जो भारतद्वेष्टा शत्रु राष्ट्र पाकिस्तान, पिछले अनेक शतकोंसे भारतमें अशांति एवं आतंक फैलानेका कुकर्म करता रहा है, उसे अभीतक ‘एमएफएन’की (most favaoured nation) सूचीमेंं….
धर्मान्धोंद्वारा इतने वृहद और घातक आतंकी आक्रमणके पश्चात भी जो निकृष्ट नेतागण यह कह रहे हैं कि आतंकवादका कोई धर्म या कोई देश नहीं है, उनसे इस देशकी नागरिकता छीन लेनी चाहिए और उन्हें देश निकाला दे देना चाहिए !
देशकी सुरक्षा हेतु वैश्य वृत्तिवाले राजनेता नहीं, अपितु क्षत्रिय वृत्तिवाले राजनेताओंकी आवश्यकता होती है । सत्तर वर्षोंसे इस देशपर होनेवाले बाह्य एवं आन्तरिक आक्रमण स्पष्ट रूपसे….
आजके समाजकी दुर्दशाका मूल कारण है – सभीको अपने अधिकार ज्ञात हैं, कर्तव्य नहीं ! कर्तव्यनिष्ठ समाज ही सुखी होता है, अपने कर्तव्यपालनकी मूल भावनाको त्यागकर, मात्र अधिकारोंकी मांग करनेवाले स्वार्थी जीवने आज समाजमें अराजकता निर्माण कर दी है ! और मनुष्यको कर्तव्य पालनका बोध, धर्म और साधनाका अनुसरण करनेसे ही होता है अन्यथा आजकी […]
क्या यदि पूर्वकाल समान प्रत्येक राजनेता या उसके पुत्रको सेनामें सम्मिलित होकर देशकी बाह्य एवं आन्तरिक सुरक्षा करना अनिवार्य होता तो क्या स्वतन्त्रताके सात दशक पश्चात इस देशमें आजतक पाकिस्तान प्रायोजित….
हिन्दू बहुल देशमें आए दिन कहीं न कहीं साम्प्रदायिक उत्पात (दंगे) होते ही रहते हैं । यदि हम इन उत्पातोंपर ध्यान देंगे तो यह स्पष्ट रूपसे दिखाई देगा कि यह बहुसंख्यक हिन्दुओंद्वारा अल्पसंख्यकोंंपर आक्रमण नहीं होता, अपितु धर्मान्धोंद्वारा कोई न कोई बहाना बनाकर, किसी भी घटनाको हिंसाका रूप देकर आतंक फैलाना ही इनका मूल उद्देश्य […]
भारतीय राजनीति अपनी अधोगतिकी परिसीमाको प्राप्त हो चुकी है । आजके नेताओंके वक्तव्य हमें बताते हैं कि उनकी मानसिकता कैसी हो चुकी है ? एक दूसरेमें दोष ढूंढना, अपनी चूकोंको स्वीकार नकर उसका दोषारोपण दूसरोंपर करना…..
स्वतन्त्रताके पश्चातसे ही पाकिस्तानके अनेक भारतविरोधी दुष्कृत्योंके प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रमाण मिलनेपर भी उसके विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही नहीं करनेवाले निष्क्रिय राज्यकर्ता, इस देशको क्या कभी बाह्य आक्रमणोंसे…..
आए दिन इस देशमें तमोगुणी, भ्रष्ट, पापी, निधर्मी, धर्मद्रोही एवं राष्ट्रद्रोही वृत्तिके नेताओंको, उनके अनुयायी, राम, कृष्ण, दुर्गा, शिव इत्यादिके रूपसे दिखाकर उन्हें तारणहार बताते हैं; किन्तु आपने कभी अल्लाह या इसामसीहके रूपमें…..
हिन्दू बहुल राष्ट्र होते हुए भी आए दिन कुछ धर्मद्रोही नेतागण अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताके नामपर हमारे गुरु, सन्त, धर्मग्रन्थ एवं अन्य आस्था स्थानोंके विषयमें विडम्बनात्मक बातें करते हुए धर्मद्रोह करते हैं ! ऐसे लोगोंपर इस देशका शासक या प्रशासक वर्ग या न्याय तंत्र कभी भी कठोर कार्यवाही नहीं करते हैं, जिससे धर्मद्रोहियोंकी संख्यामें तो वृद्धि हो ही रही […]