संत वाणी

सन्त वाणी


जो व्यक्ति अपना पक्ष छोडकर दूसरे पक्षसे मिल जाता है, वह अपने पक्षके नष्ट हो जाने पर स्वयं भी परपक्षद्वारा नष्ट कर दिया जाता है । – महर्षि वाल्मीकि

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सन्त वाणी


जो मनुष्य जिसके साथ जैसा व्यवहार करे, उसके साथ भी उसे वैसा व्यवहार करना चाहिए, यह धर्म है । – वेदव्यास

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सन्त वाणी


धैर्य, धर्म, मित्र और नारीकी परीक्षा आपात स्थितिमें होती है ।- सन्त तुलसीदास

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सन्त वाणी


अमृत और मृत्यु दोनों इस शरीरमें ही स्थित हैं । मनुष्य मोहसे मृत्युको और सत्यसे अमृतको प्राप्त होता है । – वेदव्यास

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सन्त वाणी


सहयोग प्रेमकी सामान्य अभिव्यक्तिके अतिरिक्त कुछ नहीं है । – स्वामी रामतीर्थ

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सन्त वाणी


धनका प्रयोग केवल दूसरोंकी भलाईमें होना चाहिए, अन्यथा यह अहंकार एवं विलासिताका स्रोत बन जाता है |- स्वामी विवेकानन्द

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सन्त वाणी


एक बच्चेका जन्म उस दिवस और उस घण्टेमें होता है, जब ब्राह्मण्डीय किरणें उस जीवात्माके कर्मोंके गणितीय सामंजस्यके अनुरूप होती हैं । – स्वामी श्री युक्तेश्वर गिरी

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सन्त वाणी


संसारकी प्रत्येक वस्तु प्रतीक्षा कर सकती है; परन्तु ईश्वरके लिए हमारी खोज प्रतीक्षा नहीं कर सकती है । – परमहंस योगानन्द

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सन्त वाणी


व्यक्तिकी धारणा (मान्यता) उसके वातावरणसे प्रभावित होती है; अतः उसे पवित्र व ज्ञानियोंकी ही संगति करनी चाहिए । अपने आत्मरूपमें विश्वास ही सच्ची धारणा है एवं अनात्माको आत्मरूप मानना ही अविश्वास है । – स्वामी रामकृष्ण परमहंस

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सन्त वाणी


यदि तुम्हें उन्मत्त होना ही है तो सांसारिक पदार्थोंके लिए मत हो; वरन सदैव ईश्वरके लिए हो । – स्वामी रामकृष्ण परमहंस

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