आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने । जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्र्यं दोष नाशते । अकालमृत्यु हरणं सर्वव्याधि विनाशनम् । सूर्यपादोदकं तीर्थं जठरे धारयाम्यहम् ।। अर्थ : जो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं उनके सहस्र जन्मोंके दारिद्र्य दोष कट जाते हैं , हम सूर्यके चरणामृत मुखमें लेते हैं तो अकाल मृत्यु टल जाते हैं एवं सारी व्याधियोंका नाश […]
असितगिरिसमस्यात् कज्जलं सिंधूपात्रे सुरतरुवरशाखा लेखनी पत्रमूर्वी । लिखति यदि गृहित्वा शारदा सर्वकालं तदपि तव गुणानामीश पारं न याति ।। अर्थ : काजलकी एक पर्वत लेकर उसे महासागर रूपी पात्रमें उसे डाल कर , देवत्व वालेवृक्षकी एक शाखाको लेखनीके रूपमें लेकर, इस धराको पृष्ठ या कागद मान मां शारदाको सतत सर्वकाल लिखने दें तो भी हे […]
गंगां वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतं । त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु मां ।। अर्थ : गंगाका जल , जो मनोहारी है, विष्णुके श्रीचरणोंसे जिनका जन्म हुआ है, जो त्रिपुरारीकी शीशपर विराजित हैं, जो पापहारिणी हैं , हे मां तू मुझे शुद्ध कर !
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ।। अर्थ :- भक्तके हृदयमें वास करनेवाले गौरी पुत्र विनायकको वंदन करनेके पश्चात्, दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं सर्व इच्छा पूर्ति हेतु उनका अखण्ड स्मरण करना चाहिए !
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥ अर्थ : आप ही माता हैं , आप ही पिता हैं , आप ही बंधु हैं और आप ही सखा हैं आप ही विद्या है और आप ही धन हैं , हे देव आप मेरे […]
सुबह स्नान करने के पश्चात सूर्य देवता को अर्घ्य इन मंत्रों का उच्चारण कर दें: ॐ मित्राय नमः ॐ रवये नमः ॐ सूर्याय नमः ॐ भानवे नमः ॐ खगाय नमः ॐ पूष्णे नमः ॐ हिरण्यगर्भाय नमः ॐ मरीचये नमः ॐ आदित्याय नमः ॐ सवित्रे नमः ॐ अर्काय नमः ॐ भास्कराय नमः ॐ श्रीसवीतृ-सूर्यनारायणाय नमः ॐ […]
जब हमारे घरमें किसी संतका या जिनसे हमने गुरुमंत्र लिया है उनका पदार्पण हो तो निम्नलिखित गुरु स्तुति करते हुए उनके मनः पूर्वक आरती उतारें एवं चरणोंका पाद्य पूजन करें ! गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ***** ध्यान मूलं गुरु मूर्ति पूजा मूलं गुरु पद्म । मंत्र मूलं […]
नमोऽस्त्वनन्ताय सहस्रमूर्तये सहस्रपादाक्षिशिरोरुबाहवे । सहस्रनाम्ने पुरुषाय शाश्वते सहस्रकोटी युगधारिणे नमः ।। अर्थ : उन्हें (विष्णुको) वंदन करते हैं जिनके सहस्र रूप हैं, सहस्र नेत्र हैं , सहस्र सिर , चरण और बाहू हैं । उन सनातन (शाश्वत ) पुरुषको नमन करते हैं जिनके सहस्र नाम हैं और जिन्होंने इस सृष्टिको सहस्र कोटि युगोंसे धारण किया […]
श्रीराम सीतावर राघवेति हे कौशलेशात्मजनायकेति । श्रीराम जयराम जय जय दयालु श्रीराम जय राम जय जय कृपालु ।। अर्थ: हे, रघुकुल नन्दन, प्रभु श्री राम, जिनका वरण माता सीताने किया, हे कौशल्या पुत्र, आपकी जय हो ! हे दयानिधान आपकी जय हो ! हे कृपालु प्रभु श्री राम आपकी जय हो !
नमामि नारायण पादपंकजं करोमि नारायण पूजनं सदा । जपामि नारायण नाम निर्मलं स्मरामि नारायण तत्त्वमव्ययम् ।। अर्थ : हे श्रीमन् नारायण ! आपके चरणकमलोंका वन्दन करता हूं, उनका सदैव पूजन करता हूं । आपके निर्मल नामका सुमिरन करता हूं और आपके शाश्वत तत्त्वका स्मरण करता हूं ।