* परिचय : अपामार्ग अर्थात जो दोषोंको संशोधन करे, बढ रही भूखको शान्त करे, दन्तरोगोंको हर ले और अन्य बहुतसे असाध्य रोगोंका नाश करे, ऐसा दिव्य पौधा भारतवर्षके प्रायः सभी प्रान्तोंमें, नगरोंमें तथा गांवोंमें, सर्वत्र जंगली अवस्थामें पाया जाता है । वर्षा ऋतुमें यह विशेषकर पाया जाता है; परन्तु कहीं-कहींपर यह वर्षपर्यन्त भी मिलता है […]
सरसोंके बीजके पौष्टिक तत्त्व : सरसोंके बीजके औषधीय गुण, उसमें पाए जानेवाले पौष्टिक तत्त्वोंके कारण होते हैं । जल ५ ग्राम, ‘कैलोरी’ ५०८ ‘kcal’, ‘प्रोटीन’ २६ ग्राम, वसा ३६ ग्राम, ‘कार्बोहाइड्रेट’ २८ ग्राम, ‘फाइबर’ १२ ग्राम, मिठास ७ ग्राम, ‘कैल्शियम’ २६६ मिलीग्राम, ‘आयरन’ ९.२० मिलीग्राम, ‘मैग्नीशियम’ ३७० मिलीग्राम, ‘फास्फोरस’ ८३० मिलीग्राम, ‘पोटैशियम’ ७४० मिलीग्राम, ‘सोडियम’ […]
देसी गायके घीके लाभ : १. नाकमें डालनेसे विक्षिप्तता (पागलपन) दूर होती है । २. नाकमें डालनेसे ‘एलर्जी’ समाप्त हो जाती है । ३. नाकमें डालनेसे पक्षाघातका (लकवाका) भी उपचार होता है । ४. २०-२५ ग्राम घी व मिश्री खिलानेसे मद्य, भाङ्ग व गांजेका व्यसन (नशा) घटने लगता है और थोडे समय पश्चात छूट जाता […]
सरसोंका नाम लेते ही मनमें सर्वप्रथम सरसोंका साग आता है । सरसोंका उपयोग अधिकतर तेल निकालनेके लिए ही किया जाता है । इसके अतिरिक्त, भारतीय पाकशालामें (रसोईमें) सरसोंके दानेसे छोंक (तडका) भी लगाया जाता है । स्वास्थ्यके लिए भी इसके कई लाभ हैं । स्वास्थ्य लाभके लिए ही हम सरसोंके बीजोंका उपयोग करते हैं । […]
* पके हुए केलेको काटकर, शक्करके साथ मिलाकर बर्तनमें बन्द करके रख दें । इसके पश्चात इस बर्तनको उष्ण जलमें डालकर ‘गर्म’ करें । इस प्रकार बनाए गए पदार्थके पेयसे (शर्बतसे), खांसीकी समस्या न्यून हो जाती है । * जिह्वापर छाले हो जानेकी स्थितिमें गायके दूधसे बने दहीके साथ केलेका सेवन करना लाभदायक होता है […]
* केले खानेसे ‘कोलोरेक्टल कैंसर’का सङ्कट न्यून होता है । * केलेमें ‘फाइबर’ अधिक मात्रामें पाया जाता है । * केलेके भीतर ‘एंटीऑक्सीडेंट कैरोटिनाइड’ आदि भरे होते हैं, जो आंखोंको स्वस्थ रखनेमें सहायता करते हैं । केलेमें ‘पेक्टिन’ पाया जाता है जिसके कारण मधुमेहके रोगियोंमें ‘ग्लूकोज’के कष्टमें सहायता करता है । केलेका प्रयोग ‘एनीमिया’की चिकित्सामें […]
* पांवोंके लिए : पांवोंके लिए भी केला खानेके लाभ देखे जा सकते हैं । पांवोंकी देखभालके लिए यहां केलेका छिलका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है । पांवोंके लिए इसका प्रयोग ‘अस्ट्रिन्जन्ट’की भांति किया जाता है । प्रयोग : केलेका छिलका लें और उसे पांवों व एडियोंपर धीरे-धीरे रगडें । यह प्रक्रिया पांचसे दस मिनटतक […]
* त्वचाकी मृत कोशिकाओंके लिए : मृत कोशिकाओंको त्वचासे हटानेके लिए भी केलेका प्रयोग किया जा सकता है । यह ‘एंटीऑक्सीडेंट’से समृद्ध होता है, जो त्वचासे मृत कोशिकाओंको हटानेका कार्य करता है । * ‘मुंहासों’के लिए : यदि ‘मुंहासों’से कष्ट हो, तो केलेके छिलकेका प्रयोग, बढते मुंहासोंको रोकनेके लिए किया जा सकता है । केलेका […]
* बढती आयुके लिए : बढती आयुमें झुर्रियोंसे मुक्ति पानेके लिए केला सहायता कर सकता है । केलेमें ‘रिबोफ्लेविन’, ‘नियासिन’, ‘थियामिन’ और ‘फॉलिक एसिड’के रूपमें ‘विटामिन-A’ और ‘विटामिन-C’ प्रचुर मात्रामें होता है । ‘विटामिन-A’को बढती आयुके लिए अच्छा जाना जाता है । यह त्वचामें ‘कोलेजन’को बढाता है और झुर्रियों जैसी समस्यासे बचानेका कार्य कर सकता […]
* पेटके ‘अल्सर’के लिए : पेटका ‘अल्सर’ एक गम्भीर समस्या है । इसमें पेट, ‘एसोफैगस’ या छोटी आंतमें पीडा होती है । यदि इसका उपचार नहीं किया जाए, तो इसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं । ‘अल्सर’के लिए केला भी बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है । केला ‘फाइबर’युक्त होता है और ‘फाइबर’ ‘एंटीबायोटिक’ […]