शंका समाधान

शंका समाधान – दोषोंकी तीव्रता न्यून नहीं हो रही हो तो क्या करना चाहिए ?

मैं पिछले एक माहसे एक दोषको न्यून हेतु स्वयंसूचना दे रहा हूं; किन्तु उसकी तीव्रता न्यून नहीं हो रही है ऐसेमें मुझे क्या करना चाहिए एवं मेरे दोष न्यून क्यों नहीं हो रहे हैं ? - यशपाल शर्मा, देहली


स्वयंसूचना देनेकी पद्धति भी योग्य होनी चाहिए अर्थात स्वयंसूचना देते समय मनका शान्त व स्थिर होना आवश्यक होता है । इस हेतु एक शान्त स्थानमें सुखासनमें बैठकर कुछ क्षण नामजप करके मनको एकाग्र करना चाहिए, उसके पश्चात एक स्वयंसूचनाको …..

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शंका समाधान – बच्चोंने श्री गुरुदेव दत्तका जप करते समय ॐ लगाना चाहिए या नहीं ?

हम आपके संस्थाद्वारा प्रसारित श्रव्य बालसंस्कारवर्गके नियमित श्रोता है ! यह हमारे बच्चोंके अतिरिक्त हमें भी बहुत अच्छा एवं ज्ञानवर्धक लगता है ! मैं यह पूछना चाहती हूं कि जैसा कि बालसंस्कारके वर्गमें बताया गया है कि बच्चोंने भी नियमित १५ मिनिटका दत्तात्रेय देवताका जप करना चाहिए तो मैं यह जानना चाहती हूं कि बच्चोंने श्री गुरुदेव दत्तका जप करते समय ॐ लगाना चाहिए या नहीं ? – एक शुभचिंतक श्रोता


बच्चोंने दो स्थितिमें श्री गुरुदेव दत्तके जपमें ॐ लगा सकते हैं ! एक यदि उन्हें अनिष्ट शक्तियोंका तीव्र कष्ट हो तो वे ‘श्री गुरुदेव दत्त’के जपमें ॐ लगाकर जाप कर सकते हैं | बच्चोंको तीव्र कष्टके कुछ उदाहरण इसप्रकार हैं …..

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शंका समाधान – क्या मैं वाहन चलाते समय ‘श्रीगुरु देव दत्त’का जप कर सकता हूं ?

क्या मैं वाहन चलाते समय 'श्रीगुरु देव दत्त'का जप कर सकता हूं ? - तेजस प्रजापति, वडोदरा, गुजरात


   आप निश्चित ही ‘श्रीगुरुदेव दत्त’का जप वाहन चलाते समय कर सकते हैं । वाहन चलाते समय ही क्यों ?, आप कभी भी यह नामजप कर सकते हैं, जैसे दन्तधावन या भ्रमण करते समय, भोजन बनाते या खाते समय, स्नान करते समय या अन्य कोई भी शारीरिक श्रमवाले कार्य करते समय आप यह नामजप कर […]

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शंका समाधान – बहुत अधिक संख्यामें लाल चिंटीयोंका निवास होनेपर क्या करें ?

मेरे वडोदरा निवासके परिसरमें वर्षोंसे बहुत अधिक संख्यामें लाल चिंटीयोंका निवास है । उन्हें मारना नहीं है। कई प्राकृतिक उपाय किए जैसे कि आटा, आटा-नमक, हल्दी ! उसी परिसारमें देशी गीर गौमाताएं (मां-बेटी) भी रहीं । उनका भरपूर मुत्र भी भूमिमें गया है और उनका गोमय भी मिट्टीमें मिला है । साथ ही घरमें चिडचिडापन, सिरकी वेदना, दुर्बलता, उर्जाकी न्यूनता रहती है । कृपया कोई उपाय बताएं कि ये चींटियां सस्नेह यहांसे चली जाएं । - रोहित पारेख, वडोदरा


रोहितजी मैं यही तो सभी गोभाक्तोंसे कहती हूं कि प्रत्येक समस्याका समाधान गौमातासे नहीं हो सकता है ! उनकी भी अपनी मर्यादा है ! यदि सब कुछ उनसे साध्य हो जाता तो ईश्वर इस ब्रह्माण्डमें देवी-देवताओंका निर्माण ही नहीं करते | मैं जानती हूं कि आप हिंदुत्वनिष्ठ है और गौ भक्त भी ! तो सर्वप्रथम […]

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शंका समाधान – जपको सांसके साथ जोडकर कर सकते हैं क्या ?

