१. हिन्दू एकपत्नीव्रतका आदर्श मानते हैं । २. ईसाई व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके नामपर स्वेच्छाचार करते हैं । ३. मुसलमान चार पत्नियां रख सकते हैं । ‘मुसलमान बादशाहों’के हरममें (अनैतिक रनिवासमें) सैकडों स्त्रियां होती थीं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
व्यक्तिगत ग्रहोंके माध्यमसे व्यक्तिका कालमहात्म्य ज्ञात होता है, तो मेदनीय ज्योतिष तथा संख्याशास्त्र आदिसे समष्टिका कालमाहात्म्य ज्ञात होता है, उदा. भारतका भविष्य देखने हेतु देशका नाम, यह कब स्वतन्त्र हुआ, वह कुण्डली; किसी संस्थाका भविष्य देखने हेतु संस्थाकी स्थापना होनेके समयकी कुण्डली, संस्थाका नाम, संस्था प्रमुखका नाम तथा उसकी कुण्डली; किसी कुटुम्बका भविष्य देखने हेतु […]
कहां मराठी भाषाको राजभाषाका स्थान देनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज, तो कहां मराठी पाठशालाओंमें उर्दू भाषाकी शिक्षा देकर मुसलमानोंका तुष्टीकरण करनेवाले वर्तमान राज्यकर्ता ! सनातनद्वारा किए गए संशोधनके अनुसार संस्कृत भाषा सर्वाधिक सात्त्विक है । सात्त्विकतामें उसके पश्चात् क्रमानुसार मराठी तथा हिन्दी भाषा है । अंग्रेजी और उर्दू भाषाओंमें सात्त्विकता नहीं है । ऐसा होते हुए […]
पूर्वके कालमें ‘बुद्धिको समझ आता है, वही सत्य है’ इस वृत्तिके समाज तथा न्यायाधीश इत्यादि न होनेके कारण ‘हनुमानजी एक उडानमें श्रीलंका पहुंच गए,’ इसके अनुसार रामायण, साथ ही महाभारत तथा विविध पुराणोंकी ऐतिहासिक कथा, उसकेही अनुसार ‘ज्ञानेश्वर महाराजने भैंसेके मुखसे वेद बुलवाया’ इत्यादि इतिहास बतानेवालोंको दण्ड नहीं दिया गया । अब’ बुद्धिके परे कुछ […]
‘राज्यकर्ता सात्त्विक हो, तो ही वह प्रजाको भी सात्त्विक बनाकर रामराज्य स्थापित कर सकता है । प्रजा सात्त्विक हो, तो ही वह सात्त्विक व्यक्तिको चुनेगी; किन्तु आजकल राजनीतिज्ञोंद्वारा धर्मशिक्षा न दिए जानेके कारण प्रजा सात्त्विक नहीं है; इस कारण प्रजा चुनकर दे रहे जात्यन्ध, भ्रष्ट, गुंडे और धर्मद्रोही मनोवृत्तिके जनप्रतिनिधियोंके कारण लोकतन्त्र निरर्थक ही नहीं, […]
चीनने भारतपर आक्रमण किया, तो उसे यहांके नक्सलवादी और साम्यवादी सहायता करेंगे । पाकिस्तानने भारतपर आक्रमण किया, तो उसे यहांके जिहादी सहायता करेंगे; परन्तु भारतके हिन्दुओंकी सहायता देवताओंके अतिरिक्त कौन करेगा ? इसलिए हिन्दुओ, देवताओंसे सहायता मिलनेके लिए साधना करो !
आरक्षणकी मांग कर विविध सम्प्रदायोंके अल्पसंख्यकोंको अधोगतिके मार्गपर ले जानेवाले राजनीतिक पक्ष एवं संगठन ! आरक्षण स्वार्थ सिखाता है, इसके विपरीत हिन्दू धर्म त्याग सिखाता है । स्वार्थसे नहीं अपितु त्यागसे आनन्दकी प्राप्ति होती है । सर्वस्वका त्याग करनेपर ही ईश्वरसे एकरूपता साध्य होती है । इस सच्चिदानन्दावस्थाका आरक्षणवालोंको अनुभव नहीं हो सकता ।
विद्यालयके तथा महाविद्यालयके विद्यार्थियोंको व्यक्तिस्वातन्त्र्यके नामपर किसी भी प्रकारके आचरण करनेकी सम्मति नहीं दी जाती, उसीप्रकार अपराधियोंको अपराध करनेके लिए, मार्गपर जैसे चाहें वैसे वाहन चलानेका व्यक्तिस्वातन्त्र्य नहीं होता । जो वैद्य न हो, उसे औषधि देनेकी सम्मति नहीं होती । इसका अर्थ यह कि समाजके सभी क्षेत्रोंमें व्यक्तिस्वातन्त्र्यकी सम्मति नहीं होती । ऐसा होनेपर […]
हिन्दू धर्म तथा भारतके सन्दर्भमें अनभिज्ञ लोग, धर्मद्रोही एवं राष्ट्रद्रोही होते हैं और उनके समान ही अज्ञानी व्यक्ति उनके सामने नतमस्तक होते हैं !
स्वातन्त्र्योत्तर कालमें अर्थात् पिछले ६६ वर्षोंमें स्वभाषा, हिन्दू संस्कृति, हिन्दू धर्म इत्यादि विषयोंपर बालकोंपर संस्कार न हों तथा बडोंके संस्कार नष्ट हों, इस हेतु सभी राजकीय पक्षोंने प्रबल प्रयत्न किए हैं । इस कारण अनेक बालकोंको अपनी मातृभाषा भी ठीक प्रकारसे नहीं आती । इतना ही नहीं, मातृभाषाके स्थानपर अंग्रेजी आती है, इसका उन्हें अभिमान […]