अनिष्ट शक्ति

दूसरोंद्वारा प्रयोगमें लाए इन वस्तुओंका प्रयोग कदापि न करें !


जिसप्रकार किसी औरके वस्त्र पहननेसे, हाथ मिलानेसे (हैण्ड शेक करनेसे) या किसीका जूठन खानेसे हमें अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट हो सकता है, वैसे ही किसीका ब्रुश (दांत मांजनेवाला) जिभिया(जीव स्वच्छ करनेवाला) तौलिया, कंघा……..

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अनुचित कृत्य ही अनिष्ट शक्तियोंके कष्टका कारण है


मैकाले शिक्षित कुछ हिन्दू प्रतिदिन हनुमान चालीसा रटते हैं; मार्कण्डेय ऋषि रचित दुर्गा सप्तशतीके कुछ अंशोंका पाठ करते हैं; किन्तु यदि किसी लेखमें असुरों, भूत-प्रेतोंसे (अनिष्ट शक्तियोंसे) रक्षण हेतु धर्मशिक्षण अन्तर्गत कुछ तथ्य बताया जाए तो शुतुरमुर्ग समान अपनी सब इन्द्रियोंको बंद कर लेते हैं….

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लोगोंको शिक्षा देने हेतु ईश्वरकी विचित्र लीला


एक पाठकने वर्ष २०१२ में ‘फेसबुक’पर मेरे किसी लेखपर प्रतिक्रया देते हुए लिखा, “भूत-प्रेत नहीं होते हैं, आपलोगोंको ऐसी बातें बताकर कर दिशाहीन कर रही हैं और समाजमें अन्धविश्वास फैला रही हैं ।”  मैं ऐसे लोगोंसे कुतर्क नहीं करती, सीधे उन्हें प्रतिबन्धित (ब्लॉक) कर देती हूं; क्योंकि महाविनाशका काल आनेवाला है; अतः जो सुनना और सीखना […]

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निधर्मी लोकतन्त्रकी प्रशासनिक व्यवस्थामें आध्यात्मिक कष्टपर किए जाते हैं, हास्यास्पद एवं सतही उपाय !


धर्मप्रसारके मध्य सम्पूर्ण भारतमें चार चक्रिका (पहिया) वाहनद्वारा यात्रा करते समय अनेक बार मार्गपर मैंने ‘दुर्घटना आशंकित (एक्सीडेण्ट प्रोन) क्षेत्र, कृपया धीरे चलें’, ऐसा लिखा हुआ पाया है । जिज्ञासावश जब मैं स्थानीय वाहन चालकोंसे पूछती हूं कि क्या ऐसा लिखनेसे यहां दुर्घटना नहीं होती हैं ? तो वे कहते हैं, “नहीं, ऐसा लिखनेपर भी […]

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अनिष्ट शक्तियां क्या होती हैं ?


ईश्वरने सृष्टिकी रचनाके साथ ही दो शक्तियों, दैवी और आसुरी शक्तियोंका निर्माण किया, जिनमें पहली है, इष्टकारी शक्ति या कल्याणकारी शक्ति और दूसरी है, अनिष्टकारी शक्ति अर्थात विनाशकारी शक्ति । जब किसी दुर्जनकी मृत्यु हो जाए और उसका क्रिया-कर्म वैदिक रीतिसे न हुआ हो, या उसके कर्मानुसार उसे गति न मिले, तो वे अनिष्ट शक्तियोंके […]

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साधनाके कारण कभी कष्ट नहीं बढते हैं !


अनेक साधक कहते हैं कि साधना करनेसे मेरे कष्ट बढ गए हैं; परन्तु ऐसा नहीं होता है । नामजप करनेसे, सेवा करनेसे, त्याग करनेसे असीम आनन्दकी प्राप्ति होती है….

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