
एक गुरु ने एक शिष्य को एक महामंत्र कान में बता दी और कहा यह अत्यंत शक्तिशाली मंत्र इसे जपने से तुम्हारा परम कल्याण निश्चित है परंतु इसे किसी को बताना मत अन्यथा तुम महापाप के भागी होगे | शिष्य अगले दिन मंदिर के शिखर पर चढ़ ज़ोर ज़ोर से सभी को महामंत्र जपने के लिए कह रहा था | बात उनके सद्गुरु तक पहुंची और वे शिष्य द्वारा किए गए उस अवज्ञा से क्रोधित हो गए और उन्हें डांटते हुए पूछा कि यह घोर अनर्थ क्यों किया ? शिष्य ने भोलेपन से कहा, “जिससे सब का परम कल्याण हो और यह बताने पर मुझे महापाप मिले ऐसे महापाप मैं बारंबार करना चाहूँगा ” श्रीगुरु उनके इस कथन को सुन उन्हें हृदय से लगा लिया ! जानते हैं वे महापुरुष कौन थे – वे थे महान संत रामानुजाचार्य !
सीख : श्रीगुरु से सीखे सुवचन को अकर्ता बन समाज तक निस्वार्थ भाव से पहुंचाने वाले पर गुरु की अवकृपा कभी हो ही नहीं सकती !!-तनुजा ठाकुर
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