मन्दिरके पुजारियोंने ‘यह मेरी व्यष्टि तथा समष्टि साधना है’, ऐसा दृष्टिकोण रख साधना की तो उनकी वैयक्तिक आध्यात्मिक उन्नति होगी तथा हिन्दुओंको भी धर्मशिक्षण मिलनेमें सहायता होगी । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
जिसे स्वयंका परिवार भी ठीक प्रकारसे चलाना नहीं आता, ऐसे राष्ट्र चलानेमें अक्षम प्रत्याशियोंको (उम्मीद्वारोंको) भारतकी जनता चुनकर लाती है ! इससे भारत रसातलको गया है ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
१. व्यष्टि साधना : इस साधनामें मौन उपयुक्त होता है । २. समष्टि साधना : इस साधनामें अन्योंसे सम्पर्क होनेसे मौन सम्भव नहीं होता ।
स्थूल अर्थात देह तथा वस्तु, इनसे किए गए तात्कालिक प्रदूषणसे सूक्ष्मसे किया गया अर्थात मन एवं बुद्धिसे किया गया प्रदूषण अनेक गुणा एवं अधिक कालतक हानिकारक होता है, यह ध्यान रखें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
‘भक्तोंके पास ही मंदिर होने चाहिए, तभी भगवानकी सेवा भावपूर्ण होगी । सरकारीकरणके कारण मन्दिरमें भगवानकी सेवा भावपूर्ण नहीं होती और सरकारमें चल रहा भ्रष्टाचार मंदिरमें भी होता है । इससे भगवान मंदिरसे चले जाएंगे और भक्तोंको मंदिरमें जानेका लाभ नहीं होगा ।’ – *परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था*
यज्ञका विरोध करनेवालों, यह ध्यान रखो ! : ‘बुद्धिवादी लोग यज्ञमें आहुति दी जानेवाली वस्तुओंके सन्दर्भमें कहते हैं, ‘इन वस्तुओंको यज्ञमें क्यों जलाना ?’, यह तो उसी समान हुआ, ‘इंजेक्शन देकर किसीको वेदना क्यों देना ?’ जैसा लाभ इंजेक्शनसे होता है, वैसा ही यज्ञमें आहुति देनेसे होता है, यह अध्ययनके अभाववश उन्हें समझमें नहीं आता […]
गायोंकी हत्या हो तो गंगा प्रदूषण रोकने हेतु कार्यरत व्यक्तियोंको इससे कोई लेना-देना नहीं होता तथा गंगा प्रदूषण रोकनेवाले कार्यकर्ताओंपर पुलिस लाठियां चलाए तो, गोरक्षकोंको इससे कोई लेना-देना नहीं होता ! ‘हिन्दुओंके सभी प्रश्न मेरे ही हैं’, जब प्रत्येक व्यक्तिको ऐसा लगने लगेगा, तभी हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाकी दिशामें हिन्दू अग्रसर होंगे । – परात्पर गुरु […]
कलियुगन्तार्गत कलियुग अब वृद्ध हो गया है । अब वह नष्ट होकर कलियुगान्तार्गत सत्ययुग आनेवाला है, अर्थात हिन्दू राष्ट्र स्थापित होनेवाला है ।
जो चिकित्सक नहीं, वह औषधि नहीं दे सकता । जो अधिवक्ता नहीं, वह न्यायालयमें वाद-परिवाद नहीं कर सकता । ऐसा होते हुए भी राष्ट्र तथा धर्ममें अज्ञानी तथा इस सम्बन्धमें कुछ न करनेवाली जनता, राज्यकर्ताओंका चयन करती है, यह मूर्खताकी पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है ? – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन […]
बुद्धिवादियोंका यह कहना कि ‘संत जो कहते हैं, वह सब झूठ है’, बिलकुल वैसा ही है जैसे कोई छोटा बच्चा किसी विषयमें ‘डॉक्टरेट’ किए हुए व्यक्तिसे कहे, ‘तुम जो कहते हो, वह सब झूठ है !’ – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक सनातन संस्था