शास्त्र वचन

चित्तकी प्रसन्नता


चित्ते प्रसन्ने भुवनं प्रसन्नं चित्ते विषण्णे भुवनं विषण्णम् ।
अतोऽभिलाषो यदि ते सुखे स्यात् चित्तप्रसादे प्रथमं यतस्व ॥

अर्थ : यदि चित्त (मन) प्रसन्न हो तो सम्पूर्ण विश्व अच्छा लगता है और यदि चित्त….

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आत्मकल्याण


ब्रह्मभूतस्तु संसृत्यै विद्वान्नावर्तते पुनः। 

विज्ञातव्यमत: सम्यग्ब्रह्माभिन्नत्वमात्मन:।।

– आदि शंकराचार्य कृत विवेक चूडामणि

अर्थ : ब्रह्मभूत हो जानेपर विद्वान पुनः जन्म….

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यौवन कालमें बुद्धि करती है व्यथित


सुनिर्मलाsपि विस्तीर्णा पावन्यपि हि यौवने ।
मतिः कलुषतामेति प्रावृषीव तरङ्गिणी ।। – श्रीवशिष्ठ दर्शनं ( १:२०: १८)   
अर्थ : यद्यपि बुद्धि निर्मल, व्यापक और पावन होती है…

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प्रतिदिन अपने कर्मोंकी अवश्य करें समीक्षा


प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत नरश्चरितमात्मनः 
किं नु मे पशुभिस्तुल्यं किं नु सत्पुरुषैरिति  । – सुभाषितरत्नभाण्डागार

अर्थ : प्रतिदिन व्यक्तिने अपने कर्मोंकी समीक्षा….

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एकता समाजका बल है


ऐक्यं बलं समाजस्य तदभावे स दुर्बल: ।
तस्मात ऐक्यं प्रशंसन्ति दॄढं राष्ट्र हितैषिण: ।।        अर्थ : एकता समाजका बल है, एकताहीन समाज दुर्बल है…..

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सत्संगका महत्व क्या है ?


एक संतने कहा है

सतसंगत को जाईये, तज मोह अभिमान ।।
ज्यों ज्यों पग आगे बढे , कोटि यज्ञ सामान ।।          अर्थात सत्संगकी ओर बढनेवाले प्रत्येक कदम कोटि-कोटि यज्ञका फल देता है

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दो प्रकारके व्यक्ति पाते हैं यश


द्वाविमौ पुरुषव्याघ्र सूर्यमण्डलभेदिनौ 
परिव्रान्ङ योग्युक्तश्च रणे चाभिमुखो हतः  । – विदुर नीति                                                
अर्थ : दो प्रकारके व्यक्ति सूर्यमण्डलको भेदनेकी…..

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नाम की महिमा पर संत तुलसीदास रचित श्री रामचरित मानस से कुछ दोहवाली


नाम प्रसाद संभु अबिनासी। साजु अमंगल मंगल रासी॥
सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी। नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी॥१॥

भावार्थ:-नाम ही के प्रसाद से शिवजी अविनाशी हैं

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तुलसी मंत्र


तुलसी को जल देते समय : महाप्रसाद जननी, सर्व सौभग्यवर्धिनी आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते तुलसी के पत्ते तोडते समय : ॐ सुभद्राय नमः ॐ सुप्रभाय नमः

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क्रोधसे होता है सर्वनाश


क्रोधाद्भुवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥                                                अर्थ : क्रोधसे अत्यन्त मूढ भाव उत्पन्न हो जाता है, मूढभावसे स्मृतिमें भ्रम हो जाता है, स्मृतिमें भ्रम हो जानेसे बुद्धि अर्थात् ज्ञानशक्तिका नाश हो […]

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