भारतके ९०० वर्ष पराधीनतामें रहनेसे हिन्दुओंकी अनेक पीढियां पराधीनतामें रहीं । अब मनकी परतन्त्रताका विष नष्ट करनेके लिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करनेके लिए दिन-रात प्रयास करना आवश्यक है । ऐसा करनेपर ही ४ – ५ पीढियोंमें राष्ट्र और धर्मके प्रति हिन्दुओंमें अभिमान जागृत होगा ।
लडकोंकी शिक्षा अयोग्य रहनेका एकमात्र कारण केवल यह नहीं कि वे अंग्रेजी माध्यमके विद्यालयमें शिक्षा ग्रहण करते हैं । घरमें होनेवाले झगडे तथा दैनिकमें एवं दूरदर्शन (टीवी) प्रणालपर आनेवाले स्वैराचार, भ्रष्टाचार, जात्यन्धता, अपहरण, बलात्कार, हत्या इत्यादि समाचारोंसे भी उनपर अनिष्ट संस्कार होते हैं…
राजनेताओंके अनुसार कुछ सन्तोंके पास भी होती है वंशपरम्परा ! कुछ सन्तोंके शिष्य अच्छे स्तरके होते हुए भी वे अपने उत्तराधिकारीके रूपमें विशेष साधना न होते हुए भी अपने पुत्रकी नियुक्ति करते हैं !
एक वर्षमें १२ मास होते हैं, प्रत्येक मासमें ४ सप्ताह होते हैं, प्रत्येक सप्ताहमें सात वार होते हैं, प्रत्येक वारमें २४ घण्टे होते हैं, प्रत्येक घण्टेमें ६० मिनिट होते हैं तथा प्रत्येक मिनिटमें ६० सेकण्ड होते हैं; अतः किसी एकाध सेकण्डके कालके सन्दर्भका उल्लेख करना हो तो ख्रिस्ताब्द २०१५ के जुलाई मासके तीसरे सप्ताहका गुरुवार, सवेरे १० बजकर १० मिनिट, १० सेकण्ड इस प्रकार करना होगा…..
कहां आधुनिक लेखकोंका लेखन और कहां सन्तोंका लेखन ! सन्त मीराबाई, सन्त तुलसीदास, सन्त कालीदास, सन्त जनाबाई, सन्त नामदेव महाराज, सन्त निवृत्तिनाथ महाराज, सन्त ज्ञानदेव, सन्त मुक्ताबाई, सन्त एकनाथ महाराज, समर्थ रामदास स्वामी, सन्त तुकाराम महाराज इत्यादि सन्तके देह त्यागके अनेक शताब्दियां बीत जानेपर भी लोगोंकी स्मृतियोंमें ये बसे हैं; परन्तु आजकल जो साहित्यकार अपने […]
कक्षमें अकेले रहनेके स्थानपर अन्योंके साथ निवास करनेका लाभ जब कोई साधक आश्रममें प्रथम निवास हेतु आता है, तो उसे अन्योंके साथ रहनेके लिए कहनेपर कष्टप्रद लगता है । उसे यह ज्ञात होना चाहिए कि प्रीति निर्माण करनेका सर्वाधिक सुलभ मार्ग अर्थात सबके साथ एक कक्षमें निवास करना । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, […]
देशकी स्वतंत्रता उपरांत पिछले ७१ वर्षोंमें किसी भी राजनीतिक दलने जनताको साधना और त्याग नहीं सिखाया; इसलिए देश परम अधोगतिको प्राप्त हुआ है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था
हिन्दुओ ! विश्वमें ही नहीं, अपितु हिन्दू बहुल भारतमें भी हिन्दुओंके लिए दुःखद समाचारोंकी संख्या मृतवत हिन्दुओंके कारण बढ रही है । तब भी निराश न हों, साधना करते रहें । ‘वर्ष २०२३ से हिन्दुओंके लिए काल अनुकूल होगा और वह १००० वर्ष तक अनुकूल बना रहेगा’, ऐसा अनेक सन्तोंने कहा है और ‘नाडीभविष्य’में भी […]
‘पुलिस’कर्मियोंको यह लगना चाहिए कि प्रजा पुत्रके समान है, तभी वे चाकरी योग्य प्रकारसे कर सकते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
कोई रोग न हो; इस हेतु लसीकरण (वैक्सीनेशन) किया जाता है, उसीप्रकार तीसरे महायुद्धके कालमें बचने लिए साधना ही लस (वैक्सीनशन) है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था