आयुर्वेद

घरका वैद्य – स्वर चिकित्सा (भाग-२)


दांए नथुनेसे निकलनेवाली सांस पिंगला है । इस स्वरको सूर्य स्वर कहा जाता है । यह उष्ण (गर्म) होती है । जबकि बाईं ओरसे निकलनेवाले स्वरको ‘इडा’ नाडीका स्वर कहा जाता है । इसका सम्बन्ध चन्द्रसे है और यह स्वर ठण्डा होता है ।   रावण संहितामें स्वर विज्ञानके सम्बन्धमें बृहद जानकारी दी गई है […]

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घरका वैद्य – स्वर चिकित्सा (भाग-१)


एक शास्त्र वचन अनुसार, ‘कायानगर मध्ये तु मारुत क्षिति पालक’ अर्थात देहरूपी नगरमें वायु राजाके समान है । शरीरद्वारा वायु ग्रहण करनेका नाम ‘निःश्वास’ और वायु त्यागनेका नाम ‘प्रश्वास’ है । जीवके जन्मसे मृत्युतक ये दोनों क्रियाएं निरन्तर चलती रहती हैं । कभी यह बाईं ओरसे चलती है, कभी दाईं ओरसे तो कभी दोनों ही […]

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घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-८)


ठण्डे जलके बाह्य प्रयोग ठण्डे जलके बाह्य व आन्तरिक प्रयोगोंके विषयमें जाननेसे पूर्व, ठण्डे जलका हमारे शरीरपर क्या प्रभाव होता है ?, यह जान लेना अति आवश्यक है ।      किसी व्यक्तिके शरीरपर यदि एक द्रोणी (बाल्टी) ठण्डा पानी उंडेल दिया जाए तो सर्वप्रथम उसको अपने भीतर एक प्रकारका धक्कासा लगता प्रतीत होगा, जिससे […]

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घरका वैद्य – जलतत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-७)


ठण्‍डे जलसे स्‍नानका चिकित्‍सकीय लाभ जलके अनेक नाम हैं, जैसे पानीय, सलिल, नीर, कीकाल, जल, अम्‍बु, आप, वारी, वारिक, तोय, पय, पाथ, उदक, जीवन, वन, अम्‍भ, अर्ण, अमृत और धन, रस आदि । इन नामोंमें जलका नाम जीवन अमृत होना इस बातकी ओर सङ्केत करता है कि प्राणियोंका जीवन धारण करना जलपर ही अवलम्बित है […]

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घरका वैद्य – जलतत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-६)


इस जलको पीनेसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं –
१. शीघ्र घावको भरना सम्भव : इसमें ज्वर प्रतिरोधी (एंटी वायरल), विषाणु प्रतिरोधी (एंटी बैक्टीरियल) और सङ्क्रमण प्रतिरोधी (एंटी इन्फ्लेमेन्ट्री) गुण पाए जाते हैं ……

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घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-५)


पिछले अंकमें हम जल तत्त्वके विषयमें आवश्यक जानकारी प्राप्त कर ही चुके हैं, इस अंकमें हम इस ताम्र जलको ग्रहण करनेसे स्वास्थ्य लाभके साथ ही कुछ रोगोंके निवारणमें कैसे सहायता मिल सकती है ?, यह जानेंगे ……

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घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-४)


जल हमारे शरीरको सींचता है; इसलिए मनुष्यको प्रतिदिन अपने शरीरके भार अनुसार ३ से पांच लीटर जल पीना आवश्यक होता है । जलमें ऐसे कितने ही रासायनिक तत्त्व पाए जाते हैं, जिनसे शरीरको पर्याप्त पोषण मिलता है । शरीरके भीतरके अनेक विकार इस पानीके साथ ही ……

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घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-३)


इस सृष्टि क्रममें ध्यान देने योग्य बात यह है कि ये शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध नामक तन्मात्राएं आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वीकी क्रमशः ‘गुण’ मात्र हैं, इनमें कोई विशेष भाव नहीं है और इनका सुख-दुख तथा मोह रूपसे अनुभव नहीं ……

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घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-२)


जल तत्त्वकी उत्पत्ति : ‘जल’की उत्पत्ति कैसे हुई ?, इस प्रश्नके उत्तरके लिए हमें ‘पुराणों’का आधार लेना होगा । पुराणोंका इसलिए; क्योंकि ‘पुराण’ ही वे ग्रन्थ हैं, जिनमें जगतके सृष्टि-विषयक प्रश्नपर विशद रूपसे विचार किया गया है । प्रायः सभी पुराण इस मतपर …….

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घरका वैद्य – जल तत्त्वद्वारा प्राकृतिक चिकित्सा (भाग-१)


पंचतत्त्वको ब्रह्माण्डमें व्याप्त स्थूल एवं सूक्ष्म वस्तुओंका प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष कारण और परिणति माना गया है । सांख्यशास्त्रमें, प्रकृति इन्ही पंचभूतोंसे बनी है, ऐसा माना गया है । ब्रह्माण्डमें प्रकृतिसे उत्पन्न सभी वस्तुओंमें पंचतत्त्वकी भिन्न मात्रा उपस्थित ……

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