साधना

साधकके गुण एवं उसका वर्तन


इस लेख अंतर्गत हम साधकके कुछ गुण एवं उसके भिन्न परिस्थितियोंमें उसके वर्तनके विषयमें जानेंगे । १. किसी भी परिस्थितिमें उपालम्भ न कर आनन्दी रहनेवाला किसी भी परिस्थितिमें गुरु या ईश्वरसे जो कोई उपालम्भ (शिकायत) नहीं करता अपितु उस परिस्थितिको ईश्वरने कुछ सिखाने हेतु निर्माण किया है; यह सोचकर प्रतिकूल परिस्थितियोंमें भी कृतज्ञताका भाव रख, […]

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कृतज्ञता – भक्तियोग अंतर्गत साधनाका एक महत्त्वपूर्ण चरण


प्रार्थना अर्थात आर्ततासे निवेदन करना और कृतज्ञता अर्थात ईश्वरके प्रति अपनी श्रद्धा सुमन अर्पण करना | कृतज्ञता भक्तिके भावको बढा देता है | ईश्वरने जो भी कुछ दिया है उसके प्रति आदरभाव रखते हुए उनके प्रति अपने श्रद्धा व्यक्त करना उसे कृतज्ञता कहते हैं | कृतज्ञताके भाव से हमारा कर्तापन घटता है | अतः प्रत्येक कृति […]

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स्तरानुसार साधनासे सम्बंधित प्रसंग भाग – ४


जनवरी २०११ में चेन्नईमें एक दंपतिसे भेंट हुई | दोनोंको हमारी संस्थाका उद्देश्य अच्छा लगा और वे हमसे जुड गए | प्रत्यक्षमें दोनोंका मेरे प्रति भाव अच्छा  था | मैंने चार दिन उनके घरमें रहनेके पश्चात उनका सूक्ष्म परीक्षणकर अध्यात्मिक स्तर निकाला तो पता चला कि पतिका आध्यात्मिक स्तर ५६% था और पत्नी का ४०% […]

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स्त्रीयोंने अपने मनसे तेजोपनसा करना टालना चाहिए


एक स्त्री साधिका अपने मनसे गायत्रीका जप करती थीं, उन्हें मासिकसे सम्बन्धित कष्ट थे और साथ ही उन्हें अत्यधिक क्रोध भी आता था । यह उन्होंने एक सत्संगमें शंका समाधानके समय व्यक्त किया । कुछ पढी-लिखी स्त्रियां इस बातका विरोध करती हैं कि हमारे धर्मग्रन्थोंमें स्त्री और पुरुषके साथ भेद-भाव किया गया है और स्त्रियोंको […]

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नामजपके लिए सर्वोत्तम काल है ब्रह्म मुहूर्त


नामजपके लिए सर्वोत्तम काल है ब्रह्म मुहूर्त | यदि हम ब्रह्ममुहूर्तमें उठकर नामजप करते हैं तो उस समय वातावरणमें अत्यधिक चैतन्य विद्यमान होता है क्योंकि ऋषि, मुनि, तपस्वी उसी समय उठकर साधना करते है इस कारण ब्रह्मांडकी सात्त्विकता अधिक होती है; परन्तु यदि हम ब्रह्ममुहूर्तमें उठकर नामजप न कर पायें तो हम क्या करें ? […]

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धर्मप्रसारकी सेवासे साधना कैसे होती है ?


१. धर्मप्रसारसे ज्ञान बढता है धर्मप्रसारके मध्य जब हम भिन्न प्रकारके जिज्ञासुओं एवं साधकोंसे मिलते हैं तो कई बार उनसे सीखते हैं और कई बार उनकेद्वारा पूछे गए प्रश्नके उत्तर ढूंढनेके क्रममें हमारे ज्ञानके भंडारमें बढोत्तरी होती है | समाजको धर्मकी शिक्षा देनी है इस कारण हम धर्मका अभ्यास कर ज्ञानार्जन करते हैं | हिन्दु […]

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