बुद्धिप्रामाण्यवादियोंद्वारा हिन्दुओंका बुद्धिभेद करनेसे उनका बलहीन होना तथा इस कारण उनकी स्थिति चिन्ताजनक होना….
साधकों ! धर्मशास्त्रकी प्रत्येक कृति अपनी आध्यात्मिक प्रगति हेतु पूरक होती है, यह जानकर ग्रहणकालकी कृति करें ! इस आलेखानुसार कृति करना साधकोंके लिए निम्न कारणोंसे लाभदायक है । १. व्यष्टि साधनाके सन्दर्भमें होनेवाला लाभ : धर्मशास्त्रानुसार प्रत्येक कृति करना ही अपनी साधना है । ग्रहणकालमें की जानेवाली कृतियोंका पालन करते हुए साधना करनेसे ग्रहणकालमें […]
मानो दो व्यक्तियोंको एक समान वेतन प्राप्त होता है । एकके वेतनका कुछ भाग ऋण न होनेसे बचा रहता है, तो दूसरेका महीनेका व्यय पूर्ण होनेपर बचा हुआ भाग ऋण चुकानेमें व्यय हो जाता है । इसका अर्थ यह है कि जिसे ऋण है, उसका प्रारब्ध तीव्र है । वह ऋण चुकाकर अपना प्रारब्ध न्यून […]
अनेक सन्तोंके बताए अनुसार ख्रिस्ताब्द २०१९ से धीरे-धीरे तीसरा विश्वयुद्ध आरम्भ होगा । इस कारण निम्नलिखित अडचनें निर्माण होंगी । उनका कुछ प्रमाणमें सामना करना सम्भव होने हेतु आगे दी गई कृतियां करें – १. यात्राकी व्यवस्था बडे प्रमाणमें ईन्धनकी आपूर्तिमें बाधा आएगी ! तेल-निर्यात करनेवाले खाडीके देश युद्धका कुरुक्षेत्र बन जानेके कारण ईन्धन मिलना […]
भ्रष्टाचारी, बलात्कारी, धर्मद्रोही, राष्ट्रद्रोही इत्यादि अपराधियोंको दण्ड देना तथा वह भी अनेक वर्षोंके पश्चात्, यह सतही स्तरका उपाय है । इसके स्थानपर बाल्याकालसे ही सभीसे साधना करवा ली जाये, तो सभी सात्त्विक होंगे । इस कारण उनके मनमें अयोग्य विचार भी नहीं आएंगे । जनतासे साधना तमोगुणी राजनेता नहीं करवा सकते । इस हेतु हिन्दु […]
विश्वमें केवल सभी धर्मोंका अभ्यास न किए हुए हिन्दू ही ‘सर्वधर्मसमभाव’ शब्दका प्रयोग करते हैं। शेष किसी धर्ममें कोई एक व्यक्ति भी ऐसा नहीं कहता । हिन्दुओंके यह ध्यानमें नहीं आता कि, ‘सर्वधर्मसमभाव’ कहना अज्ञानताकी परिसीमा है, ‘प्रकाश तथा अन्धकार समान है,’ ऐसा कहनेके समान है – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
आग घरके पास आ रही हो, तो हम प्राण बचानेके लिय भाग-दौड करते हैं । अब तीसरा विश्वयुद्ध पास आ रहा है, इस कारण उसमें जीवित रहने हेतु साधना करें ! – परात्पर गुरु डॉ. आठवले
स्वामी विवेकानंदके बंगालमें तथा आदि शंकराचार्यजीके केरलमें जन्महिन्दुओंने साम्यवादियोंको अनेक दशकोंसे चुना और आगेकी अनेक भावी पीढियोंपर साम्यवादका संस्कार अंकित किया; इसलिए वहांके जन्महिन्दुओंकी स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गई है । इसमें कोई आश्चर्य नहीं ! हिन्दुओंको धर्मशिक्षा देकर उनसे साधना करवाकर उनका धर्माभिमान बढाना ही उसका एकमात्र उपाय है । ऐसा न करनेपर वहां […]
भारतको रसातलको लेजानेवाले लोकतन्त्रकी निरर्थकता ! राज्यकर्ता छोड जीवनके प्रत्येक क्षेत्रका उत्तरदायित्व उस उस क्षेत्रके विशेषज्ञोंके पास होता है । शिक्षक, वैद्य, प्राध्यापक, अभियन्ता, सनदी लेखाकार इत्यादि सभी अपने क्षेत्रमें शिक्षण लिए बिना उस पदपर नियुक्त नहीं किए जाते । केवल राजनीतिमें किसी विषयका ज्ञान न होनेपर भी उसे उस विभागका मन्त्री बना दिया […]
सनातन संस्थाके संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीका गुरुपूर्णिमा निमित्त संदेश ‘भारतमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना, अर्थात् सनातन धर्मराज्यकी पुनर्स्थापना करनेके लिए ‘कालानुसार प्रयत्न करना’, भी एक प्रकारसे समष्टि गुरुकार्य है । आज धर्मनिरपेक्षतावादी, साम्यवादी, बुद्धिवादी और अहिन्दू राजनीतिज्ञ ‘हिन्दू राष्ट्र’, इस शब्दका ही विरोध कर रहे हैं । अध्यात्मका ज्ञान न होनेके कारण वे काल-महिमा, सूक्ष्म […]