हिन्दू राष्ट्र

आजके पुरुष अपनी वृत्तिको अन्तर्मुख करें !!!


आजका अधिकांश पुरुष-वर्ग इतना बहिर्मुख हो गया है कि जब भी बलात्कार इत्यादिकी घटनाओंके बारेमें कुछ भी दृष्टिकोण देते हैं तो झटसे वे सारा दोष स्त्रियोंपर डाल देते हैं कि आज स्त्रियां अंग प्रदर्शन करती हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है, परन्तु जिस देशमें स्त्रियां ‘बुर्का’में रहती हैं, वहांका पुरुष-वर्ग सर्वाधिक कामुक होता है । […]

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हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनामें संतोंने सूक्ष्म स्तरपर पहले ही कर दिये हैं !!!


महाभारतके युद्धके समय कुरुक्षेत्रमें भगवान श्रीकृष्णने अर्जुनसे कहा “मैंने पहले ही सभी कौरवोंका नाश कर दिया, तुम्हें मात्र एक कठपुतली समान अपने क्षत्रिय कर्तव्य पूर्ण करने  हैं” ! उसी प्रकार हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना संतोंने सूक्ष्म स्तरपर पहले ही कर दिये हैं, अब तो मात्र औपचारिकताको पूर्ण करना है और जो भी इस औपचारिकताको पूर्ण करनेमें इस […]

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हिन्दू बहुल राष्ट्रकी विडम्बना !


भारतवर्षके स्वतन्त्र होनेके पश्चात इस देशमें जहां ९०% हिन्दू रहा करते थे, उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करना, यह हमारे स्वतन्त्र राष्ट्रके नवनिर्माताओंकी सबसे बडी भूल रही और उसका परिणाम आज सर्वत्र देखा जा सकता है । आज चहुं ओर धर्मग्लानि, व्यभिचार और भ्रष्टाचार व्याप्त है । सनातन धर्मके सिद्धान्तके विषयमें आज अधिकांश हिन्दुओंको अंशमात्र भी […]

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भजन नहीं, आजके हिन्दुओंको क्षात्रधर्म साधनाकी है आवश्यकता !


एक शुभचिंतकने मुझसे कहा कि आपकी वाणी अत्यन्त मधुर है; अतः आप अपने प्रवचनोंमें आधे समय भजन करें, इससे आपके प्रवचन अधिक प्रभावी होंगे । मैंने कहा, “जिस प्रकार अति दक्षता कक्षके (ICU) रोगीको प्राणवायु (oxygen) दिया जाता है, उसीप्रकारकी स्थिति आजके हिन्दुओंकी है । उन्हें धर्मको जानकर, धर्माचरण करनेकी आवश्यकता है । भजन वर्तमान […]

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क्या इसे धर्मनिरपेक्षता कहते हैं ?


हिन्दु साधु संतोंके चरित्रपर झूठा लांछन लगवाना ! कोई भी कुकृत्य हो तो बिना सोचे समझे, सर्वप्रथम हिंदुत्त्ववादी संगठनोंपर आरोप लगाना ! आज तक एक भी हिन्दुको आतंकवादी सिद्ध नहीं कर पानेपर भी भगवा आतंकवादका शब्द प्रचलित करना ! हिन्दुओंकी अपनी ही तीर्थनगरीमें परिक्रमा करनेसे प्रतिबंधित करना ! नास्तिकोंके अवैज्ञानिक प्रस्तावको (अंध श्रद्धा निर्मूलन विधि) […]

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जब राष्ट्र और धर्मका अस्तित्त्व ही नहीं रहेगा तो मैं अपने सौम्य छविका क्या करुंगी ?


जब भी मैं किसी व्यक्ति या पक्षके राष्ट्रद्रोही या धर्मद्रोही कृत्योंके बारे में कुछ भी साझा करती हूं तो उस व्यक्ति या पक्षके व्यक्ति मुझे तुरंत यह सुझाव देते हैं कि आप ऐसा न करें, इससे आपकी आध्यात्मिक छवि धूमिल हो जाएगी । तो एक सरल सा तथ्य जान लें, अध्यात्मका मूलभूत सिद्धांत अपने ‘स्व’का […]

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विकसित राष्ट्रके व्यक्तियोंमें स्वभाषाभिमान कूट कूट कर भरा हुआ है !


कुछ दिवस पूर्व मैं नेपालके काठमांडू नगरमें एक सामाजिक क्लबमें प्रवचन लेने गई थी ! वहां कुछ स्त्रियां मेरे प्रवचनसे पूर्व आंग्ल भाषा (English) में उद्बोधन कर रहीं थीं, लगभग दस स्त्रियोंने मेरे प्रवचनके पूर्व एवं पश्चात् उसी भाषामें कुछ-कुछ बोला होगा, उनमें दो स्त्रीको छोड किसीको अङ्ग्रेज़ी ठीकसे नहीं आती थी । उनकी टांग […]

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मां वैष्णव देवीके चित्रवाले सिक्केसे कुछ कठमुल्लोंको कडी आपत्ति !


वृत प्रकाशित हुआ है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडियाद्वारा जारी किए गए सिक्कोंपर मां वैष्णव देवीके चित्रपर कुछ कठमुल्लोंको कडी आपत्ति है ! सर्व विदित है कि वैष्णव देवीकी रजत जयंतीके उपलक्ष्यमें मां वैष्णव देवी अंकित सिक्के प्रचलित किए गए | रिजर्व बैंक ऑफ इंडियाकी प्रवक्ता अल्पना कीलावालाने बताया, “सिक्केको इस प्रारूपमें निकालनेमें रिजर्व बैंक […]

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भारतवर्षका प्राण ‘हिन्दुत्व’ है


एक व्यक्तिने मुझे पत्र लिखकर कहा है कि आपके लेखसे हिन्दुत्त्व विषयी कट्टरवादकी स्पष्ट झलक दिखाई देती है ! उत्तर सरल है – भारतवर्षका प्राण ‘हिन्दुत्व’ है, जब प्राण नष्ट हो जाएंगे तो इस देशको नष्ट होनेमें कितना समय लगेगा, स्वयं सोचें । आज जब प्रसारमाध्यम, सरकार, राजनैतिक पक्ष, पाश्चात्य संस्कृति, आधुनिकतावाद, अदूरदर्शी नास्तिक विज्ञानवाद, […]

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उत्तराधिकारी घोषित करनेके सम्बन्धमें सन्तों और आजके नेताओंमें भेद !


अध्यात्मप्रसारके मध्य पिछले कुछ वर्षोंसे अनेक आश्रमोंसे सम्पर्क बना है और मैंने पाया है कि जब उस आश्रमके मुखिया पदपर आसीन सन्तको यदि कोई योग्य उत्तराधिकारी नहीं मिलते हैं तो उनके देह त्यागके पश्चात उनकेद्वारा किया जा रहा कार्य निर्विघ्न होता रहे, इस हेतु वे एक न्यासकी स्थापना कर, सर्व कार्य न्यासके योग्य सदस्योंको सौंप […]

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