श्रीगुरु उवाच

न्यायव्यवस्थाके सन्दर्भमें हास्यास्पद लोकतन्त्र !


एक ओर जलसंवर्धन हेतु शासन अनेक कोटि रुपये व्ययकर जनजागृति करता है; परन्तु अनेक कोटि प्रलम्बित प्रकरणोंमें तथा न्यायाधीशोंकी यथोचित संख्याकी न्यूनता होते हुए भी सहस्रों प्रपत्रोंके आरोपपत्र तथा तिथिपर तिथि ((तारीखपर तारीख) लेनेकी अनिष्ट पद्धतिके कारण इस न्यायतन्त्रका बहुमूल्य समय व्यर्थ होते हुए भी शासन कुछ नहीं करता । – परात्पर गुरु डॉ . […]

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राष्ट्रका उत्थान मात्र आध्यात्मिक स्तरके प्रयासोंसे सम्भव !


किसी व्यक्तिका प्रारब्ध परिवर्तित करना लगभग असम्भव होता है । यदि उसे परिवर्तित करना ही हो तो, तीव्र साधना करनी पडती है । ऐसेमें भारतका प्रारब्ध, शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक स्तरपर प्रयत्न करनेसे पलटना सम्भव होगा क्या ?, इस हेतु आध्यात्मिक स्तरके उपाय अर्थात् साधनाका बल चाहिए – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले

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साधना ही सर्व अपराधोंको नष्ट करनेका है एकमात्र उपाय !


भ्रष्टाचार रोकनेके लिए ५०० एवं १००० के नोट बन्द करने जैसे सतही (ऊपरी) उपाय करनेके स्थानपर जनतासे साधना करवा कर लेनेसे भ्रष्टाचार ही समाप्त नहीं होगा; अपितु बलात्कार चोरी, हत्या जैसे सभी प्रकारके अपराध, करनेका विचार भी किसीके मनमें नहीं आएगा   – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले

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मात्र एक शतकमें साम्यवादकी दुर्दशाका कारण !


  अध्यात्मके प्रारब्ध शब्दकी और तथा ईश्वरकी ओर, पूर्ण रूपेण दुर्लक्ष करनेके कारण साम्यवाद १०० वर्षोंमें ही समाप्त होनेको आया है  – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले

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साधनाके मध्य अनुभूति आनेके पीछे कारण


१. प्रवासके समय कोई दृश्य क्यों दिखाई देता है ?, इसके पीछे कोई कारण नहीं होता, तब भी उन्हें प्रवासके अनुभव होते हैं । उसीप्रकार अध्यात्मके सूक्ष्म प्रवासमें भी अनुभूतियां होती हैं । २. ईश्वरको अनुभूतिसे कोई सीख देनी होती है । ३. कभी-कभी मायावी अनिष्ट शक्तियां भी अच्छी अनुभूति देती हैं । –  परात्पर गुरु […]

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हिन्दू राष्ट्रमें जनताको अपनी समस्याओंपर मिलेगा त्वरित समाधान !


हिन्दू राष्ट्रमें जाति, धर्म इत्यादिनुसार आरक्षण नहीं होगा एवं क्षमतानुसार चाकरी (नौकरी) दिए जानेसे प्रशासन सक्षम होगा ! इससे जनताके सभी प्रश्नोंके समाधान, अनेक वर्षोंतक प्रलम्बित नहीं रहेंगे; अपितु उन्हें तत्काल समाधान प्राप्त होगा ! – परात्पर गुरु डॉ . जयन्त आठवले

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पटाखे जलाना अपराध क्यों ?


जनता दारिद्र्यमें जीवनयापन करती हो, ऐसेमें अनके कोटि रुपयोंका दहन करनेवाले एवं आरोग्यहानि करनेवाले तमप्रधान पटाखोंपर हिन्दू राष्ट्रमें बन्दी होगी ! – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले  

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हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाकी आवश्यकता


बाल्यकालसे ही नैतिकता तथा आचारधर्म न सिखानेवाले पालक एवं शासनके कारण भारतमें सर्वत्र अनाचार एवं राक्षसी वृत्ति प्रबल हो गई है ! इस स्थितिके कारण बलात्कार, भ्रष्टाचार, विविध अपराध, देशद्रोह तथा धर्मद्रोहका प्रमाण अपरिमित होकर देश रसातलको गया है । इसपर उपाय मात्र एक, और वह है, धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना । – परात्पर […]

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हिन्दुओंकी स्थिति अत्यन्त दयनीय होनेका कारण


हिन्दू शब्दकी व्याख्या है, ‘हीनान् गुणान् दूषयति इति हिन्दु:’, हीनान् गुणान् अर्थात हीन या कनिष्ठ, ऐसे रज एवं तमोगुणका, ‘दूषयति’ अर्थात नाश करनेवाला । इस व्याख्यानुसार देखें तो मात्र १०% हिन्दू ही वास्तविक हिन्दू हैं, शेष ९०% केवल जन्महिन्दू हैं ! इसी कारण हिन्दुओंकी स्थिति, विश्वमें ही नहीं; अपितु भारतमें भी दयनीय हो गई है […]

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पाण्डित्य दर्शानेवालोंका मात्र पुस्तकरूपी होना !


पुस्तकमें शाब्दिक ज्ञान होता है ।इसका ज्ञान पुस्तकको स्वयंको नहीं होता ।उसीप्रकार पाण्डित्यका प्रदर्शन करनेवाले व्यक्ति, जिन्हें शाब्दिक ज्ञान होता है, उन्हें उस ज्ञानकी अनुभूति नहीं होती है । – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले  

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