हिन्दू राष्ट्र

राज्यकर्ताकी प्रवृत्ति आसुरी होनेपर आपातकाल निश्चित


राज्य करनेवाले राज्यकर्ताकी प्रवृत्ति यदि आसुरी हो तो पडोसी शत्रु राष्ट्र सीमाको पार कर बार-बार घुस आता है, स्त्रियोंके बलात् शीलहरणसे वातावरणमें त्राहिमाम् गूंजने लगती है, राजभवन और संसद भवन, मछ्लीके हाटसे भी अधिक दुर्गंधित स्थान बन जाता, जहांसे राज्यकर्ताओंके कुकर्मोंकी दुर्गंध सम्पूर्ण विश्वमें व्याप्त हो जाती है और राष्ट्रमें नैसर्गिक आपदा रूपी दानव चहुं […]

आगे पढें

किसी भी देशकी संपन्नता एवं विकासका एक मुख्य घटक होता है स्त्रीका सुरक्षित होना |


मैकालेकी शिक्षण पद्धतिके प्रशंसक और आधुनिकताके रंगमें रंगे भारतीय, जो अमरीकाको अपना आदर्श मानते हैं, उन्हें यह बताना चाहेंगे कि अमरीका स्त्रियोंके लिए सुरक्षित स्थान नहीं है । किसी भी देशकी सभ्यता एवं विकासका एक मुख्य मापदण्ड होता है – उस देशमें स्त्रीका सुरक्षित होना । राम राज्यमें आभूषणोंसे सजी स्त्रियां निर्जन स्थानमें भी निर्भीक […]

आगे पढें

पुरुष-खेलोंका प्रचलन पुनः आरम्भ करना कालकी आवश्यकता है


स्वतन्त्रता पश्चात लाठी-काठी, खड्ग संचालन (तलवारबाजी), मल्लयुद्ध (कुश्ती), भाला फेंक जैसे पुरुष प्रधान (मर्दाना) खेल आज नगरोंसे ही नहीं अपितु ग्रामीण क्षेत्रोंसे भी लुप्त हो रहे हैं ।  इन खेलोंकी विशेषता यह थी कि इनसे शरीर तो बलिष्ठ होता ही था, पुरुषोंमें क्षात्रवृत्ति जागृत रहती थी और विपरीत कालमें वे अपना एवं अपने स्वजनोंका दुर्जनोंसे […]

आगे पढें

देखिए पुरुषत्वका कितना ह्रास हुआ है !


हमारी वैदिक संस्कृतिमें पुरुष अपने तपोबलसे सम्पूर्ण ब्रह्मांडपर राज्य करते थे | आज अपने दो बच्चों और पत्नीका संगोपन करनेके लिए सार्वजनिक धनको हडपकर या भ्रष्टाचारकर, (जो एक प्रकारका राष्ट्रद्रोह है) अनेक पुरुष अपनी गृहस्थी चलाते हैं, देखिए पुरुषत्त्वका कितना ह्रास हुआ है ! मेरे पास उपासनाके अध्यात्मिक उपाय केंद्रमें  ऐसे अनेक व्यक्ति आते हैं […]

आगे पढें

हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना


हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना एवं हिन्दू धर्मकी पुनर्स्थापनाका कार्य मात्र संतोंके संकल्प एवं उनके आशीर्वादद्वारा ही संभव है -तनुजा ठाकुर

आगे पढें

राष्ट्र एवं धर्मके प्रति कर्त्तव्य सर्वोपरि है !


कुछ व्यक्ति मुझसे कहते हैं कि आप जन्म-ब्राह्मण हैं, अतः आप ब्राह्मण समाजके लिए कार्य करें, कुछ कहते हैं आप झारखण्डसे हैं; अतः आप झारखण्डके प्रगतिके लिए कुछ करें तो कुछ कहते हैं आप मिथिलाञ्चलसे हैं; अतः उसके उत्थानके लिए सहभागी हों ! तो ध्यान रखें, सर्वप्रथम राष्ट्र है और राष्ट्रका प्राण धर्म है; अतः […]

आगे पढें

रामराज्यकी स्थापना लेखन और प्रवचनसे कैसे संभव है ?


किसी पत्रकारने कल मुझे पूछा कि राम राज्य रुपी हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु आप प्रवचन एवं लेखनसे योगदान दे रही हैं तो मेरा प्रश्न है कि इनके माध्यमसे यह कैसे संभव है  ? उत्तर : खरे अर्थमें रामराज्यका अर्थ है अपने विषय-वासनाओंपर नियंत्रण कर ईश्वरीय तत्त्वमें रममाण होना ! जब प्रत्येक व्यक्तिके अंदर इस प्रकारके […]

आगे पढें

धर्म अधिष्ठित राजनीति ही राष्ट्रको आंतरिक और बाह्य सुरक्षा देती है


कुछ मूढ़ कहते हैं राजनीति और धर्मको विभक्त ही रखा जाये तो अच्छा है ! तो सत्य जान लें धर्म अधिष्ठित राजनीति राष्ट्रको आंतरिक और बाह्य सुरक्षा देती है उससे उस राष्ट्रमें स्त्री, बच्चे और वृद्ध, अर्ध रात्रिमें भी निडर होकर भ्रमण कर सकते हैं और राष्ट्र सशक्त होनेसे दुश्मन पडोसी स्वप्नमें भी राष्ट्रकी सीमा पार […]

आगे पढें

एक मित्रने पूछा है कि जन्म हिन्दू और कर्म हिन्दूमें क्या अंतर है ?


जन्म हिन्दू अर्थात् जो समझता है कि मात्र हिन्दू माता पिता के यहाँ जन्म लेने से मैं हिन्दू कहलाने योग्य हो गया और उसे लगता है ही हिन्दू धर्म स्वयंभू है अतः वह नष्ट नहीं हो सकता अतः समाज में हो रहे धर्मग्लानि को देखकर वह मौन रहता है और न ही वह धर्माचरण करता […]

आगे पढें

वैदिक सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ स्तरका अध्यात्मशास्त्र सिखा सकता है


मेरे कुछ मित्रोंने कहा कि आप अपने ज्ञानकी बातोंमें राजनैतिक बातोंका समावेश न करें इससे आपकी बारेमें लोगोंकी धारणा परिवर्तित जाएगी। आप अपने आपको आध्यात्मिकता तक ही सीमित रखें ! एक सरल सा तथ्य जान लें “वैदिक सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ स्तरका अध्यात्मशास्त्र सिखा सकता है अतः यदि धर्म शिक्षण देती हूं तो राजधर्म सीखाना […]

आगे पढें

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution