इस देशमें धर्मान्धोंका दुस्साहस इतना बढ गया है कि अब वो उपद्रवमें पुलिसवालेको भी बन्दूक दिखाने लगे हैं, ऐसेमें इस देशमें कौन भयभीत अनुभव कर रहा है ?, स्वयं सोचें !
हिन्दुओं, मस्जिदमें धर्मान्धोंको हिन्दुओंको कैसे नष्ट करें, यह शिक्षा दी जाती है अब तो जाग्रत होकर मंदिरमें नियमित एकत्रित होकर अपने रक्षण हेतु कुछ उपाय करें ! हिन्दू धर्म हमें किसीको बिना कारण मारनेकी शिक्षा तो नहीं देता है किन्तु स्वयंके रक्षण हेतु तो अब कुछ करना ही होगा ! देहलीके गृह युद्धसे कुछ शिक्षा […]
इस देशकी स्स्थिति अब ऐसी हो गयी है कि यहां अब नैसर्गिक आपदा प्रबंधनके स्थानपर सत्तालोलुप राजनेताओंद्वारा निर्मित धर्मान्धोंद्वारा देशके भीतर आतंकी आक्रमणपर प्रबन्धन क्या होना चाहिए इसका सर्वत्र प्रबोधन करना होगा ! सभी धर्मगुरु अपने भीतरके क्षात्रतेजको जाग्रत कर समाजको प्रबोधन आरम्भ करें और बर्मासे इसका बोध लें ! अब समय बहुत ही कम […]
देहलीमें हुई सांप्रदायिक उत्पातके मध्य धर्मान्धोंके सर्व कुकृत्य सामाजिक अंतर्जालपर (सोशल नेटवर्किंगपर) उजागर हो गए हैं ! अन्यथा आज भी कश्मीर जैसे ही या तो हमें कुछ बताया ही नहीं जाता या कुछ उलटा ही बताया जाता जो आज भी कुछ देशद्रोही बिके हुए न्यूज़ चैनल कर रहे हैं ! अच्छा है, सभीके न सही […]
भारतकी राजधानीमें अराजकता देखकर आप समझ सकते हैं कि हम सब अब कितने सुरक्षित हैं ! हिन्दुओ, जागो कहीं देर न हो जाए !
जिस देशमें नारीको देवीके रूपमें पूजनेकी संस्कृति रही है, उस देशमें आए दिन बच्चियोंके साथ नृशंस बलात्कार होनेके समाचार आना, यह बताता है कि इस देशमें नैतिकताका कितना पतन हुआ है, तब भी राज्यकर्ता कुछ ठोस उपाययोजना नहीं निकाल पा रहे हैं, यह अत्यन्त लज्जास्पद तथ्य है और इससे भी निकृष्ट बात है यह कि […]
आज गुरुपदपर विराजमान कुछ कथावाचकों एवं तथाकथित सन्तोंके भक्तोंकेद्वारा शंका समाधान सुनकर एक बात तो समझमें आती है कि इन्हें सूक्ष्मका अंशमात्र भी ज्ञान नहीं है ! एक ऐसे ही मार्गदर्शकने अपने भक्तोंको बताया कि पूर्वकालमें हिन्दू पितृपक्षके….
इस माह १ सितम्बरको ऑस्ट्रियामें हुए सत्संगमें आये हुए एक हिन्दुत्वनिष्ठकी नतनीको देखा तो ज्ञात हुआ कि वह (बेटीकी बेटी) दैवी बालक-बालिकाओंकी श्रेणीमें है । चार वर्षकी वह बच्ची उच्च स्वर्गलोक……
कुछ व्यक्तिसे जब पूछते हैं कि आपको उपासनाके कार्यक्रमकी सूचना दी गई थी तो भी आप सेवा हेतु नहीं आए तो वे बताते हैं कि वे फलां-फलां समाजसेवामें व्यस्त थे ! एक बातका सभी साधक ध्यान रखें कि आनेवाले अगले चार-पांच वर्ष सभीके लिए बहुत भारी होंगे……
जैसे-जैसे हम आपातकालकी और बढेंगे, प्राकृतिक आपदाओंकी तीव्रता बढती जाएंगी; अतः अभीसे उसकी पूर्वसिद्धता करना अति आवश्यक है । कृपया इस सूचनाओंको संग्रहित कर रखें, उसे आचरणमें लानेका प्रयास करें …….