शंका समाधान

शंका समाधान- साधना करनेसे अनिष्ट शक्तियां अनिष्ट प्रभाव डाल रही हो तो क्या कुछ समयके लिए साधना बंद करनी चाहिए?

यदि साधना करनेसे अनिष्ट शक्तियां मुझपर अनिष्ट प्रभाव डाल रही हे और मेरे सारे कार्य खराब कर रही है, तो क्या कुछ समयके लिए साधना बंद कर देनी चाहिए ? – अभिषेक, पुणे


तीव्र कष्टमें नामजप, पूजा-पाठ इत्यादिसे विशेष लाभ नहीं होता है, इस हेतु किसी सन्तके कार्यमें तन, मन, धन और बुद्धिसे यथाशक्ति सेवा करें ! इससे…..

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क्रियमाण कर्म किसे कहते हैं ?

क्रियमाण कर्म किसे कहते हैं ? – विमेश पारेख, वडोदरा, गुजरात


संचितका अर्थ है पिछले सभी जन्मोंके कर्मका सम्पूर्ण या कुलयोग कुलयोग | उन कर्मोंसे एक छोटा सा अंश जो हम इस जन्ममें लेकर भोगने हेतु आते हैं उसे प्रारब्ध कहते हैं ! जैसे कोषागारमें (बैंकमें) एक चालू खाता और एक बचत खाता होता है वैसे ही प्रारब्ध चालू खाता है और संचित बचत………

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क्या कलियुगमें समद्रष्टा सन्त होते हैं?


एक पाठकने लिखा है कि कलियुगमें समद्रष्टा सन्त होते ही नहीं हैं !
वस्तुत: कलियुगके कालमें यह धरा मात्र और मात्र ऐसे सन्तोंके कारण ही टिकी है ! कलियुगमें एक नहीं अनेक समद्रष्टा सन्त हुए हैं । किन्तु ऐसे सन्तोंसे मिलना…..

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एक पाठकने पूछा है कि धर्मकार्य किसे कहते हैं ?


जिस कार्यसे जीवका ऐहिक और पारलौकिक कल्याण हो एवं जिससे समाज व्यवस्था उत्तम रहे, उसे धर्म कहते हैं, यह परिभाषा आद्य गुरु शंकराचार्यने दी है ! वस्तुत: इस परिभाषा अनुरूप कार्यको ही धर्मकार्य कहना चाहिए ! वैसे यदि आप किसी सन्तके कार्यसे जुडकर सेवा करते हैं तो वह भी धर्मकार्यकी ही श्रेणीमें आता है; क्योंकि […]

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क्या दुर्जनोंको प्रेमसे समझाकर परिस्थितिको परिवर्तित नहीं किया जा सकता है ?


एक पाठकने पूछा है, “व्यवस्था परिवर्तनके लिए क्रान्ति क्यों ? क्या दुर्जनोंको प्रेमसे समझाकर परिस्थितिको परिवर्तित नहीं किया जा सकता है ?” उत्तर बडा सरल है, क्या प्रभु श्री रामने और भगवान श्री कृष्णने रावण और दुर्योधनको प्रेमसे सुधारनेकी शिक्षा नहीं दी थी ?; परन्तु परिणाम क्या हुआ ? जब अवतारी राम और परमेश्वर सदृश […]

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शंका समाधान – समर्पित शिष्यके ऊपर नहीं लागू होते हैं पञ्च महाऋण !

कलके मेरे निम्नलिखित लघु लेखपर एक पाठकने कहा है कि आपका यह लघु लेख शास्त्र सम्मत नहीं है; क्योंकि उनके अनुसार, (उन पाठक महोदयके अनुसार) मनुष्यके लिये नित्य कर्मके बाद ही अन्य नैमित्तिक कर्म, काम्य अनुष्ठान, जप आदिकी पात्रता आती है ।


कलके मेरे निम्नलिखित लघु लेखपर एक पाठकने कहा है कि आपका यह लघु लेख शास्त्र सम्मत नहीं है; क्योंकि उनके अनुसार, (उन पाठक महोदयके अनुसार) मनुष्यके लिये नित्य कर्मके बाद ही अन्य नैमित्तिक कर्म, काम्य अनुष्ठान, जप आदिकी पात्रता आती है । अनिवार्य नित्य कर्म इस प्रकार  हैं – (१) स्नान, (२) नित्य स्नानांग तर्पण […]

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हिन्दू धर्म संकीर्णता नहीं, अपितु व्यापकताकी सीख देता है !