मेरी एक शंकाका कृपया समाधान करें | जब भी मैं सांसके साथ जोडकर जप करता हूं तो मेरा ध्यान जपसे हटकर सांसपर चला जाता है और उसका पश्चात जप नहीं हो पाता है एवं सांसपर मन केन्द्रित हो जाता है, ऐसी स्थितिमें क्या मैं जपको सांसके साथ जोडकर न करूं क्या ?


सर्वप्रथम यह जान लें कि कोई भी साधना मार्गका अवलंबन साधक अपने मनको एकाग्र करने हेतु करते हैं ! और मनका एकाग्र होना अर्थात मनका निर्विचार होना ही है वह जितनी अधिक समय उस स्थितिमें रहता है वह साधनाकी दृष्टिसे उतना ही उत्तम होता है | सांसके साथ नामजप जोडकर करनेका उद्देश्य यही होता है […]

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आराध्यदेव किस देवताको मानें ?

अपनी उपास्य देवता हम निर्धारित करते हैं या गुरु निर्धारीत करते हैं, कृपया बतानेकी कृपा करें और सारे देवताओंमें किसे आराध्यदेव मानें ? – दीपाली गोंडाजे, सांगली, महाराष्ट्र


अध्यात्ममें मनानुसार साधनाको अंश मात्र भी महत्व नहीं है ! ईश्वर हमें उसी कुलमें जन्म देते हैं जिस कुलमें जन्म लेकर उस कुलकी कुलदेवताकी उपासना करके सर्वाधिक प्रगति कर सकते हैं ! हम सबके सूक्ष्म पिण्डमें जिस घटककी न्यूनता होती है, उसीकी साधना करनेसे हमारी शीघ्र आध्यात्मिक प्रगति होती है इसलिए हमें उसी कुलमें जन्म […]

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शंका समाधान – एक व्यक्तिने पूछा है कि हम और आप सब मैकालेकी शिक्षण पद्धतिसे ही शिक्षित हुए हैं तो भी आप उसे आसुरी शिक्ष्ण पद्धति क्यों कहती हैं ?

एक व्यक्तिने पूछा है कि हम और आप सब मैकालेकी शिक्षण पद्धतिसे ही शिक्षित हुए हैं तो भी आप उसे आसुरी शिक्ष्ण पद्धति क्यों कहती हैं ?


     यदि मैं और आप मांस भक्षण करें तो क्या वह तामसिकसे सात्त्विक आहार हो जायेगा ? नहीं  न ।  उसीप्रकार आज समाजमें जो भी सात्त्विक हैं, परोपकारी या राष्ट्रनिष्ठ हैं, वे इस शिक्षण पद्धतिके कारण नहीं है, कुछके पूर्व जन्मके संस्कार बहुत ही दृढ थे; इसलिए इस आसुरी शिक्ष्ण पद्धतिसे शिक्षित होनेपर भी […]

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शंका समाधान- साधना करनेसे अनिष्ट शक्तियां अनिष्ट प्रभाव डाल रही हो तो क्या कुछ समयके लिए साधना बंद करनी चाहिए?

यदि साधना करनेसे अनिष्ट शक्तियां मुझपर अनिष्ट प्रभाव डाल रही हे और मेरे सारे कार्य खराब कर रही है, तो क्या कुछ समयके लिए साधना बंद कर देनी चाहिए ? – अभिषेक, पुणे


तीव्र कष्टमें नामजप, पूजा-पाठ इत्यादिसे विशेष लाभ नहीं होता है, इस हेतु किसी सन्तके कार्यमें तन, मन, धन और बुद्धिसे यथाशक्ति सेवा करें ! इससे…..

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क्रियमाण कर्म किसे कहते हैं ?

क्रियमाण कर्म किसे कहते हैं ? – विमेश पारेख, वडोदरा, गुजरात


संचितका अर्थ है पिछले सभी जन्मोंके कर्मका सम्पूर्ण या कुलयोग कुलयोग | उन कर्मोंसे एक छोटा सा अंश जो हम इस जन्ममें लेकर भोगने हेतु आते हैं उसे प्रारब्ध कहते हैं ! जैसे कोषागारमें (बैंकमें) एक चालू खाता और एक बचत खाता होता है वैसे ही प्रारब्ध चालू खाता है और संचित बचत………

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क्या कलियुगमें समद्रष्टा सन्त होते हैं?


एक पाठकने लिखा है कि कलियुगमें समद्रष्टा सन्त होते ही नहीं हैं !
वस्तुत: कलियुगके कालमें यह धरा मात्र और मात्र ऐसे सन्तोंके कारण ही टिकी है ! कलियुगमें एक नहीं अनेक समद्रष्टा सन्त हुए हैं । किन्तु ऐसे सन्तोंसे मिलना…..

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