प्रत्येक ‘मालिश’के पश्चात यदि रोगी न्यूनतम आधे घण्टेतक वस्त्र ओढकर विश्रामकर ले तो इससे विशेष लाभ होता है । नित्यकी ‘मालिश’से भूख खुल जाती है, नींद अच्छी आने लगती है, त्वचा कोमल, लचीली और चमकीली हो जाती है । शरीरका रंग खुल जाता है । शुष्क घर्षण स्नान : शुष्क घर्षण स्नान और कुछ नहीं, […]
इनकी जानकारी निम्नलिखित है : दीर्घ मर्दन : ये विस्तृत रूपसे हाथ घुमाकर होता है, जैसे पीठ, हाथ, पांव आदिका मर्दनमें किया जाता है । ह्रस्व मर्दन : दीर्घ मर्दनसे अल्प विस्तृत और आस-पास हाथ घुमाकर होता है, जैसा स्नायुओं तथा मणकोंपर किया जाता है । मण्डल मर्दन : मण्डलाकार मर्दन हाथ घुमाकर होता है, […]
मर्दन अर्थात मालिश चिकित्सा : यह एक अति प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है और आज भी भारतके घर-घरमें यह प्रचलित है । इस अंकमें हम आपको इस चिकित्सा प्रणालीके कुछ तत्त्वोंसे परिचय कराते हैं । मर्दनके विभिन्न प्रकारोंका वर्णन तथा मर्दनसे लाभ : मर्दनकी विविध विधियोंको समझानेसे पूर्व इस सम्बन्धमें कुछ विशेष बातें समझ लेनी चाहिए […]
उद्गीथ प्राणायाम प्रत्येक आयुके व्यक्तिके लिए लाभदायक है । जब भी मनमें तनाव और उद्विग्नता अनुभव हो, तब इस प्राणायामका अभ्यास करके मन शान्त किया जा सकता है । ★ वायुविकार (गैस), अम्लता (एसीडिटी) और उदरके (पेटके) अन्य रोग उद्गीथ प्राणायामसे दूर हो जाते हैं । उद्गीथ प्राणायाममें सतर्कता ★ उद्गीथ प्राणायाममें श्वासको शरीरके भीतर […]
उद्गीथ प्राणायामकी समय सीमा उद्गीथ प्राणायाममें श्वास शरीरके भीतर लेनेका समय तीनसे पांच ‘सेकेण्ड’का रखें ! ★ “ॐ”के जपके साथ जब श्वास बाहर छोडें, तब उसका समय पन्द्रहसे बीस ‘सेकेण्ड’तक, अपनी शक्ति अनुसार खींचनेका प्रयास करें ! (ध्यान रहे, अपने शरीरकी मर्यादामें रहकर ही बल लगाएं !) ★ एक सामान्य व्यक्ति उद्गीथ प्राणायाम अभ्यासको प्रतिदिन […]
उद्गीथ प्राणायामको “ओमकारी जप” भी कहा जाता है । यह एक अति सरल प्राणायाम है और एक प्रकारका ध्यानाभ्यास भी है । उद्गीथ प्राणायाम प्रतिदिन प्रातःकाल करनेसे व्यक्तिको अनेक शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं । उद्गीथ प्राणायाम चिन्ता, ग्लानि, द्वेष, दुख और भयसे मुक्ति दिलाता है । इस प्राणायामके अभ्याससे ध्यान-शक्ति बढ जाती है, […]
प्राणवायुकी (ऑक्सीजनकी) मात्राको बनाए रखता है : शीतकारी प्राणायामके नियमित अभ्यास करनेसे शरीरमें ‘ऑक्सीजन’की मात्रा अल्प नहीं होती है । रक्त संचार प्रक्रियाके लिए : इसके नियमित अभ्याससे शरीरमें रक्त संचार प्रक्रियामें लाभ मिलता है । यदि हमारा रक्त संचार सामान्य रहे तो न ही हृदयरोग होंगे और न ही अन्य रोग । शरीरमें स्फूर्ति […]
‘शीतकारी’का अर्थ होता है ठण्डक अर्थात जो हमारे शरीर और मनको ठण्डक पहुंचाती है । इस प्राणायामको करते समय मुखसे ‘शी’ शब्दकी ध्वनि निकालनी होती है और इसी कारणसे इस प्राणायामका नाम शीतकारी प्राणायाम पडा । यह प्राणायाम भी अत्यधिक सरल और उपयोगी प्राणायाम है । इनका अभ्यास ग्रीष्म ऋतुमें ही करना चाहिए । हम […]
उज्जायी प्राणायामको खडे होकर कैसे करें ? * सबसे पहले आप सावधानकी अवस्थामें खडे हो जाएं ! ध्यान रहे कि आपकी दोनों एडियां आपसमें मिली हों और दोनों पंजे फैले हुए हों । * अब अपनी जीभको नालीके समान बनाकर होठोंके मध्यसे हलका-सा बाहर निकालें ! * अब बाहर निकली हुई जीभसे भीतरकी वायुको धीरे-धीरे […]
उज्जायी प्राणायाम करनेकी समय व अवधि : इसका अभ्यास प्रतिदिन करनेसे अच्छे परिणाम मिलते हैं । सवेरे और सन्ध्या समय खाली पेट इस प्राणायामका अभ्यास करना अधिक फलदायी होता है । श्वास भीतर लेनेका समय प्रायः ५-७ सेकेण्ड तकका होना चाहिए और बाहर छोडनेका समय १५-२० सेकेण्डतकका होना चाहिए । उज्जायी प्राणायामसे होनेवाले लाभ : […]