अखरोट (अक्षोट) एक प्रकारका सूखा मेवा है, जो अधिकतर शीत ऋतुमें खानेके लिये उपयोगमें लाया जाता है । अखरोटका बाह्य आवरण कठोर होता है और उसके अन्दर मानवके मस्तिष्क जैसे आकारवाली गिरी होती है । पहले यह फल हरे रङ्गका होता है; किन्तु पूर्ण रूपसे पकनेके पश्चात भूरे रङ्गका दिखाई देता है, तदुपरान्त छिलका हटानेसे […]
मोगरा एक ऐसा पुष्प है, जो अपनी सुगन्धसे सबको अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है । यह एक सात्त्विक पुष्प है, जिसका प्रयोग पूजा आदिमें अधिकतर किया जाता है । सूर्यकी धूप प्रखर होते ही सूखेसे मोगरेके पौधेमें नई कोंपलें आने लगती हैं और ……
७. कर्करोगमें (कैंसरमें) : शकरकन्दमें ‘बीटा-कैरोटीन’, आक्सीकरणरोधी (एंटीऑक्सीडेंट) और कर्करोगरोधी (एंटी कार्सिनोजेनिक) पदार्थ होते हैं, जिससे कर्करोगसे सुरक्षा सम्भव है । ८. गठियामें : इसमें विद्यमान ‘बीटा-कैरोटीन’, ‘मैग्नीशियम’, ‘जिंक’ और ‘विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स’ गठियाके उपचारके लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होते हैं । गठिया सम्बन्धित वेदनाको न्यून करनेके लिए जिस जलमें मीठे आलूको उबाला गया हो, उस पानीको […]
कोरोना महामारीने यह तो सिद्ध कर दिया कि भारतीयोंकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है ! यह स्थिति तब है जब आज अधिकांश भारतीयोंकी जीवन शैलीमें आयुर्वेद अनुसार आचरण नहीं है ! सोचें ! यदि आज घर-घरमें आज जैसे पूर्वकालमें हिन्दू आयुर्वेदिक जीवन शैली व्यतीत करते थे वैसे करते तो क्या भारतमें इस महामारीसे इतनी हानि […]
२. उदरके (पेटके) व्रणमें (अल्सरमें) : शकरकन्द उदर और आंतोंके लिए अत्यधिक लाभप्रद होता है । इसके भीतर अत्यधिक पोषक तत्त्व होते हैं, जिनके कारण आपके उदरमें यदि व्रण (अल्सर) है तो वह भी ठीक हो जाएगा । इससे मलबन्ध (कब्ज) और वायु विकारकी समस्याका भी अन्त होता है । ३. जल तत्त्वको बनाए रखनेमें […]
जिस प्रकार आलू भारतमें एक लोकप्रिय शाक है, ऐसे ही आप सबने एक नाम और सुना होगा, जो सबको खानेमें अत्यधिक रुचिकर लगता है और उसका नाम है, शकरकन्द (अंग्रेजी नाम : Sweet Potato; संस्कृत नाम : मिष्टालुकम्) । शकरकन्द अपने स्वादके कारण अत्यधिक लोकप्रिय है । फलाहारियोंका यह बहुत ही उपयोगी आहार है । […]
प्रतिदिन अपने मुखावरणको अच्छे प्रकारसे उबाल लिया करें । उबालते समय नीमकी पत्तियां या दो चार बूंद डेटाल, या टिंचर बेंजाईन या बीटाडीन लोशनकी डाल दें । मुखावरण बांधते समय उसमें प्राणसुधा या अमृतधाराकी दो चार बूंद …..
भारतीय व्यंजनकी कल्पना बिना मसालोंके की ही नहीं जा सकती है ! कश्मीरसे कन्याकुमारी और कच्छसे अरुणाचल प्रदेश तक भारतका सिया एक भी राज्य नहीं है जहां मसालोंका उपयोग रसोई घरमें न होता हो …..
हमारे रसोईघरमें मौसमके अनुसार मात्र भोजन ही नहीं पेय पदार्थ भी परिवर्तित हो जाते हैं जैसे अब ग्रीष्म ऋतु आरम्भ होनेवाली है तो हमारे यहां भिन्न प्रकारके पारंपरिक पेय घरमें बनाए जाते हैं ……
स्वास्थ्य सरंक्षणके लिए यह प्रयोग अत्यन्त लाभदायक है । एक गिलास हल्का गुनगुना जल ले लें । इसमें एक नींबूका रस निचोडकर एक अथवा दो चम्मच मधु मिलाकर पी लें । इसमें …..