आयुर्वेद

‘किशमिश’ (भाग-७)


रक्तचापको नियन्त्रित करनेके लिए : ‘अमेरिकन कॉलेज आफ कार्डियोलॉजी कांफ्रेंस’में प्रस्तुत एक अध्ययनमें बताया गया कि दिनमें तीन बार मुट्ठीभर ‘किशमिश’ खानेसे बढे रक्तचापमें कमी होती है । एक शोधके पहले परीक्षणमें ४६ लोगोंको सम्मिलित किया गया, जिनका रक्तचाप सामान्यसे कुछ अधिक था और जिन्हें उच्च रक्तचाप होनेका भय भी था । इन लोगोंका रक्तचाप […]

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‘किशमिश’ (भाग-६)


दांतोंके लिए : ‘किशमिश’से दांतों और मसूडोंको बहुत लाभ होता है । ‘किशमिश’में ऐसे ‘फाइटो-कैमिकल्स’ पाए जाते हैं जो दांतों और मसूढोंको दूषित करनेवाले कीटाणुओंको बढनेसे रोकते हैं । ‘किशमिश’में पाए जानेवाले ‘फाइटो-कैमिकल्स’ जबडे और मसूढेके रोगोंके लिए उत्तरदायी जीवाणुओंको नष्ट कर देते हैं । ‘किशमिश’की प्राकृतिक मिठाससे ‘कैविटी’ (दांतमें छेद) नहीं होते हैं । […]

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‘किशमिश’ (भाग-५)


रक्तकी कमीमें सहायक : ‘किशमिश’में लौहतत्त्व अधिक मात्रामें पाया जाता है, जो रक्तकी कमीको पूरा करता है; किन्तु गर्भवती महिलाओंके लिए इसका सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए; क्योंकि नमी कम और लौहतत्त्व अधिक होनेसे पचा पाना कठिन हो सकता है, जिससे मलावरोधकी आशंका हो सकती है । अर्श ‘बवासीर’के लिए : ‘बवासीर’के रोगियोंके लिए […]

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‘किशमिश’ (भाग-४)


मलबद्धता (कब्ज)के लिए : ‘किशमिश’ खानेसे उदर ठीक व स्वच्छ रहता है । अन्न खानेके पश्चात उपपाचयके लिए लाभकारी है, नियमित खाते रहनेसे पाचन शक्ति सक्रिय रहती है । खीरमें भी ‘किशमिश’ डालकर स्वादके साथ-साथ उदर भी स्वच्छ रहता है । ‘किशमिश’से श्वेत रक्त कणोंको सन्तुलित करनेमें सहायता मिलती है । (कब्ज) मलबद्धता दूर करनेके […]

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‘किशमिश’ (भाग-३)


हृदयरोगमें : जलमें भीगी बीजरहित ‘किशमिश’का हलका मीठा जल रोगीको पिलानेसे उसे सांस लेनेमें लाभ होता है । मल त्यागनेमें और रक्तकी शुद्धिमें शीघ्र सहायता मिलती है । ३० दाने ‘किशमिश’ धोकर मिट्टीके बर्तनमें, एक कप जलमें डाल दें । इसमें थोडा केसर डाल दें । रातको इन सबको भिगो दें । पतले कपडेसे इस […]

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‘किशमिश’ (भाग-२)


तत्त्व : चार किलो द्राक्ष (अंगूर) सुखानेके पश्चात केवल एक किलो ‘किशमिश’ बनती है । सुखानेके पश्चात इसमें मिठास न्यून होकर ३० से ३५ प्रतिशत रह जाती है । इसमें ‘विटामिन C सी’, लौह-तत्त्व, ‘फाईबर’, ‘कैल्शियम’, ‘मैग्नीशियम’, वसा, ‘विटामिन बी’ और ‘पोटैशियम’ भी होता है । २५ ग्राम ‘किशमिश’में लगभग ७८ कैलोरीज और ०.८३ ग्राम […]

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किशमिश (शुष्क द्राक्ष) (भाग-१)


अंगूरको सुखाकर बनाई जानेवाली ‘किशमिश’, एक भरपूर गुणकारी सूखा मेवा है, जो प्रायः सभी देशोंमें सामान्यतः प्रयोगमें लाई जाती है । मिठास अधिक होनेपर, इसे भिन्न-भिन्न पदार्थोंमें प्रयोग करके उन्हें स्वादिष्ट बनानेमें सहायता मिलती है । प्राकृतिक विटामिन और खनिजोंकी प्रचुर मात्राके कारण यह स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती है । इसमें दूधके सभी तत्त्व होते हैं […]

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पोटलीवाले (पैकेटवाले) गेहूंके आटेके स्थानपर आटा-चक्कीपर स्वयं आटा पिसवाइए !


रोटी तो आप सभी खाते ही होंगे ! तो क्या आप भी ‘पैकेट’वाले गेहूंका आटा क्रय करते हैं ? यदि हां, तो बन्द कर दीजिए ये आटा क्रय करना और खाना । ये बहुत दिनोंका पीसा हुआ आटा होता है । इसमें कीडे या घुन न पड जाएं; इसलिए इसके निर्माताओंद्वारा इसमें ‘बेंजोइल पेरोक्साइड’ नामक […]

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घरका वैद्य – मधु (शहद) (भाग-६)


◆ घाव : घावपर मधुकी पट्टी बांधना लाभकारी है या एक भाग पीला मोम और चार भाग मधु मिलाकर पट्टी बांधें । मोमको उष्ण करके मधुमें मिला लें, मरहम बन जाएगा, जो घाव अन्य औषधियोंसे ठीक नहीं होते हों, वह भी इस प्रयोगसे ठीक हो जाते हैं । ◆ अग्निसे जलना : जले हुए अंगोंपर मधुका […]

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घरका वैद्य – मधु (शहद) (भाग-५)


● पित्ती : नागकेसर एक भाग और मधु पांच भागको मिलाकर रोगीको प्रातः सायं दोनों समय चटाएं । यह एक लाभकारी प्रयोग है । ● फुंसियां : आटा और मधुको मिलाकर लेई बना लें । इसको वस्त्रपर लगाकर, फुंसियोंपर लगाएं, लाभप्रद है । कोई भी चर्मरोग हो तो मधुकी पट्टी बांधनेसे लाभ होता है । […]

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