपक्षके समय होनेवाले ऑनलाइन सामूहिक जपयज्ञमें सहभागी होने हेतु इच्छुक हैं तो कृपया 9999670915 या 9717492523 के व्हाट्सएप्प पर “मुझे जपयज्ञमें सहभागी होना है” यह संदेश भेजें । इस जपयज्ञमें प्रातः , दोपहर और रात्रि इस तीन समयपर होगा आप अपनी सुविधा अनुसार इसमें सहभागी हो सकते हैं । इसमें दत्तात्रेय देवताका जप […]

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तीव्र पितृ दोषके कारण होनेवाले कष्ट वंशानुगत हो जाते हैं !


तीव्र पितृ दोषके कारण होनेवाले कष्ट वंशानुगत हो जाते हैं । कुछ दिवस पूर्व देहलीमें इसका मुझे पुनः एक उदहारण मिला । मैं एक घरमें गई थी । उनके घरमें उनका पुत्र स्नातक पूर्णकर अपने घरके एक कक्षमें पिछले छ: …..

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पितरोंके छायाचित्र घरमें क्यों नहीं रखना चाहिए ? (भाग – ९)


आपको अबतकके लेखोंमें पितरोंके छायाचित्र क्यों नहीं लगाने चाहिए ?, इसका शास्त्र बताया है । यह मैं इतनी दृढतासे कैसे बता पाती हूं; क्योंकि वर्ष १९९९ से ही मैंने धर्मप्रसारके मध्य इसकी अनेक अनुभूतियां ईश्वर प्रदत्त जाग्रत सूक्ष्म इन्द्रियोंसे ली हैं या यह कहना अधिक उचित होगा कि आगे मुझे समाजको धर्मके इस पक्षमें जाग्रति […]

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पितरोंके छायाचित्र घरमें क्यों नहीं रखना चाहिए ? (भाग-८)

आपके लेखोंको पढनेके पश्चात एवं यूट्यूबपर आपके सत्संग सुननेके पश्चात मैं थोडा सम्भ्रममें हूं ! यदि हमारे गुरु वैकुण्ठवासी हो गए हों तो भी क्या उनका छायाचित्र हम अपने पूजाघरमें नहीं रख सकते हैं ? मेरे गुरुके विषयमें एक बात और बता दूं कि हमारे आश्रममें उनका किसी गुरुबन्धुसे विवाद चल रहा था और इसी क्रममें उनकी कुछ वर्षों पूर्व हत्या हो गई, ऐसेमें हमें क्या अपने गुरुका छायाचित्र रखना चाहिए या नहीं ? हमने उसे अपने पूजाघरमें रखा है और मुझे लगता है कि उन्हें गति नहीं मिली है और कृपया बताएं कि अब उनके छायाचित्रका मैं क्या करूं ? - नरेश मित्तल, फ्रैंकफर्ट, जर्मनी


सर्वप्रथम यह जान लें कि हमें पूर्वजोंके छायाचित्र पूजाघरमें तो कदापि नहीं रखना चाहिए और रही बात गुरुकी तो अध्यात्मशास्त्र कहता है कि गुरु चाहे देहमें हों या न हों उनके छायाचित्र हम अपने पूजाघरमें या अपनी दृष्टिसे समक्ष कहीं भी रख सकते हैं । जहांसे उन्हें देखनेपर हमारी भाव जाग्रति होती हो या साधना […]

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अतृप्त पितर नूतन घरमें पहलेसे ही सूक्ष्मसे बना लेते हैं अपना स्थान !


मैंने अपने आध्यात्मिक शोधमें पाया है कि यदि किसीके घरमें पितृदोषका प्रमाण अधिक होता है और यदि वे गृह निर्माण कर रहे हों, तो उनके अतृप्त पितर उस नूतन घरमें पहलेसे ही सूक्ष्मसे अपना स्थान बना लेते हैं  …..

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अतृप्त पितर वंशजोंको हानि करते हैं !


मैंने अपने आध्यात्मिक शोधमें पाया है कि जिनके घर अत्यधिक पितृदोष होता है, उनके अतृप्त पितर, कई बार गर्भस्थ पुरुष-भ्रूणकी योनि, जन्मके दो या तीन माह पूर्वमें परिवर्तित कर देते हैं एवं ऐसे पुत्रियोंको जन्मसे ही अत्यधिक अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट होता है; क्योंकि उनपर गर्भकालमें ही आघात हो चुका होता है………

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अतृप्त पितर जन्म, मृत्यु और विवाह तीनोंमें ही अडचनें निर्माण करते हैं


अतृप्त पितर जन्म, मृत्यु और विवाह तीनोंमें ही अडचनें निर्माण करते हैं एवं समाजके १०० प्रतिशत लोगोंको पितृदोष होनेके कारण आजकल विवाहमें भी अनेक प्रकारकी अडचनें या दुर्घटनायें होती हैं । विवाह एक महत्त्वपूर्ण सोलह संस्कार है; अतः इसे करते समय इसके आध्यात्मिक महत्त्वको अवश्य ध्यानमें रखकर सूक्ष्म जगतकी अनिष्ट शक्तियां किसी भी प्रकारकी अडचनें […]

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जन्मब्राह्मणोंको पितृदोषके कारण


पितृयज्ञं तु निर्वर्त्य विप्रश्चन्द्रक्षयेsग्निमान् । पिण्डान्वाहार्यकं श्राद्धं कुर्यान्मासानुमासिकं ।। – मनुस्मृति (२:१२२) अमावस्याकी तिथिको पितृ श्राद्धकर प्रति माह पिण्डान्वाहार्यकं श्राद्ध करना एक गृहस्थ ब्राह्मणका कर्तव्य है । आज अनेक जन्मब्राह्मण शास्त्रोक्त धर्माचरण नहीं करते; परिणामस्वरूप उनके घरमें तीव्र स्तरका पितृदोष पाया गया है । मनुस्मृतिके इस श्लोकके आधारपर सभी पुरुष, जो जन्मब्राह्मण हैं, वे चिंतन […]

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मृत जीवात्माओंको गति देना खेल नहीं !


एक सिक्थ-वर्तिका (मोमबत्ती) जलानेसे और दो मिनट मौन रखनेसे यदि मृत आत्माको शान्ति (गति) मिल जाती तो भगीरथ मुनिको पूर्वजोंकी गति हेतु साठ सहस्र वर्ष तपस्या कर गंगाको पृथ्वीपर क्यों लाना पडता ? वे भी दो मिनट मौन रखते एक सिक्थ-वर्तिका जलाते और उनके सारे पूर्वज शान्त हो जाते !…..

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