समस्याओंका मूल कारण धर्मग्लानि है और उपाय मात्र धर्म संस्थापना है ! मेरे कुछ परिचित कहते हैं कि बेरोजगारी दूर करनेके लिए हमारे साथ मिलकर कार्य कीजिये, तो कुछ कहते हैं अशिक्षा दूर करने हेतु मेरे संग प्रयास कीजिये, तो कुछ कहते कन्या भ्रूण हत्या दूर करने हेतु हमारे संग जुडें, तो कुछ कहते हैं […]
वह काल भिन्न था, जब अपनी पत्नीके हरणका दण्ड देनेके लिए भगवान श्रीरामने समुद्रपर वानरोंद्वारा पुल बनवाकर रावणका विनाश किया । आजके अधिकांश पुरुष ऐसे समाचारोंको चायकी चुस्कियोंके साथ पढकर, सुनकर, देखकर मात्र शब्द रूपी दिखावटी आक्रोश प्रकट कर सकते हैं ! अपने रक्षण हेतु प्रशिक्षण लें और अपनी साधना बढाएं ! ध्यान रहे, आप […]
जब ढोंगी गुरु, अत्याचारी एवं भ्रष्टाचारी राज्यकर्ता, भोग करनेकी प्रवृत्ति करनेवाली प्रजाकी भरमार हो जाये तो समझ लें कि कलियुगका चरम आ गया ! जब गुरु त्याग और धर्मकी प्रतिमूर्ति लगे, उनकेद्वारा सर्वत्र निःशुल्क धर्म-शिक्षण दिया जाये, राजा प्रजा हितके विचारसे सर्व कार्य करे और प्रजाके लिए भोग नहीं अपितु योग अर्थात साधना प्रधान हो […]
संस्कृत निष्ठ हिन्दी ही हमारी राष्ट्र भाषा है और उसके गौरवको पुनर्स्थापित करना प्रत्येक भारतीयका राष्ट्रधर्म – तनुजा ठाकुर
भगवान श्रीरामने रावणपर विजय पानेसे पूर्व मां दुर्गाकी आराधनाकर, उन्हें प्रसन्नकर, रावण वध हेतु आवश्यक शक्ति मांगी थी । वे तो साक्षात अवतार थे, उन्हें यह करनेकी आवश्यकता नहीं थी; परन्तु अवतारी पुरुष जो भी करते हैं, उसे वे समाजमें आदर्श स्थापित करने हेतु करते हैं । वानर सेनाने रामनामका आधार लेकर सेतु (पुल) निर्माण […]
धर्मविहीन समाज पशुताकी ओर बढता है, अनेक विकसित देशोंमें पूंजीवाद, समाजवाद, इत्यादि आधारित राष्ट्र प्रणालीके असफल होनेके साथ ही और इस्लामिक देश (जो धर्म आधारित होनेका ढकोसला करते हैं) में भी अन्य सामाजिक समस्यायें जैसे भयावह यौन रोग, आतंकवाद, आर्थिक मंदी, राजनैतिक अस्थिरता, समलैंगिकता, अमानवीय स्त्री उत्पीडन यह सब संकेत हैं कि मात्र सनातन धर्म आधारित […]
मेरे पास प्रतिदिन एक या दो पत्र ऐसे शुभचिंतकोंके आते हैं जो मेरे विषयमें अपनी चिंता प्रकटकरते हैं उनका कहना है कि आप इतना मुखर होकर असत्यका एवं अधर्मी तत्त्वोंका विरोध न करें, हमें आपके भविष्यके विषयमें चिंता होती है ! यदि आपको मेरे विषयमें चिंता होने लगी है और वह भी दो पैरवाले पशुओंसे […]
हिंदुतत्ववादी व्यक्ति के बारेमें जानकारी रखने में यह तंत्र जितनी सजग है, काश यह भ्रष्टाचार और आतंकवाद के प्रति अपनी इतनी ही कर्तव्यनिष्ठा निभाए तो यह देश घोटालों क देश न कहलाए ! -तनुजा ठाकुर
हिन्दू धर्मकी विडम्बना यह है कि एक ईसाईका कोई सम्बन्धी पादरी या नन बन जाए तो वह गर्वसे सबको यह बात बताता है, एक मुसलमानका कोई सम्बन्धी मौलवी बन जाए तो वह भी स्वयंको गौरवान्वित अनुभव करता है, उनका धर्मप्रेम तो इस सीमातक है कि कई इस्लामिक राष्ट्रोंमें वे अपने अल्पायु बालकोंको जिहादी बनाने हेतु […]
कुछ समय पूर्व, भिक्षाटनकी सेवाके मध्य एक व्यक्तिने कहा ” हम आपकी संस्थाको कुछ अर्पण करना चाहेंगे; परंतु पहले आपको यह विश्वास दिलाना होगा कि आप राजनीतिमें प्रवेश नहीं करेंगी और न ही राजनीतिज्ञोंके बारे कोई टीका करेंगी” ! मैंने उनसे नम्रतापूर्वक कहा “हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना मेरे श्रीगुरुका उद्देश्य है और इस हेतु जो भी […]