अगस्त १०, २०१८
विपक्षकी मांगोंको स्वीकार करते हुए मन्त्रिमण्डलने ‘तीन तलाक विधेयक’में संशोधनोंको हरी झण्डी दे दी है । इन संशोधनोंके अनुसार ‘तीन तलाक’के आरोपी पतियोंको न केवल जमानत मिल सकेगी, बल्कि न्यायाधीशके समक्ष सन्धिका विकल्प भी खुला रहेगा ।
कानून मन्त्री रविशंकर प्रसादने संशोधनोंके पश्चात कांग्रेस नेता सोनिया गांधीसे राज्यसभामें इस विधेयकको पारित करानेमें सहायताकी आशा जताई । शुक्रवारको राज्य सभामेंं विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा । वहीं भाजपाने शुक्रवारको राज्यसभामें अपने सांसदोंकी उपस्थितिको लेकर अनुदेश (व्हिप) जारी किया है ।
ज्ञात है कि ‘तीन तलाक विधेयक’ लोकसभामें पहले ही पारित हो चुका है; लेकिन राज्यसभामें संख्या बलके कारण विपक्ष इसका विरोध कर रहा था । विपक्ष और विशेषतया कांग्रेस इसमें संशोधनोंकी मांग कर रहे थे । एनडीएकी स्थितिके कारण विपक्षी सदस्योंको मनानेके लिए विधेयकमें संशोधनकी आवश्यकता थी, जिसे मन्त्रिमण्डलने स्वीकृति दे दी ।
संशोधनोंमें विपक्षकी आपत्तियोंको समाहित करने का प्रयास किया गया है । इन संशोधनोंके अनुसार अब तीन तलाकके आरोपी पतिको जमानत मिल सकती है । मूल विधेयकमें यह गैर-जमानती अपराध था । अब न्यायाधीश जमानत दे सकता है । इसके साथ ही मूल विधेयकमें किसी निकटवर्तीको भी तीन तलाकके प्रकरणमें आरोपीके विरूद्ध पुलिसमें परिवाद करनेका अधिकार था; लेकिन अब इसे पत्नी या उसके रक्त सम्बन्धीतक सीमित कर दिया गया है । तीसरे संशोधनके अन्तर्गत तीन तलाकमें आपराधिक प्रक्रिया आरम्भ करनेके पूर्व सन्धिका विकल्प खोला गया है ।
इसके अन्तर्गत यदि पति-पत्नी दोनोंकी इच्छा हो तो न्यायाधीशके समक्ष आपसी सन्धिसे तीन तलाकको समाप्त करनेकी षन्धि कर सकते हैं । सन्धिके पश्चात आपराधिक कार्यवाही नहीं होगी । तीन तलाक विधेयकमें संशोधनोंकी सूचना देते हुए रविशंकर प्रसादने आशा की कि विपक्ष इसे राज्यसभामें पारित करानेमें सहयोग करेगा । संशोधनोंके साथ विधेयकके राज्यसभामें पारित होनेके पश्चात उसे पुनः लोकसभामें भेजना पडेगा । लोकसभामें इन संशोधनोंको स्वीकृति मिलनेके पश्चात ही विधेयकको नए संसदसे पारित माना जाएगा ।
स्रोत : दैनिक जागरण
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