हिन्दू राष्ट्र

हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना आवश्यक


यदि हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना शीघ्र नहीं की गई तो आरक्षण रुपी महामारी इस देशको निगल जाएगी !

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कुपात्र पुत्र सत्ताके योग्य नहीं !


पुत्रस्यापि न मृष्येच्च स राज्ञो धर्म उच्यते । – शान्तिपर्व, महाभारत ९१:३२ अर्थ : पुत्रके भी अपराधको सहन नहीं करना ‘राजधर्म’ कहलाता है, किन्तु इस देशमेेेंं अपने अयोग्य, मूढ एवं कुपात्र पुत्रोंको सत्ता देनेके लिए आजके राजनेता सतत प्रयत्नशील रहते हैं और कईयोंने तो उन्हें सत्तासीन कर इस देशकी जगहंसाई करवा रहे हैं ! इससे […]

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बंगालमें हिन्दुओंकी हत्याओंका क्रम चालू


भाजपाके कार्यकर्ताओंकी हत्याका क्रम चालू है, बंगालमें पुनः एक और भाजपा कार्यकर्ताकी हत्याका समाचार प्रकाशित हुआ ! हिन्दू बहुल देशमें अब हिन्दू ही सुरक्षित नहीं है, कहीं वह राष्ट्रद्रोहियोंद्वारा मारा जाता है, कहीं आतंकवादियोंद्वारा, कहीं साम्यवादियोंद्वारा तो कहीं कांग्रेसियोंद्वारा ! पुनः भाजपा कार्यकर्ताकी हत्याका आरोप तृणमूल कांग्रेसपर लगनेके समाचार उजागर हुए हैं । (२९.७.२०१८)

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हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य


कलियुगमें धर्मका पतन होगा, यह सुनते हुए बडी हुई; किन्तु धर्मका पतनका अर्थ क्या होता है, अब समझमें आ रहा है ! कहीं वासनान्ध चरित्रवाले नराधमोंके अविश्वसनीय कुकृत्योंको पढकर मन सिहर उठता है तो कहीं स्वार्थान्धोंं….

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ढोंगी गुरु सावधान हो जाएं


आनेवाले आपातकालमें सभी ढोंगी गुरुओंके ढोंग उजागर हो जाएंगे, क्योंकि वे न ही अपने भक्तोंको उसकी पूर्वसिद्धता करवा रहे हैं और स्वयं भी गुरु पदपर न होनेके कारण वे अपने भक्तोंके योगक्षेमका वहन करनेमें भी असमर्थ होंगे, ऐसेमें उनका साम्राज्य स्वतः ही ढह जाएगा । इसप्रकार हिन्दू राष्ट्रके आगमनके पूर्व ही ढोंगी गुरुओंकी प्रजाति लुप्त […]

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धर्मकी पुनर्स्थापना हेतु इसमें होनेवाले अनाचारको मान्य करना है अति आवश्यक


कुछ हिन्दू परिचित कहते हैं कि आप हिन्दू धर्ममें होनेवाले अनाचार सार्वजनिक रूपसे न लिखें, इससे हमें लज्जा आती है और ऐसा करनेसे हमारा धर्म निर्बल हो जाएगा । हिन्दुओंको यदि सबल और सशक्त बनना है तो उन्हें अपने धर्म अन्तर्गत होनेवाली धर्मग्लानिके कारणोंको स्वीकार करना ही होगा और तत्पश्चात ही उसमें सुधार करना सम्भव […]

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धर्मधारा


इस धर्मनिरपेक्ष देशमें मात्र मन्दिरोंका सरकारीकरण होता है, मस्जिदों और गिरिजाघरोंका नहीं ! भिन्न मन्दिरोंकी वर्षों पुरानी परम्पराओंको तोडनेका आदेश न्यायालय बार-बार देता है, चाहे इससे सौ कोटि हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाएं क्यों न आहत हो; किन्तु यह ध्यान रहे आजका हिन्दू जाग रहा है, वह अपने ऊपर होनेवाले ये सर्व भेदभावपूर्ण आदेशोंको समझ रहा है […]

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नास्तिक तथाकथित बुद्धिजीवियोंको शासन दण्ड दे !


इस देशमें अनेक नास्तिक प्रवृत्तिके तथाकथित बुद्धिजीवी स्वयंको पण्डित कहते हैं, कुछ तो भगवा वस्त्र पहनकर स्वयं घोषित स्वामी कहलाने लगते हैं, वस्तुतः ऐसे लोग ज्ञानी कहलानेके अधिकारी नहीं होते हैं…

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धर्मधारा


लोकतन्त्रका और वीभत्स स्वरुप तब देखनेको मिलता है जब राजनीतिक दलके कार्यकर्ताओंकी लोक सभा या विधान सभा हेतु प्रत्याशीकी सूची घोषित होती है । अपने ही नेतृत्वके विरुद्ध या दलके विरुद्ध ये स्वार्थलोलुप एवं सत्तालोलुप नेता अपना विरोध जताना आरम्भ कर देते हैं । जो अपने दलका नहीं होता, वह समाज और राष्ट्रका क्या होगा […]

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अहिन्दू पन्थोंका पतन निश्चित


धीरे-धीरे अहिन्दू पन्थोंके कुकर्म सभीको ज्ञात होने लगे हैं ! विदेशोंमें तो पादरियों और गिरिजाघरके कुकर्मोंके कारण अब वहां लोग निधर्मी बन रहे हैं । मुसलमान महिलाएं अब भारतमें ही नहीं, इरानमें भी इस्लामके विरुद्ध अपने विरोधसे स्वर मुखरित करने लगी हैं, जबकि उन्हें ज्ञात है कि इसके परिणाम भयंकर हो सकते हैं ! किन्तु […]

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