भारतके कडे रवैयेसे भयभीत पाकिस्तानने एक और अवसर देनेकी की मांग; परन्तु अक्षम्य है पाकिस्तान !!


फरवरी २५, २०१९

 

भारतद्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर पाकिस्तानको चहुंओर घेरनेके प्रयासोंके पश्चात पाकिस्तानके तेवर ढीले पडते दिख रहे हैं । सुरक्षा परिषदद्वारा आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’का नाम लेकर उसकी निंदा करनेसे लेकर ‘फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स’द्वारा पाकिस्तानको प्रतिबन्धित सूचिमें बरकरार रखनेतक पाकिस्तानको अन्तर्राष्ट्रीय मंचपर एकके पश्चात एक झटके लग रहे हैं । कश्मीरमें अतिरिक्त सुरक्षाबलोंकी तैनातीने भी पाकिस्तानको घुटनोंपर ला खडा किया है । ऐसे में, वहांके प्रधानमन्त्री इमरान खानका रवैया भी अब ढीला पडता दिख रहा हैं । उन्होंने भारतसे एक और अवसर देनेकी बात कही है ।

पुलवामामें हुए आतंकी आक्रमणमें ४० भारतीय सैनिक वीरगतिको प्राप्त हो गए थे । उसके पश्चात प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीने दोषियोंको न छोडनेकी बात कह भारतीय रुखको स्पष्ट कर दिया था । राजस्थानके टोंकमें इमरानके बारेमें बोलते हुए मोदीने कहा था, “मैंने उन्हें बताया कि हमें निर्धनता और अशिक्षाके विरुद्घ युद्ध लडना चाहिए तो

उन्होंने (इमरान खान) कहा, “मोदी जी मैं पठानका पुत्र हूं । मैं सत्य बोलता हूं और अपने शब्दोंपर बना रहूंगा ।” अब समय आ गया है कि इमरान खान अपने शब्दोंपर खरे उतरें । आतंकी संगठनोंपर कार्यवाही करनी चाहिए ।”

इमरानने पुलवामा आक्रमणसे जुडे साक्ष्यकी मांग की है और कहा है कि यदि भारत ‘कार्यवाही करने योग्य’ साक्ष्य देता है तो वह उपयुक्त पग उठाएंगे ।

उधर पाकिस्तानके विदेश मन्त्री शाह महमूद क़ुरैशीने भारतको चेतावनी देते हुए अपने रवैयेमें परिवर्तन करनेको कहा है । उन्होंने संयुक्त राष्ट्रको भी पत्र लिखकर हस्तक्षेपकी मांग की है । कुरैशीने गीदड-भभकी देते हुए कहा कि भारत पाकिस्तानपर कुदृष्टि न डाले । एक ओर पाकिस्तानके प्रधानमन्त्री इमरान मोदीसे एक और अवसरकी मांग कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके विदेश मन्त्री भारतको आंखें दिखा रहे हैं ।

 

“भारतद्वारा शान्तिका प्रयास भी आत्महत्याके समान होगा; क्योंकि यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान सुधरनेवाला नहीं है । कलको वह पुनः आक्रमणकर ऐसी घटना करना चाहेगा, जैसाकि आजतक वह करता रहा है । अब पाकिस्तानको उसीकी भाषामें उत्तर देनेका उचित समय है । एक ओर पाकिस्तानी मन्त्री भारतको चेतावनी दे रहे हैं तो दूसरी ओर अवसर मांग रहे हैं, इससै सःपष्ट है कि वह क्षमा योग्य नहीं है । यदि अभी क्षमा दान दिया तो यह उन सैनिकोंका व उनकी मांका अपमान होगा और राजनीतिक इच्छा शक्तिका अभाव ही दिखाएगा । हम प्रतिदिन होनेवाले आक्रमण, जिसमें १-२-४० सैनिक वीरगतिको प्राप्त कर जाते हैं, इनमें अपने और सैनिकोंको खोनेकी स्थितिमें नहीं है ! ”-  सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।
© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution