समाजको वासनाकी ओर प्रवृत्त करनेवाली आजकी पत्रकारिताका अब निषेध करनेका समय आ चुका है ! जब भी कभी सामायिक विषयोंसे सम्बन्धित समाचार पढने हेतु ऑनलाइन समाचारपत्रोंका अवलोकन करती हूं तो कुछ वृत्तपत्रोंमें वृत्त-शीर्षकमें ही अश्लील वृत्त एवं उससे संलग्न छायाचित्रोंको देखकर मन खिन्न हो जाता है, विशेषकर कुछ समाचारपत्र तो अपनी मर्यादाकी सभी सीमाएं लांघ […]
कुछ दिवस पूर्व मेरी एक साधककी मित्र मण्डलीके साथ एक दुर्जन प्रवृत्तिके नेतासे भेंट हुई ! बात ही बातमें वे कहने लगे, “कलियुगमें थोडे ही ईश्वर नरसिंह भगवानके समान प्रकट होकर किसी दुष्टका वध करेंगे !” मैंने कहा, “यह आपने अच्छी बात कही है; इसलिए कलियुगमें दुर्जनोंने दुर्जन रूपी शत्रु अपने मृत्युदाताके रूपमें स्वयं जीवित […]
जैसे मेढककी टर्टरानेकी गूंज बरसातमें सुनाई देती है, वैसे ही चुनाव आनेपर भी चारों ओर नेतागण अपना मायाजाल फेंकने लगते हैं ! एक राजनेताका, जिसे मैं जानती नहीं हूं, मेरे पास पत्र आया था, मैं फलां-फलां राज्यमें अनेक स्थानपर आपका प्रवचन……
एक कहावत है, ‘चार दिनकी चांदनी, पुनः वही अंधेरी रात’ ! हम भारतीयोंका राष्ट्र प्रेम इस कहावतको चरितार्थ करता है ! मात्र स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवसपर हमारा राष्ट्र प्रेम उद्वेलित होता है, शेष दिन हम सब राष्ट्रको खोखला करनेके लिए प्रयत्नरत रहते हैं ! कोई भ्रष्टाचार करता है, तो कोई उसका मूक रूपसे सहमतिदार […]
कुछ दिवस पूर्व समाचार प्रकाशित हुआ था कि सेनामें अनेक पद रिक्त हैं । जिस देशमें इतने युवक वृत्तिहीनतासे (बेरोजगारीसे) व्यथित हों, उस देशमें ऐसा होना किस बातका दर्शक है ?, इस विषयमें शासक वर्ग थोडा चिन्तन करे ! आए दिन हमारे सैनिक नक्सलियों एवं आतंकियोंके हाथों हुतात्मा होते रहते हैं, ऐसेमें ऐसी रणनीतिकी आवश्यकता […]
उत्तर प्रदेशके योगी आदित्यनाथके सत्प्रयासोंकी अधिकांश हिन्दू भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं, इससे ही समझमें आता है कि हिन्दुओंको अपने राज्यकर्ताओंसे किसप्रकारकी अपेक्षाएं हैं एवं प्रखर हिन्दुत्ववादी नेताके सत्तापक्षमें आनेसे हिन्दू राष्ट्रका आगमन कैसे हो जाएगा ?, इसकी कुछ झलकियां योगीजी दे रहे हैं, हम उनकेद्वारा हिन्दुत्वके संरक्षण हेतु उठाए गए प्रयासोंका अभिनन्दन करते हैं […]
प्रजारक्षण हेतु आगामी भीषणकालकी पूर्व सिद्धता करनेकी अपेक्षा अपने राजपाट बचानेमें लिप्त हैं आजके राजनेता अनेक सन्त बार-बार भावी विनाशकालकी भविष्यवाणी कर रहे हैं, ऐसेमें यदि हमारे राज्यकर्ताओंमें साधकत्व एवं प्रजाके प्रति पितृतुल्य स्नेह होता तो वे ऐसे द्रष्टा सन्तोंके चरणोंमें नतमस्तक होकर आगामी भीषणकालकी पूर्व सिद्धता हेतु प्रयास करते; किन्तु धर्म और साधनासे विमुख […]
देहलीके वायु प्रदूषणने एक नूतन चर्चाको जन्म दिया है; परन्तु प्रदूषण केवल राष्ट्रीय राजधानी परिक्षेत्रमें (NCR) ही है, ऐसा नहीं है; अपितु सम्पूर्ण विश्वमें यह एक बडी समस्या है और संसारके सभी प्राणी इससे……
यदि स्वतन्त्रताके समय ही आरक्षण जैसे विधानका आरम्भ नहीं किया गया होता तो आज देशकी आरक्षणके कारण यह दुर्दशा नहीं होती । समाजमें व्यक्तिको ‘पद’ सदैव उसके गुण और प्रतिभाके आधारपर मिलना चाहिए, न कि जन्मके आधारपर; हिन्दू राष्ट्रमें कहीं भी और किसी भी क्षेत्रमें कोई आरक्षण नहीं होगा । हमारे धर्म और संस्कृतिमें सदैव […]
किसी भी देशका कठोरसे कठोर विधान (कानून) भी वहांकी प्रजाको अधर्म करनेसे नहीं रोक सकता है; मात्र और मात्र धर्मनिष्ठ प्रजा ही अपराधसे दूर रहती है; अतः प्रजाको धर्मनिष्ठ करना, अपराधोंको न्यून करनेका सर्वाधिक स्थायी उपाय है, जो इस देशके निधर्मी शासनकर्ताओंकी तामसिक बुद्धिको आजतक समझमें नहीं आया है ।