आयुर्वेद

आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – १९)


सेंधा नमक (अंग्रेजी नाम – Rock salt, संस्कृत नाम – सैंधवा, शीतशिवा, अन्य नाम – सैन्धव नमक, लाहौरी नमक) एक प्रकारका खनिज नमक (रॉक साल्ट) है, जो पाकिस्तानके पंजाब प्रान्तके झेलम जनपदके खेवरा खानोंसे (माइंससे)…….

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – १८)


आलू (संस्कृत नाम – आलुः, सुकन्दः, अंग्रेजी नाम – Potato) एक प्रकारका शाक है, जो भूमिके नीचे उत्पन्न होता है । यह प्रत्येक घरमें प्रयोग होनेवाला शाक है । अपने स्वास्थ्य लाभके कारण यह समूचे विश्वमें एक प्रमुख आहारके रूपमें…..

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आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – १७)


आलू लोगोंमें बहुत लोकप्रिय है, ऐसे ही आप सबने एक नाम और सुना होगा, जो सबको खानेमें अत्यधिक रुचिकर लगता है और उसका नाम है, शकरकन्द (अंग्रेजी नाम : Sweet Potato; संस्कृत नाम : मिष्टालुकम्) । शकरकन्द अपने स्वादके कारण……

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १७)


शलजम (गृञ्जनः, Turnip) शीत ऋतुका एक शाक (सब्जी) है, जिसमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रचुर मात्रामें है । शलजम एक श्वेत (सफेद) कन्दमूल शाक है, जो मानव उपभोग और पशुओंके भोजनके लिए विश्व स्तरपर लोकप्रिय है……

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १५)


सरसोंके (mustard, सर्षप) पत्ते भारतमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरातमें होने वाली अति पौष्टिक शाक (सब्जी) है । नवम्बरसे मार्च तक ये सरलतासे मिल जाते हैं…….

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १४)


पालक (पालक्या, Spinach) शीतऋतुमें उत्पन्न होता है तथा पालेको सहन कर सकता है;  किन्तु अधिक उष्णता नहीं सह सकता है । इसमें जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाकमें (सब्जीमें) नहीं होते हैं । यही कारण है……

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १३)


गाजर (गुञ्जनम्, Carrot), प्रकृतिकी बहुत ही बहुमूल्य देन है, जो शक्तिका भण्डार है । गाजर फल भी है और शाक (सब्जी) भी तथा इसकी उपज पूरे भारतवर्षमें की जाती है । मूलीकी भांति गाजर भी भूमिके भीतर ही उत्पन्न होती है…..

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १२)


चुकन्दर (पालङ्गशाकः, Beetroot) एक मूसला जडवाली वनस्पति है । यह ‘बीटा वल्गैरिस’ नामक जातिके पौधे होते हैं, जिन्हें मनुष्योंने शताब्दियोंसे कृषिमें उत्पन्न किया है । यह एक ऐसा शाक है, जो भारतके लगभग प्रत्येक राज्यमें मिलता है……

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ११)


बथुआको (Bathua, चाकवत) विशेष रूपसे खरपतवारके रूपमें जानते हैं, और हममेंसे बहुतसे लोग बथुआके लाभ जाने बिना ही इसे नष्‍ट भी कर देते हैं ! सम्भवतः उन लोगोंको यह नहीं ज्ञात है कि बथुआ बहुतसे स्‍वास्‍थ्‍य लाभोंसे……

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आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १०)


मूली (दीर्घकन्द, Raddish), भूमिके भीतर उत्पन्न होने वाली सब्जी है । वस्तुतः यह एक रूपांतरित प्रधान जड है, जो पूरे विश्वमें उगाई एवं खाई जाती है । मूलीका उपयोग भोजन और औषधि दोनों रूपमें किया जाता है । मूलीके साथ-साथ……

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