कुछ व्यक्ति हमारे साधकोंसे पूछते हैं कि आपने ‘जागृत भव’ जो हमारे व्हाट्सऐप्प गुटका नाम है, उसे अंग्रेजीमें क्यों लिखते हैं, उसे हिंदी भाषामें लिखें, यह सात्त्विक कृत्य होगा ! 


कुछ व्यक्ति हमारे साधकोंसे पूछते हैं कि आपने ‘जागृत भव’ जो हमारे व्हाट्सऐप्प गुटका नाम है, उसे अंग्रेजीमें क्यों लिखते हैं, उसे हिंदी भाषामें लिखें, यह सात्त्विक कृत्य होगा…

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कुलमें ज्येष्ठोंके धर्मविमुख होनेपर अन्य सदस्य पितृदोष निवार्णार्थ क्या करें ?

शंका समाधान
श्री नीरज मिश्रने (मिश्रा लिखना भाषाकी दृष्टिसे अयोग्य है, यह अंग्रेजोंके कालसे आरम्भ हुआ; क्योंकि अंग्रेजीमें मिश्रको Mishra लिखा जाता है) कल प्रसारित किए गए सत्संगके सन्दर्भमें, जिसका विषय था, यदि घरमें बडे भाई पितरोंका श्राद्ध करते हों तो छोटे भाइयोंको क्या करना चाहिए ?, एक प्रश्न पूछा है, जो इसप्रकार है -
मैं इन सबपर अर्थात धर्म आदिपर बहुत विश्वास करता हूं और मुझे लगता है कि मेरे घरमें पितृदोष बहुत है; परन्तु मेरे बडे भाई, जो मेरे पिताजीका श्राद्ध करते हैं, वे इन सबपर विश्वास नहीं करते और सब कुछ देर-सवेर नाममात्रका अर्थात करना चाहिए, इसलिए करते हैं और इसी कारणसे हमारा कोई कार्य भी नहीं हो पा रहा है, कृपया मार्गदर्शन करें ।


मैं इन सबपर अर्थात धर्म आदिपर बहुत विश्वास करता हूं और मुझे लगता है कि मेरे घरमें पितृदोष बहुत है; परन्तु मेरे बडे भाई जो मेरे पिताजीका श्राद्ध करते हैं, वे इन सबपर विश्वास नहीं करते और सब कुछ देर-सवेर नाममात्रका……

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शंका समाधान


‘पुरोहित बननेके लिए आवश्यक घटक’, इस लेखसे सम्बन्धित एक व्यक्तिने अपनी शंकाका व्यक्त करते हुए पूछा है कि क्या मात्र उत्तर भारतके पण्डितोंके संस्कृतके उच्चारण ठीक नहीं होते हैं ?…..

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‘श्रीगुरुदेव दत्त’का जप क्यों आवश्यक ?

प्रश्न : आपके जालस्थलमें (www.vedicupasanapeeth.org) 'श्रीगुरुदेव दत्त' जपके विषयमें पढा, मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या ‘श्रीगुरुदेव दत्त’का जप करनेसे हमारी अध्यात्मिक प्रगति हो सकती है ? – श्री रवि बेल्सारे, पुणे, महाराष्ट्र


‘श्रीगुरु देव दत्त’का जप दत्तात्रेय देवताका जप है, ये एक उच्च कोटिके देवता हैं । यदि ये हमारे कुलदेवता या इष्टदेवता हों तो इनके जपसे निश्चित ही हमारी अध्यात्मिक प्रगति हो सकती है …….

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