जिन्हें योग्य और अयोग्य, धर्म और अधर्मके मध्य भेद करना नहीं आता है, वे बुद्धिजीवी कहलानेके अधिकारी नहीं होते हैं एवं जो योग्य और अयोग्य, धर्म और अधर्मके मध्य भेद कर सके, हमारी वैदिक संस्कृतिमें ऐसे विवेकशील मनुष्यको ही पंडित या बुद्धिजीवी कहा गया है ! आजके ‘पढे-लिखे मूढ’ जो देशद्रोहको अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता कहते हैं, […]
यदि राज्यकर्ता सात्त्विक होते तो इस पुजारीको मंदिरकी सात्त्विकता बनाए रखने हेतु उसकी स्तुति की जाती है; किन्तु ‘अंधेर नगरी और चौपट राजा’वाली स्थितिमें तो यही होना है ! निधर्मी यह भूल जाते हैं कि विप्र…..
सर्वोच्च न्यायालयद्वारा सबरीमालापर हिन्दू विरोधी निर्णयसे चाहे जितनी भी हानि हुई हो, एक लाभ अवश्य हुआ, अनेक दशकोंसे सोये हुए केरलके हिन्दू अब जागृत और संगठित होने लगे हैं ! कभी-कभी धर्मद्रोही लोग अनजानेमें ही कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिससे स्वतः ही उनका अस्तित्त्व संकटमें पड जाता है ! सबरीमाला प्रकरण केरलकी साम्यवादी शासनके […]
चीन, इस्लाम और ईसाई धर्मके कुप्रभावको समझ चुका है; इसलिए वह ऐसे पंथोंको अपने समाजमें विलय करने हेतु जो भी कठोर कार्यवाही करनी आवश्यक है, वह डंकेकी चोटपर निर्भय होकर कर रहा है ! हिन्दू बहुल भारतको यह बात कब समझमें आएगी, पता नहीं ?
आजका समाज कितना बहिर्मुख है, यह यदि देखना चाहते हैं तो संसदके अधिवेशनोंको देखना चाहिए ! समाजके चयनित प्रतिनिधि किस प्रकार संसद जैसे पवित्र स्थानको एक दुर्गन्धयुक्त मछली बाजार सामान बना देते हैं, वह स्पष्ट दिखाई देता है ! स्वार्थ, द्वेष, सत्तान्धता, अवसरवादिता, राष्ट्रद्रोह एवं धर्मद्रोह जैसे दुर्गुणोंसे युक्त लोक प्रतिनिधियोंने लोकतन्त्रको वह स्वरुप दे […]
अनेक हिन्दू धर्मद्रोही नेतागण बार-बार हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंको मात्र अपनी राजनीतिक स्वार्थसिद्धि हेतु आहत करनेका दुस्साहस करते रहते हैं, तब भी वे इस देशकी राजनीतिमें जनताद्वारा चयनित होकर आते हैं, इससे लज्जास्पद तथ्य इस हिन्दू बहुल आस्तिक देशके लिए और क्या हो सकता है ? हिन्दू राष्ट्रमें ऐसा नहीं होगा, मात्र राष्ट्रनिष्ठ और धर्मनिष्ठ व्यक्तियोंको […]
हिन्दुत्व विरोधी मीडियाको सामाजिक जालस्थानके (social networking) माध्यमसे हिन्दुत्व जागरणका प्रकरण खटकने लगा है ! यह तो बवंडरसे पहलेकी क्षणिका है, अभी तो बवंडर देखना शेष है ! ईश्वरीय नियोजन अनुसार हिन्दू राष्ट्रके निर्माणसे पूर्व एक सहस्र वर्षसे शोषित हिन्दुओंके स्वरका सिंघनाद अब आरम्भ होनेवाला है, जिससे सम्पूर्ण विश्वके अराजक तत्त्वोंकी पिंडलियां कांपने लगेंगी !
समलैंगिक प्रकरणको अपराध माना जाए या नहीं ?, इसपर न्यायालयसे निर्णय लेना, यही इस देशके बौद्धिक पतनको दर्शाता है । इसे तो एक अध्यादेश निकालकर, त्वरित घृणित अपराध घोषित करना चाहिए । जो कृत्य पशु भी नहीं करते, वह अमानवीय कृत्य मनुष्यकर निःसर्गके नियमको तोडे, वह तो निश्चित ही अपराध है, इसमें न्यायालय क्या निर्णय […]
जिस देशमें बडे-बडे भ्रष्टाचारी, अपराधी न्यायालयमें निर्दोष सिद्ध हो जाते हैं, उस देशमें एक वृद्ध सन्तको यदि बलात्कारके आरोपमें आजीवन कारावास मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए ! अराजक देश व नेत्रोंपर पट्टी बांधी हुई न्यायपालिकामें ऐसा होना सहज सम्भव है ।
मुसलमान अपने अनुयायियोंमें धर्मकी ऐसी घुट्टी पिलाते हैं कि उच्च शिक्षित वर्ग भी सरलतासे जिहादी बन, मानवताका शत्रु बन जाता है और हिन्दू अपने बच्चोंको सामान्य धर्मपालन, जैसे सूर्योदयसे पूर्व उठना, प्रातः काल उठकर स्नानादिकर उगते सूर्यको अर्घ्य देना, जैसी सरल बातें तक भी नहीं सिखा पाते हैं, धर्मप्रेम और धर्माभिमानकी बातें तो बहुत दूरकी […]