शंका समाधान

अग्निहोत्रसे सम्बन्धित शंका समाधान (भाग-६)


प्रश्न : क्या कार्यालयसे आनेके पश्चात बिना स्नान किए अग्निहोत्र किया जा सकता है ? उत्तर : यदि आप सम्पूर्ण दिवस शौच नहीं जाते हैं एवं आपका कार्य मात्र लेखन इत्यादिका हो तब तो आप बिना स्नान किए हाथ-पांव धोकर अग्निहोत्र कर सकते हैं । किन्तु यदि आप किसी चर्म (चमडेका), मांसाहार या चिकित्सासे सम्बन्धित […]

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अग्निहोत्रसे सम्बन्धित शंका समाधान (भाग-५)


प्रश्न : अग्निहोत्रके पात्रको कब स्वच्छ करना चाहिए ? क्या उसे प्रातः और सन्ध्या समय अर्थात दोनों समय धोना चाहिए ? उत्तर : यदि अग्निहोत्र पात्र ताम्बेका हो तो उसे प्रतिदिन प्रातःकाल अवश्य ही स्वच्छ करना चाहिए । सन्ध्या समय उसे स्वच्छ करनेकी आवश्यकता नहीं है । अनेक बार अग्निहोत्र करने हेतु भूमिमें मिट्टीके हवन […]

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अग्निहोत्रसे सम्बन्धित शंका समाधान (भाग-४)


क्या स्त्रियां अग्निहोत्र कर सकती हैं ? हां ! स्त्रियां भी अग्निहोत्र कर सकती हैं । मात्र रजोधर्मके समय पांच दिवस इसे नहीं करना चाहिए । जन्म पातकके समय भी जबतक जच्चा, रजस्वलामें हो तबतक इसे नहीं करना चाहिए, चाहे ग्यारह दिवसका पातक (सूतक) समाप्त ही क्यों न हो गया हो ! एक और बातका […]

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अग्निहोत्रसे सम्बन्धित शंका समाधान (भाग-३)


प्रश्न : यदि मैं सन्ध्याको अग्निहोत्र हवन करता हूं और किसी दिन सन्ध्याको न कर सकूं तो क्या उस दिनका हवन अगले दिवस प्रातःकालमें कर सकता हूं ? उत्तर : नहीं ! इस यज्ञमें प्रत्येक दिवसकी आहुति उसी दिवस दी जाती है । यदि किसी दिन अपरिहार्य कारणोंसे नहीं कर पाए तो सूक्ष्मसे उसी समय […]

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अग्निहोत्रसे सम्बन्धित शंका समाधान (भाग-२)


मैं सन्ध्या समय अपने कार्यालयसे देरीसे आता हूं अर्थात मुझे घर आते-आते रात हो जाती है, ऐसेमें क्या मैं एक समयका अग्निहोत्र कर सकता हूं ? अग्निहोत्रमें सूर्योदयके समय सूर्यका आवाहन होता है एवं सूर्यास्तमें समय उसका निस्तारण । एक समयके अग्निहोत्रका अर्थ हुआ कि आपने अपनी उपासनाको पूर्ण नहीं किया । किसी भी कर्मकाण्डमें […]

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बच्चोंको श्रीगुरुदेव दत्तका जप करते समय ॐ लगाना चाहिए या नहीं ?

हम आपकी संस्थाद्वारा प्रसारित श्रव्य बालसंस्कारवर्गके नियमित श्रोता हैं । यह हमारे बच्चोंके अतिरिक्त हमें भी बहुत अच्छा एवं ज्ञानवर्धक लगता है । मैं यह पूछना चाहती हूं कि जैसा कि बालसंस्कारके वर्गमें बताया गया है कि बच्चोंको भी नियमित १५ मिनिटका दत्तात्रेय देवताका जप करना चाहिए तो मैं यह जानना चाहती हूं कि बच्चोंको 'श्रीगुरुदेव दत्तका जप करते समय ॐ लगाना चाहिए या नहीं ? – एक श्रोता व पाठक


