पूर्वके युगोंमें व्यक्ति सात्त्विक होनेसे प्रकृति अनुसार किसी भी साधनामार्गसे साधना कर सकता था । कलियुगमें व्यक्तिमें अनन्त स्वभावदोष होनेसे उन्हें दूर किए बिना, साधना करना असम्भव है; इसलिए सनातन संस्थाद्वारा बताए गए ‘गुरुकृपायोग’में स्वभावदोष एवं अहम् निर्मूलनको प्राधान्य दिया गया है । इनका निर्मूलन करनेके कारण ही सनातनके साधकोंकी शीघ्र प्रगति होती है ।
समष्टि साधना करनेसे अर्थात अन्य व्यक्तियोंसे साधना करवानेसे वातावरणकी रज-तम प्रधानता घटनेमें कुछ सहायता होती है । इससे व्यष्टि साधना करना थोडा सुलभ होता है । समष्टि साधना करनेवाला साधक केवल ‘मैं और मेरी’ साधनाका विचार न कर, अन्य व्यक्तियोंकी साधनाका भी विचार करता है । इससे उसमें व्यापकत्व आता है और उसकी आध्यात्मिक प्रगति […]
विविध नाडियोंमें प.पू. डॉक्टर विष्णुके अवतार हैं, इस उल्लेखका भावार्थ मेरा गुरुमन्त्र श्रीरामका है । आजके आपातकालमें मेरे उपास्यदेवता श्रीकृष्ण हैं । दोनों ही श्री विष्णुके अवतार हैं । जो जिस देवताकी उपासना करता है, उस देवताका तत्त्व उसमें प्रविष्ट होता है । उसी तत्त्वका अनुसरण कर विविध नाडियोंमें प. पू. डॉक्टर विष्णुके अवतार हैं, […]
आजके बुद्धिप्रामाण्यवादियों एवं धर्मद्रोहियोंका वाद-विवादमें अग्रसर न होनेका कारण आदि शंकराचार्यने विरोधी पण्डितोंसे वाद-विवादकर उन्हें पराजित किया । आजके बुद्धिप्रामाण्यवादी तथा धर्मद्रोहियोंको वाद-विवादमें पराजित करना सम्भव नहीं; क्योंकि उन्हें धर्मका लेशमात्र भी अभ्यास न होनेसे वे वाद-विवाद करने हेतु अग्रसर नहीं होते !
हिन्दुओंकी धर्मनिष्ठा बुद्धिप्रामाण्यवादियोंद्वारा नष्ट करनेके कारण, धर्मनिष्ठ अल्पसंख्यक मुसलमान, इसाई एवं बौद्ध, बहुसंख्यक हिन्दुओंपर भारी पड रहे हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
स्वतन्त्रतासे अबतकके शासनतन्त्रने राष्ट्र और धर्मके प्रति निष्ठा निर्माण की होती तो कोई मदिरा तथा ‘सिगरेट’का व्यसनी नहीं होता ।
पुलिस और सेना ही नहीं; अपितु प्रशासनकी सभी भर्तियां करते समय हिन्दू राष्ट्रमें राष्ट्र एवं धर्मके प्रति प्रेम, यही सबसे बडी योग्यता समझी जाएगी । – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
श्रध्दा अर्थात् क्या ? यह भी जिन्हें ज्ञात नहीं, वे अन्धश्रद्धा निर्मूलनका कार्य करते हैं ।
कहां थोडेसे भौतिक सुखप्राप्ति हेतु ईसाई धर्म अपनानेवाले हिन्दू और कहां धर्म हेतु प्राण अर्पण कर इतिहासमें अजरामर होनेवाले छत्रपति सम्भाजी महाराज !
सम्पूर्ण विश्वको लगता है, हिन्दू धर्मका आधार मात्र भारतके हिन्दुओंको ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्वके मानवजातिको लगता है कि उन्हें हिन्दू धर्मका आधार (सहारा) है ! इसी कारण जगभरके जिज्ञासु अध्यात्मका ज्ञान प्राप्त करने भारत आते हैं । बुद्धिप्रामाण्यवादी, धर्मद्रोही तथा साम्यवादीके तत्त्वज्ञान प्राप्त करने हेतु भारतमें कोई नहीं आता; यह भी उनके ध्यानमें नहीं […]