उत्तर : बच्चे दो स्थितियोंमें ‘श्रीगुरुदेव दत्त’के जपमें ॐ लगा सकते हैं । एक यदि उन्हें अनिष्ट शक्तियोंका तीव्र कष्ट हो तो वे ‘श्रीगुरुदेव दत्त’के जपमें ॐ लगाकर जप कर सकते हैं । बच्चोंको तीव्र कष्टके कुछ उदाहरण हैं जैसे उनका अत्यधिक चंचल होकर पढाईमें मन न लगना, अत्यधिक हठ करना, सदैव छोटे-मोटे रोग लगे […]

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जितेन्द्रिय गुरु अपने शिष्योंपर क्रोध क्यों करते हैं ? – एक साधक


शास्त्र अनुसार माता-पिता, गुरु और राजाको अपने शरणमें रहनेवालोंको योग्य एवं अयोग्य वर्तनपर तीक्ष्ण दृष्टि रखनी चाहिए । इनके संरक्षण में रहनेवाले यदि अनेक बार बतानेपर भी अयोग्य वर्तन करते हैं तो उन्हें दण्डित करना ही चाहिए, ऐसा न करनेपर वे पापके अधिकारी होते हैं । राजाको तो प्रजाद्वारा समाजघातक अपराध करनेपर मृत्युदण्ड देनेतकका अधिकार […]

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अध्यात्ममें मुझे क्या अच्छा लगता है ?, उसका कोई महत्त्व नहीं होता; अपितु मेरे लिए क्या योग्य है ?, यह अधिक महत्त्व रखता है !


मेरी कुलदेवी समुदा मां है; परन्तु मुझे मेलदी मांका जप करनेका मन करता है; कृपया मेरा योग्य मार्गदर्शन करें – अल्पेश, सूरत

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समाज हित हेतु जो आवश्यक है, उसे लिखना मेरा धर्म है

एक व्यक्तिका पत्र आया है, “आप इस प्रकार कामवासना सम्बन्धित उद्बोधनात्मक लेख न डालें, इससे आपकी आध्यात्मिक छवि धूमिल हो जाएगी !”


शासन तो सबको लैंगिक शिक्षा (सेक्स एडुकेशन) दे रहा है, ‘लिव-इन रिलेशनशिप’, ‘गे रिलेशनशिप’को मान्यता दे रहा है, प्रसार माध्यम (मीडिया) मनोरंजनके नामपर अश्लील चित्र, साहित्य एवं चित्रपट (सॉफ्ट पॉर्न) परोसकर अपनी रोटी सेक रहे हैं ! ऐसेमें इस देशके नागरिक दिशाहीन और भ्रमित हैं, यदि हम अपने देशवासियोंको योग्य दिशा नहीं देंगे तो कौन […]

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सन्तान प्राप्ति न हो रही हो, तो क्या किसी बच्चेको गोद ले सकते हैं !

हमारे विवाहको चौदह वर्ष हो चुके हैं; किन्तु हम निःसन्तान हैं । हमने अनेक प्रयास किए; किन्तु हमें यश नहीं मिला है । हमारे कुछ शुभचिन्तकोंका कहना है कि हमें किसी अनाथाश्रमसे किसी बच्चेको गोद ले लेना चाहिए ?
इस सम्बन्धमें क्या आप कुछ बताना चाहेंगी ?


बहुत प्रयास करनेपर भी है सन्तान प्राप्ति न होना यह बताता है कि यह एक आध्यात्मिक कष्ट है । यदि आपके प्रारब्धमें सन्तान योग नहीं है तब तो आप यदि किसी बच्चेको गोद लेते हैं तो आप एक नूतन जीवसे अपना लेन-देन निर्माण कर रहे हैं । यदि आप साधक हैं तो ईश्वर प्रदत्त इस […]

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